# KHULIZUBAN > झूठ बोलने से बेहतर है सच के साथ दफ़न हो जाना ## Posts - [नुकसानदेह है ईयरबड का इस्तेमाल, यह आपको बहरा बना सकता है](https://khulizuban.com/health-education/using-earbuds-is-harmful-it-can-make-you-deaf-explained/): ईयरबड का इस्तेमाल आजकल आम है. जाने-अनजाने में लोग इसे अपनी आदत में शामिल कर रहे हैं, जबकि इस से कान की कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं. यह कान के परदे को क्षतिग्रस्त कर हमें बहरा भी बना सकता है.     कान की तस्वीर (सांकेतिक) दुनिया में शायद ही कोई ईयरबड (Ear Buds) या कॉटन स्वैब (Cotton Swabs) के बारे में न जानता हो. कान की सफ़ाई के लिए इस का उपयोग हो रहा है. दरअसल, पश्चिम के लोग हों या फिर उन के तौर-तरीक़ों की नक़ल करने व आधुनिकता की दौड़ में आगे रहने वाले भारतीय … - [अंगदान से बड़ा कोई दान नहीं, यह कर डालिए](https://khulizuban.com/health-education/there-is-no-greater-donation-than-organ-donation-and-body-donation-do-this/): अंगदान से बड़ा कोई पुन्य का काम नहीं होता है. इस की परंपरा सतयुग से ही चली आ रही है. अंगदान से किसी के जीवन की रक्षा होती है, या उसे नया जीवन मिलता है, जो हमारी मुक्ति में भी सहायक होता है.साथ ही, कोई हमारे अंगों का उपयोग करता है तो किसी न किसी रूप में हम जीवित ही रहते हैं.     अंगदान से जुड़े चित्र (सांकेतिक) दान का मतलब होता है ‘देना’ या देने की क्रिया.इसके कई रूप हैं जैसे अर्थ (धन) दान, धर्म दान, विद्या दान, कन्या दान, अभय दान, क्षमा दान, रक्त दान, अंग दान और … - [डॉक्टर ख़ुद ही भगवान बन बैठे, या बनाए गए?](https://khulizuban.com/health-education/doctors-themselves-became-god-or-were-they-made-so-allopathy-narrative-analysis/):  प्राचीन काल से ही लोगों का इलाज करते और नई ज़िन्दगी देते आए हमारे वैद्य या चिकित्साशास्त्री जो हासिल नहीं कर पाए वह ख़िताब, गले में क्रूस टांगे और हाथों में अंग्रेजी गोलियां व इंजेक्शन लिए आए लोगों ने अपने नाम कर लिया. हमारे आयुर्वेदाचार्य जहां आयुर्विज्ञान के भक्त और जनता के सेवक ही बने रह गए वहीं, डॉक्टर भगवान बन गए. मगर क्या वे ख़ुद ही भगवान बन बैठे, या उनकी ताज़पोशी के लिए कोई विशेष रणनीति अपनाई गई थी?   ईसाइयत और एलोपैथी का घालमेल (सांकेतिक) सवाल तो यह भी बनता है कि डॉक्टर ख़ुदा क्यों नहीं बने, या … - [वास्तु सलाह: घर में रखी कुछ चीज़ें कर सकती हैं कंगाल और बर्बाद, तुरंत करें बाहर](https://khulizuban.com/religion-rituals/some-things-kept-in-house-can-make-poor-and-ruined-remove-immediately-vastu-tips-explained/): – वास्तुशास्त्र के अनुसार, निर्जीव वस्तुओं में भी अपनी एक उर्जा होती है   – ताजमहल की तस्वीर या उसकी प्रतिमा एक क़ब्र को दर्शाती है, जिसे मुग़ल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेग़म मुमताज़ की याद में बनवाया था   – कबाड़ कर देता है ज़िन्दगी का कबाड़ा   – कांटेदार पौधे-वृक्ष जीवन के मार्ग में कांटे बो देते हैं   घर, दीवारों और छत को मिलाकर रहने के लिए बनी केवल एक जगह नहीं, बल्कि वह स्थान होता है जहां हमें एक ख़ास वातावरण मिलता है, जो हमारे जीवन में बहुत मायने रखता है.और यह वातावरण भी कई चीज़ों से प्रभावित होता … - [वर्जिनिटी टेस्ट: कहीं और हो तो अनैतिक, चर्च कराए और प्रमाणपत्र बांटे तो जायज़?](https://khulizuban.com/christianity/virginity-tests-and-distribution-of-certificates-by-church-and-silence-of-feminists-media-universal-sisterhood-opnion/): महिला अधिकारों और न्याय को लेकर बवाल मचाने वाली फेमिनिस्टों यानि नारीवादियों के मुंह पर ताला लग जाता है जब मामला मिशनरियों और चर्च से जुड़ा हो.और मीडिया की तो बात ही निराली है.भारत ही नहीं विदेशों में भी, टुच्ची बातों के भी बाल की ख़ाल निकालने और हल्ला मचाने वाली पत्रकारिता अमानवीयता और कुकृत्यों को लेकर चर्च की दहलीज़ तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देती है.ऐसे में यह प्रश्न अनुत्तरित रह जाता है कि वर्जिनिटी टेस्ट, जो ग़लत और अनैतिक माना जाता है और जिस पर डब्ल्यूएचओ रोक लगाने की बात करता है, वह चर्च में प्रचलन में क्यों है.अगर यह … - [बाज़ार में उपलब्ध अधिकांश 'चांदी का वरक़' न तो सेहत के लिए मुफ़ीद है, न भगवान को चढ़ाने लायक](https://khulizuban.com/health-education/most-of-the-silver-leaf-chandi-ka-varq-available-in-market-is-neither-good-for-health-nor-suitable-for-offering-to-god-explained/): फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया द्वारा चांदी के वरक़ बनाने के गंदे तरीक़ों व उसमें ख़तरनाक़ चीज़ों के इस्तेमाल पर रोक लगाए हुए छह साल से ज़्यादा का वक़्त गुज़र चुका है, मगर स्थिति सुधरने के बजाय बदतर हो गई है.हाल ये है कि आज बाज़ार में मिलने वाला अधिकांश चांदी का वरक़ मांसाहारी और ज़हरीला है.यह न तो खाने लायक है, और नही भगवान को चढ़ाने लायक.     चांदी के वरक़ की चमक-दमक (प्रतीकात्मक) देश में दिवाली और होली के अलावा बाक़ी दिनों में भी चांदी के वरक़ या वर्क चढ़ी मिठाइयां पसंद की जाती हैं.पान, च्यवनप्राश, … - [मुस्लिम तुष्टिकरण: नेहरू की राह पर चल रहे हैं मोदी!](https://khulizuban.com/politics/pm-modi-is-following-nehru-in-muslim-appeasement-bjp-rss-policy-analysis/): – ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ जुमले या नारे में ‘सबका विश्वास’ का मतलब केवल और केवल मुसलमानों का दिल जीतना है   – नेहरू से भी आगे निकलकर मोदी गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बनना चाहते हैं और वह सब कुछ करना चाहते हैं, जो मुसलमानों की हितैषी समझी जाने वाली कांग्रेस ने उनके लिए अब तक नहीं किया है   – जम्मू-कश्मीर नीति, वक्फ़ बोर्ड, मदरसा, मज़ार-दरगाह, हज, रोज़ा इफ़्तार के आयोजन, मुस्लिम समाज के उत्थान और विकास के नाम पर विशेष व्यवस्था और ख़र्च को तुष्टिकरण बताने वाले इन्हें सद्भाव कह रहे हैं   – जो गांधी को … - [नुपुर शर्मा मामला: "सुप्रीम कोर्ट के जजों की टिप्पणी लोकतंत्र की