ख़ूबसूरती ही नहीं यौनसुख भी देती है कमर पर लटकी चोटी, महिलाओं को चोटी के और भी क्या फ़ायदे हैं जानिए
काले घने लंबे बाल आज भी स्त्रियों के लिए बहुत मायने रखते हैं. उस पर भी कमर पर लटकी चोटी उन की सुंदरता में चार चांद लगा देती है. साथ ही, यह परस्पर यौनसुख को भी बढ़ावा देती है. अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे और उच्च गुणवत्ता वाले बालों वाली महिलाओं को उन के पति अधिक आकर्षक लगते हैं, जो यौन इच्छा (Sexual desire) को बढ़ाता है. इस से संभोग की आवृत्ति (Frequency of Sexual Intercource) बढ़ती है.

पुरुषों की शिखा या चोटी की तरह महिलाओं की चोटी भी बड़े मायने रखती है. यह उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से कई प्रकार के लाभ देती है. मुख्य रूप से, चोटी महिलाओं के सौन्दर्य या आकर्षण में वृद्धि के साथ यौनसुख-प्राप्ति में भी सहायक होती है. चोटी का उल्लेख सुश्रुत संहिता में रोमावर्त के रूप में मिलता है, जहां इसे बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है. मनोवज्ञान और मानविकी के साथ आधुनिक विज्ञान भी इस के फ़ायदों को स्वीकारता है.

चोटी का अर्थ और इस के महत्त्व को जानें
चोटी शब्द के अनेक अर्थ होते हैं. बालों के संदर्भ में, यह स्त्रियों के गूंथे हुए बालों (braid or plait) और पुरुषों के सिर के ऊपर पीछे की ओर बालों के छोटे गुच्छे (शिखा), दोनों के लिए प्रयोग होता है. वेणी (लंबी प्लेटेड चोटी- बालों की लटों का एक दूसरे के ऊपर या नीचे गुंथा हुआ होना), चुंडी (छोटी, गोल या मोटी चोटी, जिसे जूड़ा कहते हैं) और शिखा (पुरुषों के सिर के पीछे की ओर बालों का छोटा- गाय के खुर के आकार का गुच्छा) शब्द इस के पर्यायवाची हैं जो बुने या गूंथे हुए बालों के विभिन्न रूप को दर्शाते हैं. महिलाओं के बालों की साज-सज्जा से जुड़े ये पारंपरिक शब्द मॉडर्न हेयरस्टाइल में विभिन्न अंग्रेजी शब्दों या नामों से जाने जाते हैं.
अध्ययन से पता चलता है कि महिलाओं की चोटी वास्तव में बालों की तीन लटों को मिलाकर गूंथने से बनी एक केश-शैली या हेयरस्टाइल है, जिस का विशेष महत्त्व है. यदि यह लंबी यानी कमर पर या उस के नीचे तक जाती है तो इस की बात ही निराली है. यूं कहिये कि यह महिलाओं की खूबसूरती में चार चाँद लगा देती है. साथ ही, उन्हें कई प्रकार से लाभ भी पहुंचाती है.

हिंदू परंपरा और ग्रंथों में महिलाओं की चोटी का विशेष महत्त्व है. यहां तीन लटों वाली चोटी को त्रिवेणी कहा गया है. यानी यह गंगा, जमुना और सरस्वती के संगम के समान पवित्रता और शक्ति का प्रतीक है.
योग परंपराओं में, महिलाओं के बालों को बांधना शारीरिक उर्जा से जुड़ी है.
वैष्णव परंपरा में, यह स्त्री की सुंदरता और आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक है. इस में देवी रूपों (जैसे सरस्वती या पार्वती) की झलक दिखाई देती है.
