होंठों पर तिल खोल देता है हर राज़, जानिए यह क्या कहता है महिलाओं के बारे में
होंठ, स्पर्श-संवेदी अंग तो होते ही हैं, अच्छे संकेतक भी बताये जाते हैं. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार किसी व्यक्ति के होंठों का निरीक्षण या अध्ययन कर उसके व्यक्तित्व और भाग्य के बारे में भी जाना जा सकता है.

आमतौर पर चेहरा देखकर हम किसी के मन को पढ़ते हैं, और उसके व्यक्तित्व के बारे अनुमान लगाते हैं. इसमें ललाट या माथा, भौंहें, आंखें, नाक, होंठ और कान आदि की भूमिका होती है, या फिर यूं कहिये कि ये किसी व्यक्ति का परिचय कराने में मददगार होते हैं. इनमें होंठ और उस पर स्थित तिल का बहुत महत्त्व होता है. जानकारों के अनुसार होंठों पर तिल अधिक लाक्षणिक (लक्षण बताने वाले, संकेतक) होता है. सामुद्रिक शास्त्र कहता है कि होंठों पर स्थित तिल का अध्ययन कर किसी के वास्तविक व्यक्तित्व और भाग्य के बारे में भी जाना जा सकता है. इसके अनुसार होठों पर तिल का अध्ययन करना कुंडली पढ़ने जैसा ही होता है.

सामुद्रिक शास्त्र वैदिक ज्योतिष विज्ञान की एक प्रमुख शाखा है, जिसमें शरीर के कुछ अंगों को विशेष और लाक्षणिक बताया गया है. इसमें कहा गया है कि ये अंग किसी व्यक्ति के बारे सब कुछ बता देते हैं. यहां तक कि भूत (अतीत, पिछली घटनाओं) और भविष्य के बारे में भी सटीक जानकारी दे सकते हैं. होंठों पर तिल भी उन्हीं में से एक है, और बहुत मायने रखता है.
होंठों पर तिल का अर्थ
होंठों पर तिल से आशय उस तिल से है जो होंठों के वर्मिलियन ज़ोन या सिंदूरी क्षेत्र (लाल ख़ाल वाला हिस्सा, जिसे मेकअप सामग्री से रंगते हैं, जैसे लिपस्टिक आदि) के साथ-साथ कहीं भी होंठों के बहुत क़रीब स्थित होता है. यानी तिल चाहे सिंदूरी ख़ाल पर हो, ऊपरी होंठ के ऊपर या निचले होंठ के नीचे हो (होंठ दो भागों में विभाजित होता है- ऊपरी होंठ और निचला होंठ), या फिर दोनों होंठों (होंठों के जोड़, मिलन-स्थल) की दायीं या बायीं ओर स्थित हो, ‘होंठों पर तिल’ कहा जाता है. लेकिन इसके संकेत अलग-अलग होते हैं. तिल अपने स्थान के अनुसार लक्षण बताता है.
होंठों के ऊपर तिल
होंठों के ऊपर तिल का मतलब होता है होंठों के ऊपरी हिस्से (ऊपरी होंठ) के ऊपर तिल का स्थित होना. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार जिन महिलाओं के होंठों के ऊपर तिल होता है वे शांत, सुशील, विवेकशील, मिलनसार, उद्यमी और परिश्रमी होती हैं. इन्हें अच्छा पति और खुशहाल परिवार मिलता है. कम पर योग्य संतान का योग होता है.