न्याय प्रणाली पर धब्बा"- पूर्व न्यायाधीश व लोक सेवक](https://khulizuban.com/current-affairs/former-judges-and-public-servants-slam-sc-remarks-as-blot-in-nupur-sharma-case/): – 15 रिटायर्ड जजों, 77 सेवानिवृत्त लोकसेवकों और 25 सेवानिवृत्त सशस्त्र बलों के अधिकारियों व हज़ारों प्रबुद्ध जनों ने सुप्रीम कोर्ट के जज सूर्यकांत और जेबी पारदीवाला की नुपुर शर्मा पर टिप्पणियों को देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया है   – फ़ोरम फॉर ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखे खुले पत्र में जस्टिस सूर्यकांत के रोस्टर को तब तक वापस लेने कि मांग की गई है जब तक कि वे रिटायर नहीं हो जाते   – सेवानिवृत्त जजों और कई वकीलों ने महिला नुपुर … - [अग्निपथ योजना: सेना विरोधी ही नहीं, देश के लिए भी घातक](https://khulizuban.com/defence-security/agnipath-scheme-is-not-only-against-indian-military-establishment-but-also-dangerous-for-the-country/): -अलगाववादी-जिहादी विचारधारा के युवकों को भारत के ख़िलाफ़ युद्ध के प्रशिक्षण के लिए सीमा पार जाने की ज़रूरत नहीं होगी   -हमारी सेना के दांव-पेच नक्सली-जिहादी-खालिस्तानी हमारी सेना ही के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करेंगें   -अग्निपथ योजना सरकार की गिरती साख को बचाने और वोटबैंक को साधने के मक़सद लाई गई एक विशुद्ध राजनैतिक योजना है, जिसका सामाजिक-आर्थिक सुधारों से कोई सरोकार नहीं –अल्पकालिक सैनिक के रूप में अग्निवीरों की संख्या 50 फीसदी हो जाने से जूनियर लीडरशीप की समस्या तो पैदा होगी ही सेना भी कमज़ोर होगी   राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम … - [पैग़म्बर मोहम्मद पर टिप्पणी को लेकर बवाल, शिवलिंग के अपमान की चर्चा भी नहीं!](https://khulizuban.com/current-affairs/uproar-over-comments-over-prophet-muhammad-but-not-even-discussion-of-insult-to-shivlinga-double-standards-opinion/): नुपूर शर्मा ने पैग़म्बर मोहम्मद को लेकर टिप्पणी की तो हंगामा खड़ा हो गया, देशभर में प्रदर्शन हुआ, तोड़फोड़ और आगजनी हुई.विदेशों में भी इसकी गूंज सुनाई दी.खाड़ी देशों और ख़ासतौर से संयुक्त अरब अमीरात के रूख से भारत सरकार बैकफुट पर नज़र आई.मगर हैरानी की बात यह है कि भगवान शिव या शिवलिंग के अपमान को लेकर चर्चा भी नहीं हुई.विदेशों की बात छोड़िये, देश की मुख्यधारा की मीडिया ने भी इसे बहस का मुद्दा नहीं समझा.फिर वही हुआ, जो अब तक होता आया है.मध्यांतर (Interval) से पहले के सीन में विलेन बनकर उभरा तस्लीम रहमानी हीरो बन गया, जबकि … - [मदरसों को बंद किए बिना सेक्युलरिज्म और सामाजिक सौहार्द की बातें बेमानी हैं](https://khulizuban.com/politics/secularism-and-social-harmony-impossible-without-closing-madrasas/): – एक हाथ में कुरान-दूसरे हाथ में कंप्यूटर की नीति भ्रामक और ख़तरनाक है   – मदरसों को पैसे देना कसाई के हाथ में छुरी ख़रीदकर देने जैसा है   – मासूमों के दिलोदिमाग़ में नफ़रत का ज़हर भरा जाता है मदरसों में   – मदरसों में ही मोमिन और क़ाफ़िर के बीच दीवार ऊंची होती है   – समाज और देश की मुख्यधारा से कट जाते हैं मदरसों में पढ़ने वाले छात्र   लाशों के ढेर पर राजनीति तो हो सकती है, लोगों को बेवकूफ़ बनाकर चुनाव भी जीते जा सकते हैं मगर, आतंकवाद के सच को दफ़न नहीं किया … - [राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद की तरह काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद भी 'उपासना स्थल अधिनियम' के दायरे में नहीं आते हैं](https://khulizuban.com/law-court/places-of-worship-act-kashi-vishwanath-krishna-janmabhumi-not-applicable-like-ram-janmabhumi-dispute-analysis/): – उपासना स्थल अधिनियम के दायरे से बाहर हैं काशी और मथुरा की ज्ञानवापी-शाही ईदगाह मस्जिदें   – मुसलमानों को फ़ायदा पहुंचाने के मक़सद से बने कांग्रेसी कानून ने मुसलमानों को ठगा   – Places of Worship Act, 1991 रूपी क़िले की धाराएं 3 और 4 रूपी दीवारों में दो खिड़कियां खुली रखी गई हैं   – हिन्दू विरोधी कानून ही मंदिर बनवाएगा- जानकारों की राय   जिस उपासना स्थल अधिनियम, 1991 की लोग दुहाई देते नहीं थकते, जिसे कवच बताते हुए विवादित स्थलों/इमारतों जैसे काशी की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को अभेद्य क़िला बताते हैं, उसकी हक़ीक़त … - [मज़ार क्या है? मज़ारों पर चादर चढ़ाना और मन्नतें मांगना जायज़ है?](https://khulizuban.com/islam/what-is-mazar-is-it-permissible-in-islam-to-offer-chadar-a-sheet-of-cloth-and-make-wishes-there-analysis/): अपनी ग़लतियों पर पर्दा डालने के लिए चाहे कितने भी बहाने बनाए जाएं, दलीलें गढ़ी जाएं लेकिन, सच यही है कि मज़ारें इबादत की जगह नहीं हैं.मगर दुर्भाग्य से आज इससे भी बड़ा सच ये है कि बड़ी शिद्दत के साथ लोग यहां जाते हैं, रौशनी करते हैं, सजदा करते हैं, पीर-औलिया के सामने अपना दुखड़ा बयान करते हैं और झोली फैलाकर ऐसे मांगते हैं जैसे कि वे ही अल्लाह हों.फिर, मन्नते पूरी होने के बाद चादरें चढ़ाते हैं और कव्वालियां गाते हुए झूमते-नाचते हैं.ऐसे में, सवाल उठता है कि मज़ार आख़िर है क्या, इसकी इतनी अहमियत क्यों है, और बदलते दौर में … - [टांगीनाथ धाम: खुले आसमान के नीचे ज़मीन में गड़े फरसे में ज़ंग क्यों नहीं लगता है?](https://khulizuban.com/strange-amazing/why-does-the-axe-buried-in-the-ground-under-the-open-sky-at-tanginath-dham-not-rust-analysis/): झारखंड के गुमला जिले में स्थित टांगीनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध भगवान परशुराम की तपोस्थली में एक फरसा रहस्य का विषय है.सदियों पुराने इस फरसे में कभी ज़ंग नहीं लगता, जबकि यह खुले आसमान के नीचे ज़मीन में गड़ा है.मान्यता के अनुसार, त्रेता युग का यह फरसा भगवान परशुराम का है, जिसे उन्होंने स्वयं यहां गाड़ा था.     खुले आसमान के नीचे ज़मीन में गड़ा फरसा झारखंड की राजधानी रांची से 165 किलोमीटर दूर गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित टांगीनाथ धाम एक प्रसिद्ध स्थल है.