ईसाइयत
ईसा मसीह के दादा कौन थे? कौन क्या कहता है जानिए
ईसा मसीह के माता-पिता का नाम तो सब जानते हैं, लेकिन उसके आगे इतिहास की कड़ियाँ उलझ जाती हैं. जानिए ईसाई विद्वान भी ईसा मसीह के दादा के असली नाम को लेकर सवाल पर जवाब देने के बजाय क्यों बगलें झाँकने लगते हैं? बाइबल के सुसमाचारों में दर्ज सच—एक ऐसे विरोधाभास की परत-दर-परत पड़ताल, जो आपकी सोच बदल देगी.

– सुसमाचारों में यीशु की वंशावली अलग-अलग
– किताबों में पूर्वजों की संख्या में फर्क
– दो किताबें- दोनों में यीशु के दादा के नाम अलग-अलग
ईसा मसीह की माता का नाम मरियम और जोसफ पिता का नाम युसूफ या जोसफ था. जोसफ के पिता यानी ईसा मसीह के दादा कौन थे, यह आज भी स्पष्ट नहीं है. यूँ कहिये कि इसका स्पष्ट जवाब हमें कहीं भी नहीं मिलता है. साथ ही, इस बारे में हम जितनी गहराई में जाते हैं, उतने ही भ्रमित होते चले जाते हैं, और मृग मरीचिका या फिर कल्पनाओं के लोक में भटकने के बाद अंततः निराशा ही हाथ लगती है. लोग ठगा सा महसूस करते हैं.
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| आस्था और इतिहास- बाइबल में दर्ज है ईसा मसीह के दादा का नाम |
आखिर इसकी वजह क्या है? क्यों अब तक लोग ईसा मसीह के दादा का सही या असली नाम नहीं जान सके हैं? विद्वानों के अनुसार, इसकी वजह है बाइबल, जिसमें यीशु या ईसा मसीह के दादा का नाम अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग बताया गया है.
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| पवित्र बाइबल की संरचना- इतिहास, कानून और सुसमाचार |
विदित हो कि बाइबल के दो भाग हैं- ओल्ड टेस्टामेंट और न्यू टेस्टामेंट, जिन्हें पुराना नियम और नया नियम के नाम से भी जाना जाता है. पुराना नियम में ईश्वर द्वारा सृष्टि की उत्पत्ति, यहूदी राज्य और ईश्वर से उसका संबंध, आदि का कहानियों के जरिए वर्णन है. वहीं, नया नियम वाले हिस्से में ईसा मसीह के जीवन की सभी घटनाओं का जिक्र है. यूँ कहिये कि नया नियम वाले खंड में इसमें ईसा मसीह के जन्म से लेकर कब्र में दफन होने और फिर से जीवित हो जाने की घटनाओं जिक्र है.
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| पुराना नियम और नया नियम |
‘नया नियम’ के चार भाग हैं- चार गॉस्पेल, प्रेरितों के काम, सामान्य पत्रियाँ और प्रकाशित वाक्य.
गॉस्पेल यानी सुसमाचार (शुभ या अच्छा समाचार) की वे 4 किताबें हैं, जो यीशु के 4 शिष्यों (जो हमेशा साथ रहते थे), मत्ती, मरकुस, लूका और युहन्ना द्वारा लिखी गई हैं. इनमें यीशु के जीवन के बारे में वर्णन है.
ज्ञात हो कि यीशु के चार शिष्यों में से दो शिष्यों, मरकुस तथा युहन्ना ने यीशु के पूर्वजों के बारे में कोई जिक्र नहीं किया है, जबकि अन्य दो शिष्यों, मत्ती और लूका ने इस पर प्रकाश डाला है. मगर, हैरानी की बात यह है कि दोनों की ओर दी गई ईसा मसीह की वंशावली के वर्णन एक दूसरे से मेल नहीं खाते हैं- दोनों में बहुत फर्क है.
मत्ती की ओर से पेश वंशावली में अब्राहम से लेकर जीसस ईसा मसीह या यीशु तक केवल 39 पूर्वजों का जिक्र है, जबकि लूका की ओर से दिए गए आंकड़ों में अब्राहम से यीशु तक के पूर्वजों की संख्या बढ़कर 52 हो गई है.
इतना ही नहीं, दोनों गॉस्पेल में यीशु के दादा के नाम भी अलग-अलग बताए गए हैं.
मत्ती के मुताबिक, यीशु के दादा का नाम याकूब (जेकब) था. उसने लिखा है:
” याक़ूब से युसूफ पैदा हुआ, जो मरियम का पति था. मरियम से यीशु का जन्म हुआ, जो मसीह कहलाया.”
दूसरी तरफ, लूका बताता है कि यीशु का दादा एली (या हेली) था. उसने लिखा है:
” यीशु ने जब अपना सेवा कार्य आरंभ किया, तो वह लगभग तीस वर्ष का था. ऐसा सोचा गया कि वह एली के बेटे युसूफ का पुत्र था. “
अब सवाल उठता है कि कौन-सा नाम सच्चा है, और कौन-सा झूठा है. यीशु के दादा याकूब थे या एली?