पुराणों, आदि में बालों को बांधना व्यक्तिगत स्वच्छता, बलिदान और देवी-देवताओं के प्रति समर्पण का प्रतीक माना गया है. कहा गया है कि बंधे बाल लक्ष्मी (धन की देवी, समृद्धि, सौभाग्य) को आकर्षित करते हैं. यह सलाह दी गई महिलाओं को खाना बनाते समय अपने बाल बाँध लेने चाहिए. इस के विपरीत, खुले बालों को फूहड़ता, शोक, क्रोध, दुख और अशुभता से जोड़कर देखा गया है. कहा गया है कि खुले बाल ज्येष्ठ देवी (अशुभता की देवी, दरिद्रता, दुख) को आमंत्रित करते हैं.
खुले बालों से जुड़ा बड़ा उदहारण महाभारत में मिलता है. कौरवों द्वारा अपमान के बाद, द्रौपदी ने अपने बाल खुले छोड़ दिए और व्रत लिया कि वे उन्हें तब तक नहीं बांधेंगी जब तक दुशासन के रक्त से धो न लें.
चोटी सौंदर्य के साथ यौनसुख भी कैसे देती है जानिए
सौंदर्यशास्त्र में देखें तो चोटी महिलाओं के श्रृंगार का एक अहम हिस्सा है. यह उन के सौन्दर्य को बढ़ाती है, या फिर यूं कहिये कि उन्हें और भी आकर्षक बना देती है. साथ ही, यौनसुख या यौन आनंद (sexual pleasure) प्राप्ति में भी सहायक होती है. मगर कैसे? वास्तव में, यह ऐसा विचार है जिसे सामाजिक-सांस्कृतिक तौर पर और योग और पारंपरिक स्वास्थ्य-विज्ञान (आयुर्वेद) की दृष्टि से प्राचीन भारतीयों ने हज़ारों साल पहले समझ लिया था. लेकिन यह सांकेतिक ही बना रहा, कुछेक धार्मिक ग्रंथों के कुछ पृष्ठों से लेकर सौंदर्यशास्त्र के दायरे में रहा अथवा सिमटा रहा. आज भी ऐसा ही है, जबकि इस का प्रसार होना चाहिए. सारी दुनिया को पता चलना चाहिए चोटी की विशेषता या उपयोगिता के बारे में, ताकि अधिकाधिक लोग परिचित- लाभांवित हो सकें.
इसलिए, आइये इस विचार को भिन्न-भिन्न दृष्टि से समझते हैं.
चोटी और सौन्दर्य- तार्किक आधार: लंबे बाल, गूंथने पर यानी चोटी के रूप में व्यवस्थित और सुरुचिपूर्ण (स्टाइलिश) बन जाते हैं, जो चेहरे की विशेषताओं को प्रदर्शित करती है, और समग्र आकर्षण को बढ़ाती है.

चोटी स्त्रीत्व (फेमिनिनिटी) का प्रतीक है, जो यौवन, स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता (reproductive capability) का संकेत देते हैं. इस से महिलाओं में आत्मविश्वास (self confidence) बढ़ता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से यौनाकर्षण (sexual appeal) को बढ़ाता है.
चोटी बालों में नमी बनाये रखती है, जिस से बाल स्वस्थ रहते हैं, और उन की चमक बरक़रार रहती है. यह साथी को आकर्षित करती है, या साथी पर उन की खूबसूरती का जादू बरक़रार रहता है.

सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला के गूंथे हुए बाल या चोटी की खूबसूरती देखने के दौरान साथी (Partner, male) को शरीर के ऊपरी और बीच वाले हिस्से (जिस में गर्दन, छाती-स्तन, नाभि-क्षेत्र, पीठ, कमर और नितंब-क्षेत्र शामिल होते हैं) के यौनाकर्षण से जुड़े सभी अंग भी निगाह में आ जाते हैं, जो साथी को आकर्षित या उत्तेजित करने में सहायक होते हैं. यूं कहिये कि महिलाओं की चोटी पुरुषों में कामुकता को बढ़ाते हैं.