इसकी ख़ास वज़ह है यहां ज़मीन में गड़ा हुआ एक फरसा.इस पर धूप, बारिश और हवा का … - [कहीं हिजाब, नक़ाब और बुर्क़े की ज़िद, तो कहीं ख़िमार भी नज़र नहीं आता है?](https://khulizuban.com/islam/why-there-is-insistence-on-hijab-niqab-and-burqa-while-at-some-places-even-khimar-is-not-visible-among-muslims-analysis/): बदलते दौर में इस्लामी दुनिया के भीतर भी बाक़ी रंगबिरंगी दुनिया की तरह ही दो तरह की दुनिया पाई जाती है.कहीं आज भी हिजाब के नाम पर मर्द जबरन नक़ाब, अबाया, बुर्क़े आदि थोप कर औरतों को घर में ही क़ैद रखना चाहते हैं, बाहर की दुनिया में अपनी क़ाबिलियत साबित कर उन्हें अपनी पहचान बनाने का मौक़ा नहीं देना चाहते हैं, ताकि वे ग़ुलाम की ज़िंदगी बसर करती हुई सिर्फ़ मनोरंजन का सामान बनी रहें.मगर कहीं ऐसा भी है कि आज नक़ाब और बुर्क़ा तो क्या ख़िमार यानि दुपट्टा या ओढ़नी भी नज़र नहीं आती.यहां औरतों को मर्दों के बराबर के हक़-हकूक हासिल … - [अज़ान क्या है? अज़ान के लिए मस्जिदों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल ज़ायज़ है?](https://khulizuban.com/islam/what-is-adhan-is-the-use-of-loudspeakers-in-mosques-for-adhan-permissible-in-islam-analysis/): अज़ान या अदान मुस्लिम समुदाय में रोज़ाना पांच वक़्त की नमाज़ों के लिए मुअज़्ज़िन द्वारा पुकार या बुलावा है.इसके लिए पैग़म्बर मुहम्मद ने किसी यंत्र को ज़ायज़ नहीं माना था और इंसानी आवाज़ को ही तरज़ीह दी थी.मगर, बदलते दौर में इंसान के साथ-साथ कुछ क़ायदे, उसूलों आदि की परिभाषा भी बदल गई.1970 के दशक तक ‘शैतान’ समझा जाने वाला लाउडस्पीकर यहां नापाक़ नहीं रहा, और अपनी शैतानी फ़ितरत के साथ मस्जिदों की मीनारों पर सजकर अज़ान का ज़रूरी माध्यम बन गया.आज हालत ये है कि इसकी कर्कश ध्वनि के कारण ध्यान भंग तो होता ही है, वातावरण भी अशांत हो … - [हलाल मार्केट गैंग: हलाल प्रोडक्ट की आड़ में बाज़ार पर एकाधिकार कर भारत के इस्लामीकरण की क़वायद](https://khulizuban.com/jihad-terrorism/halal-market-gang-is-engaged-in-islamization-of-india-by-monopolizing-market-under-the-guise-of-halal-products/): – हलाल प्रोडक्ट की आड़ में बाज़ार पर क़ब्ज़े कर भारत के इस्लामीकरण की चल रही है मुहिम   – मांसाहारी ही नहीं शाकाहारी चीज़ें भी हैं हलाल सर्टिफाइड, कंपनियां झोंक रही हैं आंखों में धूल     – प्रोडक्ट के हलाल प्रमाणीकरण की प्रक्रिया के दौरान मौलवी द्वारा उत्पाद पर फूंक मारने या थूकने का आरोप, अदालत पहुंचा विवाद   – क़लमा पढ़कर अलाल्ह के सुपूर्द की गई वस्तु (उत्पाद) एक मुसलमान के लिए तो हलाल है, लेकिन दूसरे धर्म के मानने वालों के लिए यह जूठन जैसा है, जिसे वे अपने भगवान को चढ़ाना तो दूर ख़ुद भी ग्रहण नहीं … - [RERA: 5 साल, 9 दिन चले अढ़ाई कोस](https://khulizuban.com/econoy-business/failures-of-rera-reasons-troika-of-corrupt-bureaucrats-white-collar-criminals-and-property-mafia-explained/): जब हम रेरा की नाक़ामियों की बात करते हैं, तो सवाल सरकारों की नीयत पर भी उठते हैं.कुछ तो इसकी अपनी ख़ामियां थीं, जो इसकी कमज़ोरी की वज़ह बनीं, बाक़ी सफ़ेदपोशों, प्रॉपर्टी माफ़िया और काले धन के कारोबारियों के चहुंओर फ़ैले मकड़जाल ने इसे लाचार बना दिया.     रेरा कानून और विविध पक्ष (सांकेतिक) घर ख़रीदारों को न्याय दिलाने वाले चर्चित क़ानून रेरा को देश में आए हुए पांच साल से ज़्यादा का वक़्त गुज़र चुका है मगर, लगता है कि यह अब तक नाबालिग ही है.यह वयस्क कब होगा और अपने उद्देश्यों को पूरा करने में समर्थ होगा यह, स्पष्ट … - [RERA क्या है? रेरा बिल्डर, डेवलपर और प्रापर्टी डीलरों के ख़िलाफ़ घर ख़रीदारों की शिक़ायत पर कैसे काम करता है?](https://khulizuban.com/econoy-business/what-is-rera-how-this-handles-complaints-from-homebuyers-against-builders-developers-and-property-dealers/): RERA रियल एस्टेट से जुड़े विवादों का जल्दी निपटारा करने के उद्देश्य से बनाया गया एक ऐसा प्राधिकरण है, जो बिल्डर, डेवलपर और रियल एस्टेट एजेंटों यानि प्रॉपर्टी डीलरों से घर ख़रीदारों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ माहौल को पारदर्शी बनाने और पूंजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में काम करता है.     रेरा यानि रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट (भू-संपदा विनियमन एवं विकास अधिनियम), 2016 दरअसल, भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है, जिसके तहत सरकारों की देखरेख में विशेष प्राधिकरण (Regulatory Authority) के माध्यम से घर ख़रीदारों के हितों की रक्षा करने और अचल संपत्ति उद्योग में … - [कुरान की हिजाब वाली आयतों में क्या है जानिए](https://khulizuban.com/islam/what-do-the-quranic-verses-about-hijab-say-explained-in-detail/): देखा जाए तो कुरान की हिजाब वाली आयतों में कही गई बातों और लोगों की इस बारे में राय में काफ़ी फ़र्क है. यही कारण है कि नक़ाब, अबाया और बुर्क़े ने अतिक्रमण कर हुक्म के मुताबिक़ पहने जाने वाले शालीन कपड़ों की जगह ले ली है.     हिजाब (प्रतीकात्मक) कुरान में पर्दे या हिजाब के हुक्म को लेकर बहुत तरह की भ्रांतियां फ़ैली हुई हैं.अधिकांश लोगों को पता ही नहीं है कि वास्तव में कुरान में इसके बारे में लिखा क्या है. इसकी वज़ह भी है. पहली, आयतें अरबी में हैं, जिसके जानकार यहां कम या बहुत ही कम … - [इस्लाम में हिजाब क्या है? हिजाब की शुरुआत कब, कहां और कैसे हुई?](https://khulizuban.com/islam/what-is-hijab-in-scriptures-know-when-where-and-how-hijab-came-into-practice/): जब भी इस्लाम की चर्चा होती है, तो हिजाब का ज़िक्र भी आता है.हिजाब का ज़िक्र हर जुबान पर होता है मगर, बहुत कम ही लोग ऐसे हैं, जो ये जानते हैं कि हिजाब आख़िर होता क्या है.अधिकांश लोगों को मालूम ही नहीं है कि पारंपरिक इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दे को लेकर पहना या ओढ़ा जाने वाला इस नाम का कोई कपड़ा अथवा वस्त्र नहीं है.