लेकिन ज्योतिषियों और सामुद्रिक तिलक (प्राचीन सामुद्रिक शास्त्र का आधुनिक रूपांतरण या संस्करण) के विशेषज्ञों की राय इस पर थोड़ी भिन्न है. अधिकांश विद्वानों का कहना है कि होंठों के ऊपर (ऊपरी होंठ के ऊपर) स्थित तिल भी तीन प्रकार के होते हैं. पहला, वह तिल जो अपर वर्मिलियन बॉर्डर (upper vermilion border) यानी ऊपरी सिंदूरी रेखा या सिंदूरी किनारा (सिंदूरी ख़ाल की रेखा) के ऊपर दायीं ओर स्थित होता है.
दूसरा, वह तिल जो सिंदूरी रेखा के ऊपर बायीं ओर स्थित होता है.
तीसरा, वह तिल जो सिंदूरी रेखा के ऊपर बिल्कुल केंद्र (बीच) में यानी फिलट्रम (philtrum) या ओष्ठ खात (नाक और होंठ के बीच स्थित द्विरेखीय या दो रेखाओं का गहरा स्थल या निशान) पर स्थित होता है.
इन तीनों के लक्षण अलग-अलग होते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार ऊपरी सिंदूरी रेखा के ऊपर दायीं ओर स्थित तिल वाली महिलाएं भाग्यशाली होती हैं. उन्हें अच्छा और सहयोग करने वाला जीवनसाथी मिलता है, और वे खुशहाल ज़िन्दगी जीती हैं.
लेकिन सिंदूरी रेखा के ऊपर बायीं ओर स्थित तिल वाली महिलाओं का जीवन उतार-चढ़ाव वाला होता है. उन्हें मनचाहा पति और परिवार नहीं मिलता है. उनका जीवन अक्सर कलह और संकटों से घिरा रहता है.
इनसे अलग, फिलट्रम या ओष्ठ खात पर तिल वाली महिलाओं का जीवन सामान्य रहता है. वे शांत और संतुलित होती हैं, और उन्हें जो कुछ भी मिलता है उसी में वे संतुष्ट और प्रसन्न रहती हैं. जीवन के तीसरे चरण अर्थात अधेड़ावस्था में इनका आध्यात्म की ओर ज़्यादा झुकाव रहता है.
होंठों के नीचे तिल
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार होंठों के नीचे यानी निचले होंठ के नीचे तिल वाली महिलाएं कलाप्रेमी, महत्वाकांक्षी, चंचल मन और रंगीन मिजाज़ की होती हैं. इनका दांपत्य और पारिवारिक जीवन उतार-चढ़ाव वाला होता है. अधिक संतान का योग होता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊपरी होंठ की तरह निचले होंठ के नीचे स्थित तिल भी अपनी दिशा के अनुसार संकेत देता है. यानी तिल दायीं ओर स्थित है या बायीं ओर, यह मायने रखता है, और दोनों अलग-अलग लक्षण बताते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार महिलाएं, जिनके निचले होंठ के नीचे दायीं ओर तिल होता है वे स्वस्थ, सुंदर और कार्यकुशल होती हैं. मगर इन्हें दिखावा और भोग-विलास भरा जीवन अधिक पसंद होता है. अनेक लोगों के बीच ये जानी जाती हैं, और चर्चा का विषय होती हैं.
इसके विपरीत, निचले होंठ के नीचे बायीं ओर तिल वाली महिलाओं को दिखावा पसंद नहीं होता है, और ये व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन को अधिक महत्त्व देती हैं. मगर इन्हें अच्छा खानपान और वस्त्राभूषण (कपड़े-गहने) का शौक होता है.
इनका दांपत्य जीवन अच्छा होता है, और रिश्ते मजबूत होते हैं. संतान से लगाव रहता है, और उनसे सुख भी प्राप्त होता है.
मगर ये दीर्घायु नहीं होती हैं. बताया जाता है कि अधेड़ावस्था ही में किसी गंभीर रोग का योग होता है, जो जल्दी ही शरीर को कमज़ोर और लाचार बना देता है.
होंठों पर तिल
‘होंठों पर तिल’ का मतलब वह तिल है, जो ठीक सिंदूरी चमड़ी या ख़ाल (वर्मिलियन ज़ोन) पर स्थित होता है. सामुद्रिक शास्त्र का कहना है कि होंठों पर तिल वाली महिलाएं बुद्धिमान, स्वस्थ, आकर्षक, मुखर और प्रभावशाली व्यक्तित्व की होती हैं. इन्हें मनचाहा पति और अच्छी ससुराल मिलती है. इन्हें अधिक संतान का योग होता है.