चोटी और यौनसुख- मनोवैज्ञानिक-वैज्ञानिक आधार: अध्ययन बताते हैं कि महिलाओं के सुरुचिपूर्ण केश (Stylish hair) या चोटी (braid, plait) पुरुषों को आकर्षित करती है साथ ही, महिलाओं में भी यौनेच्छा या कामुकता को बढ़ाती है. यही कारण है कि चोटी या लंबे, घने और चमकीले बालों वाली महिलाएं अपने पति के साथ अधिक बार यौन संबंध (sex) बनाती हैं. कुछ विशेषज्ञों का तो यह भी कहना है कि लंबे और गूंथे हुए बाल या चोटी का प्रभाव पति-पत्नी की यौन-क्षमता (Sexual Potency, Virility) पर भी पड़ता है, जो उन्हें अधिक देर तक टिके रहने में सहायक होता है. इस से उन्हें संभोग-सुख या चरमसुख (Orgasm) की प्राप्ति होती है.
वैज्ञानिक रूप से, यह यौन चुनाव (Sexual selection) के सिद्धांत पर आधारित विचार है, जिस में बालों की गुणवत्ता और आकर्षकता को शारीरिक स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक कारक (आत्मविश्वास) और हार्मोनल बैलेंस (जैसे टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजन) से जोड़कर देखा जाता है. विकासवादी मनोविज्ञान (Evolutionary Psychology) के कई शोधों में यह बात सामने आई है कि महिलाओं के लंबे बाल या चोटी को पुरुष अक्सर अच्छी सेहत, जवानी, जोश (Vitality), अच्छे जीन (gene) और प्रजनन-क्षमता (Fertility) का प्रमाण मानते हैं, और ऐसी महिलाओं प्राथमिकता देते हैं, या फिर यूं कहिये कि उन के प्रति पुरुषों की यौन इच्छा तीव्र होती है. इस की प्रतिक्रिया में महिलाओं में भी आकर्षण और समर्पण के भाव जागते हैं, जो उत्तेजना से चरमोत्कर्ष तक जाते हैं.
यानी यह केश-विन्यास आधारित यौनाकर्षण-उत्तेजना-चरमोत्कर्ष या चरमसुख के रूप में एक प्रकार की श्रृंखला अभिक्रिया या चेन रिएक्शन है, जो व्यावहारिक और वैज्ञानिक है.
मगर इस से अधिक व्यावहारिक, बड़ा और महत्वपूर्ण कारक है स्पर्श-प्रभाव (touch or tactile effect). स्पर्श (छूना) यौनेच्छा उत्पन्न करता है और उत्तेजना को बढ़ाकर चरमोत्कर्ष तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. चोटी शारीरिक गतिविधियों के दौरान स्पर्श का काम करती है.
दरअसल, फोरप्ले (foreplay) हो या सेक्स (sex), स्पर्श और घर्षण से ही कारित होता है. विशेषज्ञों के अनुसार फोरप्ले या ‘संभोग पूर्व क्रीड़ा’ (जैसे आलिंगन, चुंबन, सहलाना) में चोटी भी भूमिका निभाती है. यूं कहिये कि महिलाओं की चोटी जब (आगे की ओर होने पर) उन के गालों, नाक, छाती, स्तनों, नाभि, पेडू, योनि-क्षेत्र और (पीछे की ओर होने होने पर) गर्दन, कान, पीठ, कमर और नितंब-क्षेत्र से स्पर्श करती है तो वहां रक्त-संचार बढ़ जाता है और संवेदी उद्दीपन के साथ यौन इच्छा जाग उठती है.

विज्ञान की भाषा में कहें तो चोटी महिलाओं के यौनांगों को छूती है तो हार्मोन, जैसे ऑक्सीटोसिन (Bonding hormone) और डोपामाइन (Pleasure or Happy hormone) स्रावित होते हैं, जो उन्हें मादकता और उत्तेजना से भर देते हैं. सेक्स के दौरान तो चोटी एक सवेदी तत्व या सेंसरी एलिमेंट (Sensory element) का काम करती है. इन्हें पकड़ना या हल्का खींचना स्पर्श की अनुभूति देता है, जो यौन-क्रिया को रोमांचक बना देता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक़ बालों के प्रति आसक्ति (Trichophilia or Hair fetish) हो या सेक्स के दौरान बाल खींचने की क्रिया या व्यवहार (एक सामान्य यौन-व्यवहार या BDSM प्ले का हिस्सा), दोनों ही से संवेदी उद्दीपन (Sensory stimulation) के रूप में मस्तिष्क में एंडोर्फिन (आनंददायक या प्राकृतिक दर्द निवारक रसायन) स्रावित होता है, जिस से चरमसुख (Orgasm) की प्राप्ति होती है.

