समाज

मैडम और औरत शब्द सम्मानजनक नहीं, प्रयोग करने से पहले इनका मतलब जान लें

इस्लामी और ईसाई संस्कृति में स्त्री को माल या भोगने की वस्तु समझे जाने के कारण औरत और मैडम शब्द प्रयोग में आये. फिर, ये शब्द ग़ुलामी के दिनों में आकर भारतीय भाषाओँ में भी शामिल हो गए, जबकि भारतीय भाषा और संस्कृति बिल्कुल अलग है. भारत में स्त्री को उस की उम्र के अनुसार बहन, दीदी, देवी या देवीजी, महोदया-महाशया, आदि बोलने का चलन रहा है. इस के विपरीत, आजकल महिलाओं को, और यहां तक कि अपनी पत्नी को भी लोग मैडम कहकर बुलाते हैं. स्त्रियों के लिए औरत शब्द का प्रयोग करते हैं. क्यों? क्योंकि आज भी भारतीय मानसिक रूप से ग़ुलाम हैं. सच ही कहा गया है कि क़ब्ज़ा करने वाला चला जाये, तो घर को असली मालिक अपने हिसाब से चला सकता है. लेकिन मालिक अगर क़ब्ज़ा करने वाले या आक्रांता की पसंद को 'श्रेष्ठ' मानने लगे, तो घर कभी वापस नहीं मिलता है- वह मन से क़ब्ज़ा हो जाता है.

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कोई शब्द प्रयोग में तो है, लेकिन आप उस का सही अर्थ नहीं जानते हैं तो उस का प्रयोग करने से बचें. पहले उस का अर्थ, व्युत्पति और उस के इतिहास को जानें फिर, उस का प्रयोग करें. यूं कहिये कि किसी भाषा के शब्दों के छिपे अर्थ को समझना ज़रूरी होता है वर्ना अर्थ का अनर्थ हो जाता है. सम्मान अपमान बन जाता है. ऐसी ही स्थिति अंग्रेजी के मैडम और अरबी के औरत शब्द की है. किसी महिला के लिए ये शब्द-संबोधन अपमानजनक हैं. इन का उल्टा असर हो सकता है.

कई बार हम सुने-सुनाये या लिखे-छपे हुए उन विदेशी शब्दों का भी प्रयोग कर डालते हैं, या शब्द किसी को बोल देते हैं जिन का सही अर्थ हमें मालूम नहीं होता है. ऐसा अक्सर अनजाने में होता है. लेकिन यह भी सच है कि कुछ लोग जानबूझकर ऐसा करते हैं. यूं कहिये कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल वे दूसरों को अपमानित करने के लिए करते हैं.

ये विदेशज या विदेशी शब्द (Foreign words) भी दरअसल, लाये ही गए थे ख़ास मक़सद से. नतीजा यह हुआ कि कई शब्द हिंदी शब्दकोष में शामिल हो गए, और धीरे-धीरे वृहत्तर भारत की आम बोलचाल की भाषा में रच-बस गए. फिर, इन्हों ने न सिर्फ भाषा और साहित्य को दूषित करना प्रारंभ किया, बल्कि विदेशी संस्कृति के विस्तार और भारतीय संस्कृति व वास्तविक पहचान को मिटाने के षड्यंत्र में इस्तेमाल होने वाले हथियार बन गए.

यानी शब्दों को कभी हल्के में न लें. ये शस्त्रों से अधिक धारदार और घातक होते हैं. बड़ी बात यह है कि इन के वास्तविक या मूल अर्थ कभी बदलते नहीं हैं.

शब्दों और अर्थ का होता है चोली-दामन का साथ

आज बहुत कम ही ऐसे लोग हैं, जो शब्दों के प्रयोग से पहले के मूल अर्थ पर गौर करते हैं, और ऐसे शब्दों का चयन करते हैं जो छद्म रूप में ज़्यादा प्रचलन में हैं और चुंबक की तरह खींचने वाले हैं भले ही अर्थ का अनर्थ हो जाये. यूं कहिये कि ऐसे शब्द प्रयोग में अधिक हैं जिन का मूल अर्थ और भाव छिपाकर अन्य रूप में और विशेष उद्देश्य से व्यवहार में शामिल किया गया है, जबकि शब्द के मूल अर्थ कभी नहीं बदलते हैं.