उल्लेखनीय है कि विशेषज्ञों-विश्लेषकों ने होंठों पर तिल में कोई भेद (प्रकार, अंतर) नहीं बताया है. अर्थात इसके स्थान और दिशा को लेकर लाक्षणिक अंतर की चर्चा नहीं की है. यूं कहिये कि यह तिल चाहे ऊपरी होंठ पर हो या निचले होंठ पर, दोनों में भेद नहीं किया है, या समान ही माना है.
उनके अनुसार होंठों पर तिल वाली महिलाएं आर्थिक और पारिवारिक रूप से मजबूत होती हैं. इन्हें आरामदेह और शांतिमय जीवन पसंद होता है. मगर ये समावेशी विचार की होती हैं, और दूसरों की मदद या परोपकार में हमेशा आगे रहती हैं.
पति को ये रति (कामदेव की पत्नी) के समान यौनसुख देने वाली और विशेष ख़याल रखने वाली होती हैं. पति भी इन पर लट्टू रहते हैं.
संतान से इनका विशेष लगाव रहता है, और उनसे सुख भी प्राप्त होता है.
ये निरोगी शरीर और दीर्घायु बताई जाती हैं.
होंठों की दायीं ओर तिल
होंठों की दायीं या बायीं ओर तिल का अर्थ है होंठों के दाहिने या बाएं वाले बिल्कुल किनारे पर तिल का स्थित होना. यह स्थान हालांकि होंठों (ओष्ठ-क्षेत्र) से अलग और कपोल या गाल वाला हिस्सा होता है, मगर होंठों के बेहद क़रीब या इनसे सटे हुए होने के कारण होंठों से संबंधित और लाक्षणिक माना जाता है.

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार होंठों की दायीं ओर तिल वाली महिलाएं बुद्धिमान, धैर्यवान, साहसी, उद्यमी और परिश्रमी प्रकृति की होती हैं. इन्हें मनचाहा पति और समृद्ध परिवार मिलता है. परंतु, संतान सुख का योग कम होता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन महिलाओं के होंठों की दायीं ओर तिल होता है वे आर्थिक रूप से समृद्ध और मजबूत होती हैं. इन्हें भौतिक सुख की कोई कमी नहीं होती है पर परिवार में अक्सर विवाद या कलह की स्थिति पैदा होती रहती है.
लेकिन ये कभी हार नहीं मानती हैं, परिस्थितियों से लड़ती हैं, साहस और सूझबूझ से समस्याओं का हल निकाल लेती हैं.
इनका दांपत्य जीवन प्यार भरा और मजबूत होता है.
इनका स्वास्थ्य आमतौर पर अच्छा रहता है पर इन्हें औसत आयु ही प्राप्त होती है.
होंठों की बायीं ओर तिल
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार जिन महिलाओं के होंठों की बायीं ओर तिल होता है वे कोमल, भावुक, सहनशील, मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ होती हैं. इन्हें अच्छा पति और अच्छी ससुराल मिलती है. अधिक संतान का योग होता है.

विशेषज्ञों के अनुसार होंठों की बायीं ओर तिल वाली महिलाएं परिवार के लिए समर्पित होती हैं, और उसके लिए ये अपना सर्वस्व न्यौवछावर करने की प्रबल भावना रखती हैं.
इन्हें मिलजुलकर रहना, दूसरों का सहयोग और सहायता करना अधिक प्रिय होता है. इसमें इन्हें विशेष सुख व संतोष का अनुभव होता है.
इनका धर्म-कर्म या आध्यात्म से विशेष जुड़ाव होता है.
इनका विशाल ह्रदय कई बार इन्हें परेशानियों में भी डाल देता है, लेकिन ये अडिग रहती हैं, और लड़ती और सब कुछ ख़ुद ही सहन करती रहती हैं. किसी से अपना दुख-दर्द बांटती नहीं हैं.
इनका दांपत्य जीवन अच्छा और खुशियों से भरा होता है. संतान से भी प्रेम और सुख की प्राप्ति होती है.
इनका स्वास्थ्य ठीक रहता है, और ये दीर्घायु बताई जाती हैं.
अस्वीकरण: इस आर्टिकल में कही गई बातें सामुद्रिक शास्त्र, सामुद्रिक तिलक, भविष्य पुराण का स्त्री पुरुष लक्षण वर्णन, बहुत्रेयी, लघुत्रयी, और अन्य शास्त्रीय पुस्तकों सहित पत्रिकाओं, इंटरनेट वेबसाइट, पूर्व में किये गए कार्यों से विवरण एकत्रित कर किए गए साहित्यिक और वैचारिक अध्ययन का निचोड़ हैं. खुलीज़ुबान.कॉम इसकी सौ फ़ीसदी (100%) प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है. इसलिए, पाठक इसे संक्षिप्त जानकारी मानकर अपने विवेक का उपयोग करें.
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