यानी महिलाओं की चोटी सौन्दर्य और यौनिक विषयों से गहराई से जुड़ी है. चोटी सुंदर है, और लाभकारी भी है. मगर चोटी की ये बातें अधूरी ही कही जायेंगी अगर इस की अन्य विशेषताओं के बारे में चर्चा न की जाये. यूं कहिये कि महिलाओं की चोटी के कई अन्य लाभ भी हैं, जो सीधे उन्हें प्राप्त होते हैं, उन का आत्मिक और शारीरिक रूप से विकास कर उन्हें योग्य और सक्षम बनाते हैं.
चोटी से बढ़ती है आत्मशक्ति, तेज होता है दिमाग़
रोमावर्त यानी शिखा, जूड़ा (सिर के ऊपर गोल और उभरे हुए आकार में बंधे हुए बाल) या चोटी शरीर की उर्जा प्रणाली से जुड़ी होती है, जो आत्मशक्ति या आतंरिक उर्जा और दिमाग़ी शक्ति को बढ़ाती है. योग, पुराणों और पारंपरिक भारतीय चिकित्सा विज्ञान (आयुर्वेद) में इसे सहस्रार (सात चक्रों में सब से ऊपरी चक्र, जो सिर के शिखर पर स्थित होता है) और अधिपति मर्म-स्थान (सिर की छत या कवच के अंदर स्थित भाग जहां सुषुम्ना नाड़ी मिलती है, ब्रह्मरंध्र) की रक्षक, उर्जा-नियंत्रण और मानसिक क्षमता के विकास में सहायक बताया गया है.
विदित हो कि चोटी सहस्रार चक्र पर बंधी होती है, जो जीवन-शक्ति (Cosmic Energy) को आकर्षित करती है और कुंडलिनी शक्ति को जागृत करती है. इस से आत्मिक जागरण होता है, और व्यक्ति दिव्य चेतना से जुड़ता है जो आत्मशक्ति (Inner or Spiritual growth) को बढ़ाती है. बाल खुले छोड़ने से उर्जा बिखर जाती है, जबकि चोटी से एकागता बढ़ती है, जो ध्यान और जुड़ाव में सहायक होती है.
बाल विचारों का भौतिक विस्तार माने जाते हैं, और चोटी बांधने से वे दिशा और उद्देश्य प्रदान करते हैं. यह लगन और समर्पण का प्रतीक है, जो आत्मिक शक्ति को बढ़ाती है. सनातन हिंदू ग्रंथों में, जूड़ा और चोटी आध्यात्मिक अनुग्रह और उर्जा-संरक्षण से जुड़े हैं.
फिजियोलोजी या शरीरक्रियाविज्ञान दृष्टि से देखें तो बाल एंटीना की तरह काम करते हैं, और उन्हें गूंथने या चोटी बाँधने से विद्युत-चुंबकीय उर्जा का संतुलन (Electromagnetic field balance) बना रहता है. जो थकान से मुक्ति दिलाता है. इस से मस्तिष्क की उर्जा केन्द्रित रहती है, जो मानसिक शक्ति (एकाग्रता एवं स्मृति) बढ़ाती है. रात में जूड़ा चंद्रमा की उर्जा (Lunar Energy) को अवशोषित करने में सहायता करता है.
जूड़ा या चोटी बनाना दरअसल, एक दोहराव वाला कार्य है जो चैतन्यता बढ़ाती है, और देह-बोध कराती है. यह एंग्जाइटी (चिंता) और तनाव कम करती है, और एकाग्रता बढ़ाती है. चोटी से दिमाग़ पर हल्का दबाव पड़ता है, जो खून के बहाव (Blood flow) को सुधारता है, और मानसिक क्षमता (Intellectual ability- Mental control, focus) को मजबूत बनाता है.