मूल अर्थ वास्तव में, शब्द का जन्मजात, शाब्दिक या व्युत्पत्ति से निकला अर्थ या मतलब मतलब है. इसलिए, अनेकार्थी (अनेक अर्थ वाले) शब्दों के अर्थ में भी जो अर्थ सब से पहले आता है वही मूलार्थ या मूल अर्थ कहलाता है. यूं कहिये कि उस शब्द की उत्पत्ति ही उसी अर्थ के लिए हुई है. बाद में, उस के अन्य अर्थ बने हैं या उसे अन्य अर्थों या भाव में लिया गया है. जैसे अर्थ का मूल अर्थ है- तात्पर्य, अभिप्राय, आशय, मतलब, व्याख्या. बाद में, इसे प्रयोजन, वस्तु, धन, कारण, आदि के रूप में या भाव लिया गया.

भाव (भावार्थ, निहितार्थ) अर्थात भावना वह होती है जो शब्द के पीछे छिपी रहती है. इसे कुछ यूं व्यक्त किया जा सकता है:

शब्दार्थ: जो शब्दकोष में लिखा है (घर=गृह)

भावार्थ= जो बोलने वाले के मन में है (घर=परिवार, सुरक्षा, यादें या कभी-कभी सिर्फ ‘अकेलापन’)

भाव से शब्द जीवंत हो जाता है. कविता, प्रेम-पत्र, या व्यंग्य में भावार्थ ही असली अर्थ होता है. अगर भाव ग़लत समझ लिया, तो पूरा संदेश उल्टा हो जाता है.

अर्थ का अनर्थ- यानी ख़तरनाक तब होता है जब-

शब्द का मूल अर्थ छोड़कर दूर के पर्यायवाची या भाव में लिया जाये

जानबूझकर अर्थ तोड़-मरोड़ दिया जाये (जैसे राजनीति, धर्म, इतिहास में अक्सर देखा जाता है)

या भाषा की सीमा से बाहर जाकर शब्द को अलग या ग़लत सन्दर्भ में इस्तेमाल किया जाये.

मैडम और औरत शब्द के साथ भी यही स्थिति है. आइये इन की व्युत्पत्ति और इतिहास को जांचते-परखते हैं और देखते हैं कि वास्तव में इन का प्रयोग कहाँ होना चाहिए और कहाँ नहीं होना चाहिए.

मैडम शब्द का मूल अर्थ और इस का इतिहास जानिए

मैडम शब्द का अर्थ: अंग्रेजी का मैडम या मदाम (Madam or Madame) शब्द फ्रेंच (फ़्रांसिसी भाषा) मूल का है, जो दो शब्दों से मिलकर बना है- Ma = My (मेरी) और Dame= Lady (महिला, स्त्री)

इस प्रकार, Madame = My Lady या मेरी महिला. यानी वह महिला जिस पर स्वामित्व या हक़ है. यूं कहिये कि My lady (मेरी महिला) में My (मेरी) का इस्तेमाल मालिकाना हक़ (Ownership) को दर्शाता है ठीक वैसे ही जैसे My Pet (मेरा पालतू जानवर) My Servant (मेरा नौकर या मेरी नौकरानी) में होता है.

विशेषज्ञों के अनुसार यह पश्चिम (Western world) के सामंती (Feudal) और पितृसत्तात्मक (Patriarchal) युग की देन है, जहां महिलाएं अक्सर पुरुष की संपत्ति (Property) या अधीन (Under authority) मानी जाती रही हैं, और आज भी बड़े घरानों में इस का प्रभाव देखा जा सकता है.

पश्चिम ही नहीं, अरब संस्कृति में भी My Lady या ‘मेरी महिला’ से आशय उस महिला से है जो ‘बाजुओं के ज़ोर से (ज़बरदस्ती) हासिल की गई (Right hand possessed) हो या फिर ख़रीदी गई हो.