मगर, इससे भी बड़ा सवाल सुसमाचारों अथवा गॉस्पेल (गॉस्पेल ट्रूथ) को लेकर है, जिन्हें अकाट्य समझा जाता है. ऐसा माना जाता है कि ये सच की कसौटी हैं- इनमें झूठ की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि ये परमेश्वर द्वारा या उसकी की प्रेरणा से उन शिष्यों (परम भक्तों) द्वारा लिखे गए हैं, जो हमेशा यीशु के साथ रहते थे. यानी गॉस्पेल ईश्वरीय शब्द या दिव्य वचन हैं, जो शत-प्रतिशत सच्चे हैं. तो फिर, गलती कैसे हो गई? क्या ईसाइयों के पमेश्वर (गॉड) ने अपने परम भक्तों को सही प्रेरणा नहीं दी? या फिर उन्हें अंधेरे में रखा- कुरान के अल्लाह की तरह उन्हें गुमराह किया?
एक बात और, ईसाई मिशनरियां अक्सर दाउद या किंग डेविड (David) के नाम का जिक्र कर उसे यीशु के पूर्वजों से जोड़ती हैं. यीशु को राजा डेविड का उत्तराधिकारी बताती हैं. मगर, यहां भी, मत्ती की तरफ से पेश वंशावली में दाउद से यीशु (जीसस) के बीच जहां 27 पूर्वज दिखाई देते हैं. वहीं, लूका वाली वंशावली में दाउद से जीसस तक पहुँचते-पहुँचते पूर्वजों की संख्या 42 हो जाती है. इतना ही नहीं, दोनों में आने वाले अधिकतर नाम भी अलग-अलग पाए जाते हैं.
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| वंशावली में पूर्वजों (दाउद से यीशु तक) की संख्या अलग-अलग |
आगे, जब हम मत्ती और लूका वाली वंशावलियों में आने वाले सभी नाम (अब्राहम से यीशु के बीच) आमने-सामने रखते हैं, तो देखते हैं कि पहले 6 नाम समान हैं, लेकिन उसके बाद वे बदलने लगते हैं. कुछ आगे-पीछे हो जाते हैं. जब हम उससे भी आगे चलते हैं, तो ये नाम एक दूसरे से बिल्कुल भी मेल नहीं खाते हैं- अलग-अलग नजर आते हैं. और अंत में, मत्ती में तो यीशु नजर आ जाता है, लेकिन लूका में चूँकि पूर्वज ज्यादा हैं, इसलिए उसकी सूची लंबी होती चली जाती है, और यीशु का नंबर बहुत बाद में आता है.
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| यीशु की वंशावली में सभी पूर्वज (अब्राहम से यीशु) आमने-सामने |
यहां सबसे अहम बात यह है कि मत्ती द्वारा दर्शायी गई वंशावली में यीशु और दाउद के बीच आने वाले कुल 26 नामों में से सिर्फ चार नाम ऐसे हैं, जो लूका द्वारा दर्शायी गई वंशावली में भी मिलते हैं. लेकिन, तीन ऐसे हैं जो थोड़े मिलते-जुलते हैं, और जो नाम मिलते (एक समान) भी हैं, उनका क्रम मेल नहीं खाता है.
निष्कर्ष
हमने देखा कि ईसाइयों की पवित्र पुस्तक बाइबल में झोल है. जिस पर ईसाइयत की पूरी व्यवस्था टिकी है, या फिर यूँ कहिये कि यीशु, जिसको ईसा मसीह, परमेश्वर का पुत्र या परमेश्वर कहा गया है, उसकी वंशावली में ही त्रुटियाँ या अंतर हैं. विचित्र बात यह भी है कि यीशु के चार शिष्यों में से दो- मरकुस और युहन्ना ने उनकी वंशावली नहीं बताई है. जिन दो शिष्यों- मत्ती और लूका ने वंशावली दी है, उनमें ईसा मसीह के दादा के नाम में फर्क है. यानी दोनों में यीशु के दादा का नाम अलग-अलग बताया गया है, जबकि गॉस्पेल या सुसमाचारों को परमेश्वर का वचन और अकाट्य माना जाता है. इतना विरोधाभास!
इसका असर ईसाइयत से जुड़े नेटवर्क और मिशनरियों पर भी दिखाई देता है. ईसाई मिशनरियाँ ईसाइयत के विस्तार को लेकर प्रचार तो खूब करती हैं- सभाओं में और यहाँ तक कि घर-घर जाकर बाइबल का गुणगान कर लोगों का मन बदलने या धर्मांतरण करने प्रयास करती हैं, लेकिन उसमें लिखा क्या है, यह उनमें से ही अधिकतर लोगों को पता नहीं होता है. दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि जिन्हें जानकारी होती है, वे भी लोगों को सच नहीं बताते हैं- गुमराह करते हैं.
चलते चलते अर्ज है यह शेर…
झूठे चेहरों को सच्चा बताता सदा,
रखता इंसां सी फ़ितरत अगर आईना |
और साथ ही…
नज़र आती नहीं मुफ़्लिस की आँखों में तो खुशहाली,
कहां तुम रात-दिन झूठे उन्हें सपने दिखाते हो |
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