ज़्यादा गर्मी और ठंड से बचाती है चोटी
चोटी एक रक्षक की भूमिका भी निभाती है. यह महिलाओं के मस्तिष्क को मौसम या तापमान में परिवर्तन से होने वाले नुकसान से बचाने में सुरक्षा कवच का काम करती है, और उन्हें कमज़ोर नहीं पड़ने देती है. यूं कहिये कि चोटी ब्रह्मरंध की सुरक्षा से जुड़ी है. ब्रह्मरंध्र सिर के ऊपरी भाग (चोटी के स्थान) पर स्थित है, जहां खोपड़ी की हड्डियां मिलती हैं और मस्तिष्क के दोनों गोलार्ध (hemispheres) जुड़ते हैं. यह सहस्रार चक्र का केंद्र माना जाता है. चोटी बांधने से यह स्थान तेज गर्मी और ठंड से सुरक्षित रहता है, जिस की व्याख्या धार्मिक और वैज्ञानिक, दोनों दृष्टिकोणों से की जाती है.
हिंदू धर्मशास्त्रों, आयुर्वेद (सुश्रुत संहिता) और पारंपरिक विज्ञान की दृष्टि से, चोटी बांधने से ब्रह्मरंध्र पर एक गांठ बनती है, जो इस संवेदनशील स्थान को बाहरी तापमान के प्रभाव से बचाती है. विशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मरंध्र सुषुम्ना नाड़ी का अंतिम बिंदु माना जाता है, जहां गर्मी या ठंड से असंतुलन होने पर आत्मिक उर्जा (ओजस) का ह्रास होता है. चोटी इस उर्जा को संरक्षित रखती है.
विशेषज्ञों के अनुसार सहस्रार चक्र (ब्रह्मरंध्र पर स्थित चक्र) को गर्मी (सूर्य उर्जा) और ठंड (चंद्र उर्जा) से प्रभावित माना जाता है. शिखा या टी बांधने से चक्र संतुलित रहते हैं, और बाहरी तापमान से होने वाली उर्जा असंतुलन से बचाव होता है.
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो बाल अच्छे विद्युत-रोधी या इंसुलेटर हैं, और गर्मी या बिजली (Heat or electricity) के सुचालक नहीं होते हैं. चोटी बांधने से बाल घने हो जाते हैं, जो ब्रह्मरंध्र पर एक परत बनाते हैं, सूर्य की तेज गर्मी से मस्तिष्क (brain) को बचाते हैं और ठंड में गर्मी बनाये रखते हैं. इस से सिर का तापमान रेगुलेट होता है, और ब्रेन के जंक्शन पर असर कम पड़ता है. यूं कहिये कि चोटी सिर-क्षेत्र में बाहरी उर्जा को नियंत्रित रखती है.
इस के अलावा, चोटी की गांठ ब्रह्मरंध्र पर हल्का दबाव डालती है, जो रक्त-प्रवाह और तंत्रिका-कार्य (Nerve function) को बेहतर बनाती है. इस से मस्तिष्क के दोनों भागों के संधि या मिलन-स्थल (Brain Junction or Corpus Callosum) पर तापमान परिवर्तन से होने वाली असुविधा (जैसे सिरदर्द, आदि) कम होती है. कुछ विशेषज्ञों के अनुसार चोटी स्थैतिक विद्युत या उर्जा (Static Energy) को व्यवस्थित करती है, जो घर्षण से बचाव करता है और बाहरी ताप से ब्रेन को इंसुलेट (तापरोधन) करता है.
नकारात्मक उर्जा से बचाए रखती है चोटी
चोटी महिलाओं को नकारात्मक उर्जा से बचाए रखती है, जिस से वे मन और शरीर, दोनों से स्वस्थ एवं क्रियाशील बनी रहती हैं. क्रियाशीलता उन की कार्यकुशलता को बढ़ाती या निखारती है, जो जीवन में सफलता के लिए आवश्यक है. मगर कैसे?