विदित हो कि Dame (डेम) शब्द भी लैटिन भाषा से आया है, और Domina (रोमन काल के आरंभिक दौर में प्रयुक्त शब्द, जो विशेषकर फ्रेंच और अंग्रेजी में चला गया) का विकसित रूप है, जिस का अर्थ होता है घर (विशेष और अलग प्रकार का घर, कोठा, चकलाघर) की मालकिन (Mistress of the house), वेश्याओं की प्रमुख या मालकिन (Head of the prostitutes or Brothel keeper).

इस प्रकार, Madam (Ma’am- मैम) या Madame का स्पष्ट अर्थ बनता है:

वेश्याओं की प्रमुख या वेश्यालय की मालकिन (Head of prostitutes or Brothel owner)

रंडी या वेश्या (Prostitute)

फैशनेबल या दंभी महिला (कभी-कभी व्यंग्यात्मक रूप में)

यानी रंडीखाना या वेश्यालय की मालकिन के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सब से स्वीकृत और सटीक शब्द मैडम (Madam) है.

मैडम शब्द का इतिहास: मैडम शब्द की शुरुआत लैटिन भाषा से हुई. इस का मूल शब्द Domina या Mea Domina था, जो Domus (ठिकाना, घर) शब्द से निकला था.

कालांतर में, यह पुरानी फ्रेंच में जाकर संक्षिप्त रूप में Ma Dame (Ma=My, Dame=lady= My lady) बन गया.

फिर, नए फ्रेंच में यह Madame लिखा-बोला जाने लगा.

लगभग 1300 ईस्वी में Madame फ्रेंच से अंग्रेजी में जाकर Madam हो गया.

जानकारों के अनुसार इंग्लैंड में 1719 में मैडम (Madam, Ma’am) शब्द रंडी या वेश्या के लिए प्रयोग होता था. फिर, 1871 में इस का इस्तेमाल रंडीखाने या वेश्यालय (जहां वेश्यायें रहती और देह-व्यापार का धंधा करती हैं) की स्वामिनी या मालकिन के लिए होने लगा या शुरू हुआ, जो आज भी चलन में है. यूं कहिये कि अंग्रेजी के तमाम शब्दकोशों और स्रोतों (कैम्ब्रिज और कॉलिन डिक्शनरी, ऑक्सफ़ोर्ड लर्नर्स डिक्शनरीज, मरियम वेबस्टर और ब्रिटानिका) में मैडम (Madam, Ma’am) शब्द वास्तव में चकलाघर की मालकिन (A woman who runs a brothel, A woman who is in charge of a group of prostitutes who live or work in the same house) के लिए है.

कहते हैं कि व्यक्ति ही नहीं, शब्द भी बदनाम होते हैं. इस प्रकरण में, मैडम शब्द की काली छाया ने अमरीकी सुप्रीम कोर्ट तक को प्रभावित किया, और बदलाव के लिए मज़बूर किया.

US Supreme Court History, Harvard Law Journal, Law Stack Exchange, आदि स्रोत बताते हैं कि कोर्ट में महिला जज की नियुक्ति की संभावना को देखते हुए, “असुविधाजनक उपाधि ‘मैडम जस्टिस’ से बचने के लिए” पुरुष जजों ने अपने सरनेम ‘मिस्टर जस्टिस’ हटा लिए.

यह वाकया 1980 का है. एक दिन अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के जजों ने एक विशेष बैठक की. चर्चा का विषय था महिला जज का सरनेम या उपनाम. दरअसल, वहां पहली बार एक महिला जज की नियुक्ति (दुनियाभर में समानता का ढिंढोरा पीटने वाले तथाकथित शिक्षित और सभ्य लोगों को 1980 में समझ आया था कि कोई महिला भी सुप्रीम कोर्ट की जज बन सकती थी) होने वाली थी. यह रोनाल्ड रीगन (Ronald Reagan, Former President of USA) ने अपने चुनाव अभियान के दौरान वादा किया था.