यानि इस्लामी पहनावे (Dress) में हिजाब (Hijab) नामक ऐसा कोई कपड़ा अथवा वस्त्र ही नहीं है, जिसे पहनकर कोई महिला (या लड़की) एक मोमिना यानि मुस्लिम महिला के रूप में पहचानी (जानी) जाए.तो फिर, हिजाब आख़िर है … - [शिक्षण संस्थानों में हिजाब-विवाद: कुरान पर अमल या फ़साद और जिहाद की शुरुआत? क्या होगा अंजाम जानिए](https://khulizuban.com/current-affairs/hijab-controversy-in-educational-institutions-of-india-appears-to-be-driven-by-politics-fasaad-and-jihad/): भारत में बहस इस बात पर छिड़ी हुई है कि इस्लाम में हिजाब का स्थान और स्वरुप क्या है, जबकि चर्चा इस बात पर होनी चाहिए कि इस सेक्यूलर देश में नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार असीमित नहीं हैं. मौलिक अधिकारों के नाम पर यहां कोई ऐसा मज़हबी एजेंडा चलाने की इज़ाज़त नहीं दी जा सकती है, जिससे फ़साद और जिहाद की स्थिति पैदा हो. यहां संविधान को व्यावहारिक बनाए रखना ही मूल उद्देश्य है.   हिजाब विवाद (प्रतीकात्मक) हिजाब दरअसल, किसी राज्य-विशेष या वहां का अदालती मसला नहीं है, बल्कि इसका संबंध पूरे राष्ट्र से है. जिस तरह … - [भारत में मैरिटल रेप लॉ के बहाने विदेशी संस्कृति थोपने की हो रही है साज़िश! किसकी कितनी भूमिका है जानिए](https://khulizuban.com/law-court/conspiracy-to-impose-foreign-culture-through-marital-rape-law-in-india/): जो काम हथियार से मुश्किल है वह दिमाग़ से बड़ी आसानी से हो जाता है. मैरिटल रेप कानून भी ऐसा ही है, जो लाया जाने वाला है. यह कानून विवाह जैसी पवित्र संस्था को नष्ट कर देगा, और विदेशी संस्कृति हावी हो जाएगी. - [क्या पारसी धर्म और इस्लाम की कुछ मूल अवधारणाएं समान हैं? इस्लाम ने ये अवधारणाएं क्या पारसी धर्म से ली है?](https://khulizuban.com/history/are-some-basic-concepts-of-zoroastrianism-and-islam-same-and-did-islam-borrow-these-concepts-from-zoroastrianism-analysis/): ये कहना ग़लत नहीं होगा कि पारसी धर्म और इस्लाम में पाई जाने वाली कई मूलभूत अवधारणाएं एक दूसरे से मिलती-जुलती हैं.कुछ विद्वानों का मत है कि ये अवधारणाएं इस्लाम ने पारसी धर्म से ली है.     पारसी धर्म, इस्लाम और उनके अनुयायी (प्रतीकात्मक) अध्ययन से पता चलता है कि कई मूलभूत अवधारणाएं पारसी धर्म और इस्लाम, दोनों में ही समान रूप में पाई जाती हैं.हालांकि, इनमें से कुछ में थोडा फ़र्क भी दिखाई देता है लेकिन, वो फ़र्क बहुत मामूली हैं, जबकि इनकी प्रकृति और उद्देश्य में स्पष्ट रूप में समानता देखने को मिलती है.     एकेश्वरवाद फ़ारसी … - [बपतिस्मा और नमाज़ की पद्धति यहूदी, ईसाई और इस्लाम ने क्या मांडेवाद और पारसी धर्म से ली?](https://khulizuban.com/history/did-judaism-christianity-and-islam-borrow-the-method-of-baptism-and-namaz-salah-from-mandaeism-and-zoroastrianism-analysis/): ‘राजा मनु और जल प्रलय’ की कहानी जिस तरह ‘हज़रत नूह की नौका’ के नाम से जानी जाती है, उसी तरह क्या बपतिस्मा और नमाज़ का रस्मो-रिवाज़ (पद्धति) भी यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों ने मांडेवाद और पारसी धर्म से लिया, यह एक ऐसा सवाल है, जो बौद्धिक जगत में अक्सर चर्चा का विषय रहता है.कहा जाता है कि बपतिस्मा और नमाज़ का चलन काफ़ी पहले से था, जिन्हें बाद में अस्तित्व में आए इब्राहिमी पंथों/मज़हब ने भी कुछ बदलाव के साथ उनके नाम बदलकर अपना लिया था.आख़िर, सच क्या है?   बपतिस्मा और नमाज़ (प्रतीकात्मक) मानव जाति और धर्म के इतिहास … - [जानिए दुनिया के एक ऐसे वकील के बारे में जो 43 सालों से लड़ रहा है संस्कृत में मुक़दमे](https://khulizuban.com/strange-amazing/know-about-a-lawyer-in-the-world-who-has-been-arguing-cases-in-sanskrit-for-43-years-in-court/): – सबसे प्राचीन और देवभाषा कही जाने वाली संस्कृत भाषा को दयनीय स्थिति में देखकर एक अध्यापक ने अध्यापन छोड़ वकील बन कर संस्कृत में ही वकालत करने का निर्णय लिया – साल 1978 में इस वकील ने संस्कृत भाषा में पहला केस लड़ा, और तब से संस्कृत के साथ शुरू हुआ उसका सफ़र आज भी जारी है – उनकी तमन्ना है कि उनके जीते जी संस्कृत देश की राष्ट्रभाषा, जन भाषा और अदालती भाषा बने आज के दौर में माथे पर त्रिपुंड और तिलक धारण किए हुए अदालत में जज के सामने एक वकील को संस्कृत में बहस करते देखना … - [मनु बेन की डायरी में दिखता है गांधीजी का असली चेहरा, उजागर हो जाता है ब्रह्मचर्य प्रयोग का रहस्य](https://khulizuban.com/history/history-freedom-struggle-diary-of-manu-ben-shows-real-face-of-mahatma-gandhi-and-exposes-secret-of-his-experiment-of-celibacy-explained/): मशहूर कहावत ‘मखमल में टाट का पैबंद’ तो सभी ने सुनी होगी, लेकिन ‘टाट में मखमल का पैबंद’ कैसे लगाया जाता है यह भारतीय इतिहासकारों-लेखकों से बेहतर शायद ही कोई जानता होगा. लगता है उन्होंने गांधीजी का सच छुपाने और महात्मा बताकर उन्हें महिमामंडित करने में अपनी पूरी बौद्धिक शक्ति झोंक दी थी. लेकिन जैसे पानी के संपर्क में आने पर कच्चा रंग धुल जाता है वैसे ही नकली आभा भी सच्चाई की रौशनी में टिक नहीं पाती है. अब मनुबेन की डायरी को सच्चाई की रिशनी कहिये या आईना, इस ने गांधीजी के असली चेहरे को सार्वजनिक कर दिया है.   … - [किशोरावस्था में जो भटके गांधीजी, बुढ़ापे में भी ख़ुद को काबू में नहीं रख पाए](https://khulizuban.com/history/gandhi-who-went-astray-in-his-teens-could-not-control-himself-even-in-old-age/): – पूरी ज़िंदगी गांधी जी अपनी यौन कुंठाओं को लेकर परेशान रहे और इसी को साधने के प्रयोग करते रहे – बहुत कम लोगों को पता है कि गांधी जी किशोरावस्था में ग़लत संगत में पड़कर ग़लत रास्तों पर चले गए थे – अपनी आत्मकथा में गांधी जी ने लिखा है कि उन्होंने चोरियां कीं, बीड़ी पी और कोठे पर भी गए       किशोरावस्था में की गई ग़लतियां कितनी नुकसानदेह होती है, ये शायद गांधीजी अच्छी तरह समझते थे.