विदित हो कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मस्तिष्क अधिक संवेदनशील होता है. इसलिए, इस पर नकारात्मक उर्जा के प्रभाव की संभावना भी कुछ ज़्यादा ही होती है. लेकिन यदि वे चोटी रखती हैं, या जूड़ा बनाती हैं, तो यह प्रभाव कम होता है. हिंदू धर्मशास्त्रों- पुराण, उपनिषदों, सांख्य दर्शन, आयुर्वेद और पारंपरिक या परा-विज्ञान (Parapsychology), आदि में सकारात्मक और नकारात्मक उर्जा (Negative vibes), ऑरा या सूक्ष्म-प्रभाव की चर्चा मिलती है. कहा गया है कि बाल खुला छोड़ने से उर्जा बिखर जाती है, जो नकारात्मक उर्जा, जैसे बुरी नज़र, नकारात्मक कंपन या तरंगों (Evil eye, disressing vibrations) को आकर्षित कर सकते है, जबकि चोटी या जूड़ा बांधने से केवल थोड़ी मात्रा में नकारात्मक उर्जा शरीर में पहुंचती है. यानी उर्जा चोटी या गांठ में ही अवशोषित हो जाती है. इस से सहस्रार चक्र की रक्षा होती है, जो दिव्य-उर्जा (divine energy) का द्वार है.
स्पिरिचुअल रिसर्च फाउंडेशन और हिंदू जागृति संस्थान के अनुसार बाल खुला छोड़ने पर नकारात्मक या सूक्ष्म काली उर्जा अर्थात भूत-प्रेत का प्रकोप (प्रभाव) संभव है. इन का दावा है कि बंधे हुए बाल- जुड़ा या चोटी सकारात्मक उर्जा ग्रहण करती है और नकारात्मक उर्जा से रक्षा करती है.
बिना चोटी के पूरा नहीं माना जाता है कोई धार्मिक कार्य
सनातन हिंदू धर्म में महिलाओं को धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान बालों की चोटी या जुड़ा बनाकर रखने की रखने की परंपरा है. हालांकि ऐसा कोई शास्त्रोक्त विधान नहीं है पर खुले बालों और चोटी या जुड़े (Bun) में भेद और शुभ-अशुभ या गुण-दोष की चर्चा है. मंदिरों में खुले बाल की अवस्था में प्रवेश अनुचित या वर्जित माना गया है.
विदित हो कि सनातन संस्कृति और परंपरा में खुले, बिखरे या बेतरतीब बालों को फूहड़ता, दरिद्रता, शोक, दुख या अशुभ अवसरों, जैसे अंतिम संस्कार या विधवा अवस्था से जोड़कर देखा गया है. वहीं, चोटी या जुड़े को मांगलिक कार्य पूजा, व्रत-त्यौहार, विवाह, मुंडन, उपनयन, गृह-प्रवेश, वधू-प्रवेश, इत्यादि के लिए शुभ एवं फलदायी माना गया है. यह व्यावहारिक भी है, क्योंकि चाहे दीप -प्रज्वलन हो, फूल चढ़ाना हो या आरती करनी हो खुले बाल बाधा बनते हैं. खाना बनाने और परोसने के दौरान तो खुले बाल समस्या ही उत्पन्न करते हैं.
बंधे हुए बाल स्त्री के सुहाग का संकेत या प्रतीक माने जाते हैं.
बालों को उर्जा का माध्यम माना गया है, जो वातावरण से सकारात्मक और नकारात्मक उर्जा ग्रहण कर सकते हैं. पूजा और ध्यान के दौरान खुले बाल खुले बाल उर्जा को बिखेर सकते हैं. कहा गया है कि चोटी बांधने से उर्जा केंद्रित रहती है, सहस्रार चक्र (सिर के ऊपरी भाग में स्थित चक्र या क्राउन चक्र) की रक्षा होती है, और दिव्य-उर्जा को प्रवाहित या संचालित करने में मदद मिलती है. इस से ध्यान या एकाग्रता बनी रहती है या उस में वृद्धि होती है.
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