समस्या यह थी कि ‘मिस्टर जस्टिस’ कहलाने-लिखे जाने वाले पुरुष जजों की तरह महिला जज के नाम के पहले मैडम जस्टिस (उपनाम) लगने वाला था, जबकि यह बदनाम था. मैडम वेश्या या वेश्याओं या वेश्याघर की मालकिन (Courtesan) के मायने वाला शब्द था. मिस्टर जस्टिस की तरह मैडम जस्टिस फलां (उन का नाम). ऐसे में, जजों ने अपना मत दिया, और 8-1 के मत (Voting) से अपने नाम के पहले मिस्टर (Mr.) को हटा दिया, जबकि इस की परंपरा 19 वीं सदी के आरंभ से ही चली आ रही थी.

आनन-फानन में सुप्रीम कोर्ट में जजों के कमरे के बाहर “मिस्टर जस्टिस” लिखी पट्टिकाएं उतार दी गईं.

1981 में सैंड्रा डे ओ’कॉनर (Sandra Day O’Connor) जज बनीं तो कोर्टरूम के बाहर जस्टिस सैंड्रा डे ओ’कॉनर लिखी पट्टिका (Plaque) लगी.

ऐसा ही वाकया फ्लोरिडा सुप्रीम कोर्ट में हुआ. यहां की जज रोज़मेरी बार्केट को ‘मैडम’ वाली उपाधि पसंद नहीं आई. उन्होंने घोषणा की कि उन्हें केवल जस्टिस बार्केट कहा जायेगा. इस पर पुरुष जजों ने भी अपने संबोधन से ‘मिस्टर जस्टिस’ हटा दिया.

औरत शब्द का मतलब जानकर चौंक जायेंगें आप, शरमा जायेंगी महिलाएं

कुरान में औरत शब्द का मतलब महिला या स्त्री नहीं, बल्कि कुछ और है. क्या है, यह जानकर आप तो हैरान होंगें ही, महिलाएं शरमा जायेंगीं, और अपमानित महसूस करेंगीं.

विदित हो कि कुरान में अवरह या औरत शब्द का जिक्र सिर्फ तीन जगह या तीन बार आता है. लेकिन कहीं भी इस का शाब्दिक अर्थ स्त्री या महिला नहीं है.

पहली जगह: सूरह अन-नूर 24: 31

कुरान की सूरह 24, आयत संख्या 31 (स्रोत: कुरान डॉट कॉम)

हिंदी अनुवाद:

“……..या उन छोटे बच्चों के लिए जो अभी महिलाओं की नंगी जगहों (शर्मगाह, गुप्तांग) से अनजान हैं…..”

लफ्ज़-दर-लफ्ज़ सरल अर्थ:

औरत= नंगे हिस्से, शर्मगाह, वह हिस्सा जो ढंकना चाहिए

महिलाओं की = अन निसा, अवरह या औरत= ढंकने या छुपाने वाली जगह (अंग)

पूरा मतलब:

औरत: महिलाओं के शरीर का वह हिस्सा, जो नंगा नहीं होना चाहिए, ढंकने लायक है. यूं कहिये कि महिलाओं और पुरुषों, दोनों के शरीर के कुछ ख़ास हिस्से अवरह या औरत कहलाते हैं- इन को ढंकना ज़रूरी है.

दूसरी जगह: सूरह अन-नूर 24:58

कुरान की सूरह 24, आयत संख्या 58 (स्रोत: कुरान डॉट कॉम)

हिंदी अनुवाद:

“………………तुम्हारे लिए (जीवन या दिनचर्या में) तीन ऐसे वक्त (समय) हैं जब निजता (Privacy) आवश्यक है.

लफ्ज़-दर-लफ्ज़ सरल अर्थ:

औरत = निजी समय, नंगेपन के समय, जब कपड़े कम होते हैं या उतरे होते हैं

तुम्हारे लिए = लकूम

पूरा मतलब:

औरत = वह समय जब स्त्रियों या पुरुषों के शरीर का ढंका हुआ हिस्सा नंगा हो सकता है, जैसे, सोते समय, नहाते समय, पति-पत्नी के बीच संभोग (सेक्स) के समय

यह समय ‘निजता (Privacy) का समय’ कहा गया है.