यही कारण है कि अपने एक दोस्त और उसकी संगत में रहते हुए जो ग़लत काम किए, वह सब उन्होंने अपनी … - [महात्मा गांधी को मनुबेन ने कहीं अपनी 'मां' तो कहीं अपने मन की मीरा का 'श्याम' क्यों बताया है?](https://khulizuban.com/history/history-brahmcharya-ke-prayog-the-contradictory-statements-of-manu-ben-about-her-relationship-with-mahatma-gandhi-analysis/): – तथाकथित ब्रह्मचर्य के यज्ञ, प्रयोग या अभ्यास में एक ही प्रकार की सेविकाओं के साथ अलग-अलग तरह के पारिवारिक संबंध-संबोधनों की क्या ज़रूरत थी, यह समझ से परे है   – ख़ुद को मनु की मां बतानेवाले गांधीजी पहले, ख़ुद को सुशीला का पिता बता चुके थे और इसी प्रकार ज़रूर उन्होंने अम्तुस्सलाम को भी, कुछ इसी तरह के रिश्ते की बात कही होगी   – 77 के एक बूढ़े व्यक्ति और 17 साल की एक नाबालिग़ लड़की के बीच नंगे सोने वाली रात्रि-चर्या को क्या प्रेम कहा जा सकता है, एक बड़ा सवाल है   – जवाहरलाल नेहरु के … - [जम्मू-कश्मीर में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन, अलगाववाद आधारित सत्ता फिर से बहाल करने की क़वायद: इक्कजुट जम्मू का मोदी सरकार पर आरोप](https://khulizuban.com/politics/delimitation-in-jammu-and-kashmir-based-on-2011-census-is-an-attempt-to-reinstate-separatist-based-power-by-modi-government/):  –  2011 की जनगणना में हेराफ़ेरी की जानकारी होते हुए भी, उसके आधार पर परिसीमन कराने को लेकर मोदी सरकार पर उठ रहे हैं सवाल –  मोदी सरकार पर आरोप है कि वह पिछले दरवाज़े से धारा 370 और 35ए फिर से बहाल कर रही है –  इक्कजुट जम्मू के अध्यक्ष एडवोकेट अंकुर शर्मा का कहना है कि मोदी सरकार की ओर से पहले जम्मू-कश्मीर में डोमिसाइल क़ानून और अब 2011 की फ्रॉड और जाली जनगणना के आधार पर परिसीमन को थोपना, अलगाववाद आधारित सत्ता दोबारा क़ायम करने की क़वायद है –  हमें फिर उन्हीं हाथों में सौंपा जा रहा है, … - ['जम्मू-कश्मीर में दूसरों के हक़ का पैसा मुसलमानों पर लुटा रही है मोदी सरकार'- अल्पसंख्यकों का केस लड़ चुके एडवोकेट अंकुर शर्मा का PMO पर बड़ा आरोप](https://khulizuban.com/politics/modi-govt-squandering-money-muslims-jammu-and-kashmir-ankur-sharma/): –  एडवोकेट अंकुर शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लिखित रूप में वादा करने के बाद भी मोदी सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मुसलमानों को ग़ैर-मुसलमानों का हक़ देना बंद नहीं किया है   –  PMO उड़ा रहा है अपने ही 15 सूत्रीय कार्यक्रम के ‘इम्प्लीमेंटेशन गाइडलाइन’ की धज्जियां- एडवोकेट अंकुर शर्मा   –  एडवोकेट अंकुर शर्मा ने ये भी आरोप लगाया है कि सरकार सिर्फ़ सरकारी खज़ाने का ही दुरूपयोग नहीं कर रही है बल्कि इससे राष्टहित से समझौता भी हो रहा है     –  अंकुर शर्मा के मुताबिक़, ‘सबका साथ – सबका विकास – सबका विश्वास’ के बदले … - [ज़ी एंटरटेनमेंट इन्वेस्को विवाद: क्या इन्वेस्को के ज़रिए ज़ी एंटरटेनमेंट को हथियाने की फ़िराक में है चीन?](https://khulizuban.com/econoy-business/is-china-trying-to-take-over-zee-entertainment-through-invesco-dispute/): ज़ी एंटरटेनमेंट और इन्वेस्को के बीच चल रहे विवाद को लेकर बड़ा सवाल यह है कि क्या इन्वेस्को के ज़रिए चीन ज़ी एंटरटेनमेंट को हथियाने की फिराक में है? अमरीकी कंपनी इन्वेस्को और उसकी सहयोगी OFI Global China Fund ने बोर्ड में बदलाव की मांग की है, जिससे ज़ी-सोनी विलय भी प्रभावित हो सकता है. Zee Group के संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा इसे विदेशी साज़िश बता रहे हैं, जबकि विवाद अब कोर्ट पहुंच गया है. क्या भारत का यह Iconic मीडिया ब्रांड विदेशी हाथों में चला जायेगा? - ['स्किन टू स्किन टच' मामला: कपड़े के ऊपर से छेड़छाड़ करना भी पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध है- सुप्रीम कोर्ट का फैसला](https://khulizuban.com/law-court/molestation-even-over-clothing-is-an-offence-under-pocso-act-supreme-court-verdict-in-skin-to-skin-touch-case/): .  12 साल की बच्ची के यौन शोषण मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने सेशन कोर्ट के फ़ैसले में जो बदलाव कर आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 7 के तहत बरी करने का आदेश दिया था, उसे सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया     .  महिला जज पुष्पा गनेडीवाला ने कपड़े के ऊपर से बच्ची के स्तन को दबाने के अपराध को लेकर अपने आदेश में कहा था – ‘स्किन टू स्किन टच’ नहीं हुआ इसलिए यह पॉक्सो एक्ट की धारा 7 के तहत नहीं आता   .  सुप्रीम कोर्ट ने भारत के अटार्नी जनरल, राष्ट्रीय महिला आयोग … - [चंवरवंशियों को 'चमार' कहलाने पर गर्व क्यों है?](https://khulizuban.com/society-lifestyle/why-are-chanwarvanshi-proud-to-be-called-chamar/): बंदी बनाए गए क्षत्रिय सैनिक और अन्य लोग, जो इस्लाम क़बूल नहीं करते थे मुस्लिम आक्रांता उनका स्वाभिमान भंग करने के लिए उन्हें मैला ढ़ोने, गाय आदि की ख़ाल उतारने, चमड़ा पीटने और चमड़े के काम में ज़बरन लगा देते थे.उन्हें भंगी और चमार कहकर ज़लील भी किया जाता था. - [मेजर जनरल सुभाष शरण के दारुल उलूम देवबंद दौरे पर सवाल, क्या मोदी सरकार ने सेना का राजनीतिक इस्तेमाल किया?](https://khulizuban.com/politics/question-on-major-general-shubhash-sharan-visit-to-darul-uloom-deoband-did-modi-government-use-army-for-political-purposes-analysis/): .  भारतीय सेना के किसी अधिकारी का दारुल उलूम देवबंद जाना एक ऐतिहासिक घटना   .  मेजर जनरल सुभाष शरण ने देवबंद की तारीफ़ की और प्रतीक चिन्ह भेंट किया    .  मेजर जनरल ने दारुल उलूम के छात्रों को भर्ती का ऑफर देते हुए उन्हें बायोडाटा भेजने को कहा   .  मेजर जनरल शरण ने दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना नोमानी से कहा- ‘यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ – सबका विकास और सबका विश्वास के आह्वान से प्रेरित है’            भारतीय सेना के किसी अधिकारी का दारुल उलूम देवबंद जाना और वहां … - [अदालत में बैठी जनता अगर इंसाफ़ करती, तो गोडसे बेक़सूर करार दिए जाते: गांधी हत्या-केस में याचिका पर सुनवाई करने वाले जज खोसला](https://khulizuban.com/history/judge-khosla-godse-jury-not-guilty-quote-explained/): .  जज खोसला ने कहा कि जनता अगर इंसाफ़ करती तो गोडसे बेक़सूर क़रार दिए जाते   .  जस्टिस खोसला ने अपनी क़िताब में लिखा है कि जब गोडसे ने बोलना बंद किया, तो एक गहरी ख़ामोशी के बीच महिलाएं रो रही थीं, पुरूष खांस रहे थे और अपना रूमाल ढूंढ रहे थे   .  गोडसे ने कहा था कि गांधी राष्ट्र पिता नहीं, पाकिस्तान के पिता थे क्योंकि उन्होंने भारत के टुकड़े कर पाकिस्तान नामक मुल्क को जन्म दिया   .  बयान में गोडसे ने बताया- गांधी जी की सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण नीति ने उद्धेलित कर गोली चलाने के लिए … - [किसने मारी थी महात्मा गांधी को चौथी गोली?](https://khulizuban.com/history/history-independent-india-who-fired-the-fourth-bullet-that-killed-mahatma-gandhi-claims-and-facts-analysis/): .   सात दशक से ज़्यादा वक़्त गुजरने के बाद भी सुलझ नहीं पाया है गांधीजी की हत्या का रहस्य .   शव का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया जाना भी संदेह का एक बड़ा कारण .   मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, गांधीजी को ‘चार गोलियां‘ मारी गई थीं .   गांधी जी को गोली मारने से पहले गोडसे ने उन्हें बम से उड़ाने की कोशिश की थी    .  क्या नाथूराम गोडसे केवल एक मोहरा थे, जिनका इस्तेमाल कर गांधी जी को रास्ते से हटाने के लिए एक बड़ी राजनीतिक साज़िश को अंज़ाम दिया गया था?  .   जानकार बताते हैं कि भारत-विभाजन के दौरान कई सारे … - [गोडसे का वह बयान क्या था, जिसे सुनकर अदालत में बैठे लोगों की आंखें भर आईं?](https://khulizuban.com/history/history-patriotism-what-was-the-statement-by-godse-which-brought-tears-to-the-eyes-of-people-present-in-the-courtroom-expalined/): गोडसे को कोई हत्यारा कहता है तो कोई सिरफिरा.कुछ लोग उन्हें एक पागल हिन्दू बताकर नफ़रत के भाव व्यक्त करते हैं.मगर, कुछ लोगों बड़ा स्पष्ट मानना था कि नाथूराम गोडसे गांधी कहीं ज़्यादा धर्मनिरपेक्ष थे. - [शरिया क़ानून क्या है? क्या असली शरिया क़ानून से अलग है तालिबान का शरिया क़ानून?](https://khulizuban.com/islam/what-is-sharia-law-know-talibans-verson-of-sharia-is-same-or-different-from-true-sharia-law/): .  क़ुरान और हदीसों में लिखे नियमों को मिलाकर तैयार हुआ है शरिया क़ानून   .  शरिया सिर्फ़ क़ानून नहीं है बल्कि यह इस्लाम के अंदर सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से जीने के लिए क़ायदों को बयान कर करता है   .  शरिया के तहत पैगंबर मुहम्मद,इस्लाम और क़ुरान की आलोचना वर्जित है   .  शरिया में जिहाद के बारे में कहा गया है कि यह तब तक जारी रखना चाहिए जक तक पूरी दुनिया शरिया की शरण में न आ जाए   .  शरिया के अनुसार, एक मुसलमान का मक़सद सभी काफ़िरों और ग़ैर-मुसलमानों को धिम्मी बनाना … - [तालिबान का चरित्र: अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियां और औरतें ही नहीं, मासूम लड़के भी बनाए जाते हैं सेक्स ग़ुलाम](https://khulizuban.com/jihad-terrorism/taliban-make-not-only-girls-and-women-but-also-boys-into-sex-slaves-in-afghanistan-real-character-of-taliban/): . मदरसों में पढ़े, आसमानी क़िताब के उसूलों को अमलीजामा पहनाने वाले कहलाते हैं तालिबान   . इंसानी दुनिया से बिल्कुल अलग है अफ़ग़ानिस्तान में तालिबानी दुनिया   . लड़कियां और महिलाएं ही नहीं, मासूम लड़के भी बनते हैं तालिबान का शिकार   . शादी के बहाने हवश पूरी करने के साथ नई ज़िहादी पौध विकसित करने की क़वायद में तालिबान   . बच्चा बेरीश सेक्स की भूख मिटाने के अलावा हनी ट्रैप में भी किए जाते हैं इस्तेमाल       अफ़ग़ानिस्तान में सिर्फ लड़कियां और औरतें ही तालिबान की शिकार नहीं है बल्कि छोटी उम्र के मासूम लड़के भी … - [भारत में कुंवारी लड़कियां विवाह के आश्वासन के बिना नहीं बनाती हैं शारीरिक संबंध- अदालत ने कहा](https://khulizuban.com/law-court/unmarried-girls-in-india-do-not-engage-in-physical-relationship-without-assuarance-of-marriage-high-court-said-during-hearing/): – आपसी सहमति से संबंध बनाने की दलील खारिज़ करते हुए कोर्ट ने किया ज़मानत देने से इनकार   – कोर्ट ने साफ़ कहा कि कोई भी भारतीय अविवाहित लड़की सिर्फ़ मनोरंजन के लिए नहीं बनाती संबंध   –  कोर्ट ने नसीहत दी कि किसी लड़की से संबंध बनाने से पहले उसके परिणाम पर भी करना चाहिए विचार       मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बलात्कार के एक मामले में आरोपी को ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा कि भारत की लड़कियां यौन संबंधों के लिए तैयार नहीं होती हैं जब तक उन्हें ‘विवाह का आश्वासन’ ना मिले. इस … - [क़ैदी के इश्क़ में दीवानी महिला जेलर ने क़ैदी के नंबर का टैटू अपनी जांघ पर गुदवा लिया था](https://khulizuban.com/strange-amazing/female-jailer-obsessed-with-prisoner-got-his-secret-number-tatooed-on-her-thigh-in-full-sutton-prison-yorkshire/): – इश्क़ की दीवानी 22 साल की लेडी जेलर क़ैदी से करती रहती थी लंबी बातें – प्यार की निशानी के तौर पर महिला जेलर ने क़ैदी के नंबर का गुदवा लिया था टैटू – मेडिकल जांच में गुप्त टैटू का खुला राज़ – तलाशी के दौरान मिले लव लैटर में क़ैदी के नंबर वाले टैटू का चित्र भी था – ज़ेल नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए क़ैदी को मुहैया कराई प्रतिबंधित सेवाएं     अपने ही क़ैदी के इश्क़ में दीवानी हुई 22 साल की एक महिला जेलर ने क़ैदी के नंबर का टैटू गुदवा लिया.