तीसरी जगह: सूरह अल-अहज़ाब 33:13

कुरान की सूरह 33, आयत संख्या 13 (स्रोत: कुरान डॉट कॉम)

हिंदी अनुवाद:

“हमारे घर तो खुले/कमज़ोर/सुरक्षा-रहित हैं.”

लफ्ज़-दर-लफ्ज़ सरल अर्थ:

औरत: खुला या खुली हुई, कमज़ोर, जिस की रक्षा करनी पड़े, जो असुरक्षित हो

पूरा मतलब:

औरत: कुछ ऐसा, जो कमज़ोर है, खुला हुआ है, और जिसे छिपाना या बचाना ज़रूरी है. विदित हो कि औरत के मायने में यहां घर की बात है, जो दुश्मन का आसानी से निशाना बन सकता है.

इस प्रकार, कुरान में तीनों जगहों पर अवरह या औरत का मतलब स्पष्ट है. इसे निम्नलिखित शब्दों में बयान किया जा सकता है:

नंगापन (Nakedness or Nudity)

शर्मगाह या गुप्तांग (Private parts)

निजी स्थान या समय (Private place or Time)

कहीं भी इस का अर्थ स्त्री या महिला नहीं है.

स्त्री या महिला के लिए कुरान में अलग शब्द हैं

स्त्री या महिला (एकवचन में) = इमराह

स्त्रियां या महिलाएं (बहुवचन में) = निसा

बाद में लिखी गई किताबों में औरत शब्द का इस्तेमाल स्त्री के अर्थ में शुरू हुआ

8 वीं से 18 वीं सदी के बीच लिखी गई फ़िक्ह (शरिया की मानवीय समझ, इस से जुड़ी पुस्तकें) की किताबों में औरत शब्द का प्रयोग (छद्म रूप में) स्त्री या महिला के अर्थ में (कुरान से अलग) शुरू हुआ, और यहां स्त्री या महिला के गुप्तांग के बजाय उस के पूरे शरीर को ढंकने योग्य बताया गया.

फ़तवा आलमगिरी: यह 17 वीं सदी में भारत में औरंगजेब के समय संकलित हनफी फ़िक्ह की सब से बड़ी किताब है. इस में औरत को बार-बार वयस्क महिला (Adult female) के अर्थ में लिखा गया है.

उदहारण: औरत की नमाज, औरत का सतर (पर्दा, ढंकना), औरत का अवरह (ढंकने योग्य अंग, गुप्तांग, शरीर)

अल-हिदाया: यह किताब 12 वीं सदी में बुरहानुद्दीन अल-मरगीनानी द्वारा लिखी गई.

इन (दोनों) के अनुसार औरत = स्त्री, और उस की अवरह = उस का शरीर, जो ढंकना है.

निष्कर्ष:

कुरान के बाद, फ़िक्ह काल में औरत शब्द अप्रत्यक्ष रूप में स्त्री के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा.

स्त्री या महिला का पूरा शरीर अवरह या औरत माना जाने लगा.

धीरे-धीरे औरत शब्द स्त्री के अर्थ में उर्दू और हिंदी में घुलमिल गया.

यूं समझ लीजिये कि कुरान में औरत = नग्नता, शर्मगाह या गुप्तांग, शरीर के ढंके जाने वाले हिस्से

फ़िक्ह की किताबों में औरत = स्त्री या महिला

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    रामाशंकर पांडेय

    दुनिया में बहुत कुछ ऐसा है, जो दिखता तो कुछ और है पर, हक़ीक़त में वह होता कुछ और ही है.इस कारण कहा गया है कि चमकने वाली हर चीज़ सोना नहीं होती है.इसलिए, हमारा यह दायित्व बनता है कि हम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं.वह चाहे समाज, संस्कृति, राजनीति, इतिहास, धर्म, पंथ, विज्ञान या ज्ञान की अन्य कोई बात हो, उसके बारे में एक माध्यम का पूर्वाग्रह रहित और निष्पक्ष होना ज़रूरी है.khulizuban.com का प्रयास इसी दिशा में एक क़दम है.

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