इतना ही नहीं उसने ज़ेल … - [क़ैदी के साथ महिला जेलर क़ैदियों के सामने बनाती थी शारीरिक संबंध, वर्दी में करा रखा था डिजाइनर छेद](https://khulizuban.com/strange-amazing/bijarre-crime-female-jailer-had-sex-with-an-inmate-in-front-of-other-prisoners-sentenced-fresno-county-jail-california/): – 11 अन्य क़ैदियों के सामने ही बनाती थी एक क़ैदी के साथ शारीरिक संबंध  – शारीरिक संबंध बनाने में आसानी हो, इसके लिए उसने अपनी वर्दी की पैंट में करा रखा था छेद – सेक्स के बदले जेलर क़ैदी को देती थी शराब और ड्रग्स   – सुधार अधिकारी को सुधरने लिए मिला है दो साल का मौक़ा     अमरीका के कैलिफोर्निया की एक महिला जेलर अपनी जेल में दूसरे क़ैदियों के सामने एक क़ैदी के साथ सेक्स करती थी. इसके लिए बाक़ायदा उसने अपनी पैंट में छेद करा रखा था. अदालत ने इस जुर्म के लिए उसे 210 दिनों की … - [भारत में बिजली गिरने की घटनाओं में इज़ाफ़ा, मौतें सालाना 3 हज़ार के पार](https://khulizuban.com/calamity-disaster/lightning-strikes-on-the-rise-in-india-annual-deaths-exceed-3000-government-policy-and-ndma-reports-analysis/): – हाल के वर्षों में भारत में बढ़ी आसमानी बिजली गिरने की घटनाओं के कारण मौतों की तादाद तेज़ी से बढ़ी है – पुणे की इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेटेरेलोजी (आईआईटीएम) के मुताबिक़ व्यवस्था व जानकारी के अभाव के चलते भारत में बिजली गिरने से सालाना साढ़े तीन हज़ार लोग मारे जा रहे हैं जबकि इस समस्या से दुनिया में सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र दक्षिण अमरीका में औसतन मृत्यु का आंकड़ा महज़ 27 है  – भारत में बिजली गिरना अधिकारिक रूप में प्राकृतिक आपदाओं में शामिल नहीं है जिस कारण इससे होने वाली मौतों के मामलों में मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा … - [कौन कर रहा है आपके नाम से मोबाइल नंबर का इस्तेमाल, पता कर उसे करा सकते हैं बंद](https://khulizuban.com/technology-innovation/how-to-track-mobile-number-sim-issued-on-your-name-and-report-misuse-on-sancharsaathi-portal-explained/): दूसरे के नाम पर सिम-मोबाइल नंबर लेकर इस्तेमाल करने वालों की अब खैर नहीं. भारत सरकार के पोर्टल पर न सिर्फ आप अब इस का पता लगा सकते हैं, बल्कि शिक़ायत कर ऐसे नंबरों को बंद करा सकते हैं. - [आधार लॉक कर अपना बायोमेट्रिक डाटा करें सुरक्षित, जानें तरीक़ा](https://khulizuban.com/utility-technology/aadhar-lock-unlock-feature-know-how-to-use-to-keep-biometric-data-safe/): – आधार नंबर अगर लॉक है तो नहीं हो पाएगा उसका ग़लत इस्तेमाल   – कभी भी अपना आधार कर सकते हैं लॉक अनलॉक – आधार नंबर को लॉक करने से पहले आधार वर्चुअल आईडी बनाना ज़रूरी     आधार कार्ड से जुड़ा एक ख़ास फ़ीचर लॉक-अनलॉक, जिसे शायद कम ही लोग जानते और इसका उपयोग करते होंगे, मगर यह बड़े काम की चीज़ है. इसके ज़रिए हम अपना बायोमेट्रिक डाटा अपने अधिक नियंत्रण में और सुरक्षित कर सकते हैं. यूआईडीएआई (UIDAI) की ओर से वास्तव में, यह हमारी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के मक़सद से बहुत अच्छी व्यवस्था है. … - [KYC क्या है? इसकी आवश्यकता, प्रकार और प्रक्रिया के बारे में जानिए](https://khulizuban.com/utility-technology/know-what-is-kyc-importance-of-kyc-types-and-process-in-banking-services-finance/): – KYC – Know Your Customer का मक़सद ये सुनिश्चित करना होता है कि कोई ग्राहक वास्तव में वही है, जो वह दावा करता है  – केवाईसी अपडेट के बिना हम वित्तीय लेनदेन संबंधी कोई भी खाता नहीं खोल सकते/संचालित नहीं कर सकते  – क्लाइंट ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाएं मनी लौन्ड्रिंग,आतंकवाद में फंडिंग और अन्य भ्रष्टाचार को पहचानने और उन्हें रोकने में मदद करती हैं    KYC बैंक और वित्तीय संस्थानों द्वारा अपने ग्राहकों के बारे में जानकारी प्राप्त करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें वे यह सुनिश्चित करते हैं कि उनका इस्तेमाल मनी लौन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाने) की गतिविधियों के … - [Aadhaar Virtual ID क्या है और कैसे इसे ज़ेनेरेट करते हैं जानिए](https://khulizuban.com/technology-innovation/what-is-aadhaar-virtual-id-know-how-to-generate-and-use/): – Aadhaar Card प्रमाण के रूप में एक ओरिज़ीनल कॉपी है तो Aadhaar Virtual ID उसकी एक डुप्लीकेट कॉपी के रूप में उसके साथ मैप (प्रतिचित्रित) की गई अस्थाई और तात्कालिक प्रयोग के लिए तैयार 16-अंकीय पहचान संख्या है, जिसे विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है   – Virtual ID यानि ई-आधार बनाने का विकल्प निकट भविष्य में mAadhaar app में शामिल किया जा सकता है – फ़िलहाल वीआईडी कम से कम एक दिन के लिए वैध रहती है और इसे कई बार यानि बार-बार री-ज़ेनेरेट किया जा सकता है  – एक बार वेरिफिकेशन पूरा हो जाने के बाद, … - [डिज़िटल दुनिया में रच-बस गया है Barcode, जानिए इस के इतिहास, प्रकार, संरचना और उपयोग के बारे में](https://khulizuban.com/utility-technology/barcode-has-merged-into-the-digital-world-know-about-its-history-types-structure-and-use/):  – आज हर दुकानदार और बाज़ार कर रहा है Barcode  की तक़नीक का इस्तेमाल – Barcode न सिर्फ़ बिल बनाने में उपयोगी है, बल्कि प्रोडक्ट की सूची तैयार करने में भी है बड़ा मददगार  – प्रोडक्ट की बात कौन करे अब तो मकान, गांव और शहरों को भी Barcode के ज़रिए ही मिल रही है पहचान   Barcode के जन्म से लेकर विकास के अब तक के लंबे सफ़र के दौरान इसे टक्कर देने मैदान में उतरीं क्यूआर कोड (क्वीक रिस्पांस कोड) और आरएफ़आईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) जैसी नई तक़नीक ने ज़लवे बिखेरते हुए अपने लिए जगह तो बना ली, मगर इस की छवि … - [QR Code क्या है? यह कितने प्रकार का होता है, और कहां-कहां इस्तेमाल होता है जानिए](https://khulizuban.com/utility-technology/what-is-qr-code-types-and-uses-in-different-fields-explained/): – तुरंत सूचना उपलब्ध कराने की ख़ासियत के कारण इसका नाम पड़ा Quick Response Code, जिसे संक्षिप्त रूप में हम QR Code कहते हैं – जापान की एक मशहूर डेन्सो वेव कंपनी ने विकसित की थी QR Code की तक़नीक – QR Code बारकोड का ही उन्नत और द्विविमीय संस्करण है      आज एक छोटी समझी जाने वाली कोई चीज़ कल बड़े काम की या बहुउपयोगी साबित होगी, ये पता नहीं होता.ऐसे ही जापान की डेन्सो वेव नामक कंपनी द्वारा विकसित की गई एक तकनीक जिसका इस्तेमाल सिर्फ़ ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में गाड़ियों के पुर्ज़ों की पहचान तय करने के लिए … - [एक ऐसा देश, जिसकी अपनी न तो नौसेना है और न वायुसेना!](https://khulizuban.com/strange-amazing/a-country-in-the-world-has-neither-navy-nor-air-force/): – भूटान भारत और तिब्बत के बीच स्थित लैंडलॉक यानि भूमि आबद्ध देश है – भूटान के चारों तरफ़ सिर्फ़ पहाड़ और पहाड़ियां हैं तथा ज़मीनें बहुत ऊबड़-खाबड़ हैं   –  एशिया का सबसे ख़ुशहाल देश समझा जाता है भूटान      हम सभी जानते हैं कि लालच और विस्तार की मानसिकता से ग्रसित इस राजनीतिक संसार में हर समय अतिक्रमण और आक्रमण का भय सताता रहता है.ऐसे में अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हरेक देश अपनी सेना का गठन करता है, जो सीमाओं को चहुंओर से सुरक्षित रखती है.पानी के रास्ते आने वाले ख़तरों से निपटने के लिए नौसेना होती … - [प्लास्टिक के कचरे से बनेगी वनीला आइसक्रीम! जानें पूरी डिटेल](https://khulizuban.com/science-general-knowledge/vanilla-ice-cream-will-be-made-from-plastic-waste/): वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक के कचरे को जेनेटिकली मोडिफाइड बैक्टीरिया से मिलाकर वैनिलीन बनाया है, जिससे वैनिलीन का उत्पादन तो ज़्यादा होगा ही साथ ही प्लास्टिक के कचरे से भी दुनिया को राहत मिलेगी. - [महामारी में निज़ी अस्पतालों की खुली लूटपाट और गुंडागर्दी, आबरू और जान भी सलामत नहीं](https://khulizuban.com/current-affairs/a-raw-account-of-open-loot-and-hooliganism-in-private-hospitals-during-pandemic/): – पैनल में शामिल निज़ी अस्पतालों द्वारा नियमों के उल्लंघन और गुंडागर्दी पर कार्रवाई नहीं – पैसों की लूट के साथ-साथ आबरू भी ख़तरे में – मरीजों को जनरल वार्ड में रखकर आईसीयू के चार्ज़ वसूले – मौत के बाद भी अस्पताल करता रहा मरीज़ का इलाज़ – इस देश में मुर्गी चुराने की सज़ा 6 महीने की है पर मरीज़ को मौत के मुंह में धकेलने वाले डॉक्टर क़सूरवार नहीं     निज़ी अस्पतालों में पहले इलाज़ के नाम पर मरीज़ से ठगी व ज़्यादती की घटना ख़बर बन जाती थी, और उस पर जांच व कार्रवाई भी होती थी. मगर … - [जिहाद और विरासत की लड़ाई है फ़िलिस्तीन-इज़रायल विवाद](https://khulizuban.com/jihad-terrorism/palestine-israel-conflict-a-battle-of-jihad-and-inheritance-opinion/): फिलिस्तीन-इज़रायल विवाद को लेकर लोगों की राय पढ़-सुनकर हैरत होती है.हो भी क्यों न, क्योंकि जड़ छोड़कर डालियों की व्याख्या करना दुनिया की पुरानी आदत है. यह यह कब्ज़ के कारण पैदा हुई गैस को शांत करने के चक्कर में कब्ज़ को भुलाकर उसे लाइलाज़ बना देने जैसी प्रवृत्ति है. ऐसा भूलवश हो या जानबूझकर, मगर यह ख़तरनाक मानसिकता है, जिसका खामियाजा दुनिया पहले भी भुगतती रही है और आज भी भुगत रही है. दरअसल, फिलिस्तीनी (फिलिस्तीन और फिलिस्तीनी शब्द अर्थहीन और 12 वीं सदी के ग्रीक लेखकों के दिमाग की उपज हैं) कहे जाने वाले अरब के मुसलमानों और यहूदियों … - [सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर भारी ग़ुलाम मानसिकता का बंगाली खेला](https://khulizuban.com/crime/violence-after-west-bengal-elections-shows-bengali-game-of-slave-mentality-overshadowing-cultural-nationalism-analysis/): पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के परिणामों ने एक ओर जहां बताया कि वहां सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए भूमि उपयोगी नहीं है वहीं, दूसरी ओर ग़ुलाम संस्कृति इतनी असहनशील और आक्रामक है कि किसी बदलाव की आवाज़ को भी बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है. एक पूरज़ोर कोशिश न सिर्फ बेक़ार हो गई, बल्कि उसका भयंकर ख़ामियाज़ा भी बड़ी संख्या में लोगों को भुगतना पड़ा. वहां खेला हो गया.     हिंसात्मक प्रतिक्रिया की झलकियां   पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद, वहां बड़े पैमाने पर लूटपाट, आगजनी, बलात्कार और हत्या की वारदातें हुई हैं. इस के कारण … - [दुनिया को कोरोना की आग में झोंकने वाले मसीहा बन बैठे! जानिए परदे के पीछे का सच](https://khulizuban.com/politics/messianic-attitude-of-those-who-threw-the-world-into-fire-of-corona-claims-tug-of-war-between-chaina-who-and-america-analysis/): जिन्होंने पूरी दुनिया को कोरोना रूपी वैश्विक महामारी की भट्टी में झोंका, लाखों बेगुनाहों की ज़ान ले ली, हजारों लोगों को मौत और ज़िन्दगी के बीच संघर्ष की स्थिति में ला खड़ा किया वे ही अब कोरोना योद्धा की भूमिका में नज़र आ रहे हैं. दर्द देने वाले मरहम लगाने का स्वांग कर मसीहा बन गए हैं. दूसरी तरफ़, बड़े सयाने और ताक़तवर भी मूर्ख और कमज़ोर दिखाई दे रहे हैं. कहीं मेलजोल तो कहीं शह-मात का खेल चल रहा है.     डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस और शी ज़िनपिंग की जोड़ी   कोरोना महामारी के प्रकाश में आने से लेकर उसकी … - [सिनौली: खुदाई में मिला खज़ाना, महाभारत काल के रथ, मुकुट और हथियार](https://khulizuban.com/civilization-culture/asi-found-treasure-in-sinauli-baghpat-during-excavation-including-chariots-crowns-and-weapons-of-mahabharata-period/): उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले की बड़ौत तहसील के गांव सिनौली में जो दुर्लभ पुरावशेष मिले हैं वे भारत के इतिहास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.आईआईटी खड़गपुर और भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों की नई खोज के बाद अब इस दूसरी नई ख़ोज ने वास्तविक प्राचीन भारत को विश्व पटल पर ला खड़ा कर दिया हैं.उसमें हमारे वैज्ञानिकों ने जिस तरह अंग्रेजों के झूठ और उनकी नकली सोच का पर्दाफाश करते हुए ये साबित कर दिया कि सिन्धु घाटी सभ्यता 5500 वर्ष पुरानी नहीं बल्कि 8000 (6000 ईसा पूर्व) वर्ष पुरानी/मिस्र और मेसोपोटामिया से पहले की है,उसी तरह सिनौली में खोज़ … - [Fact Check: सिनौली का सच क्या कांग्रेस सरकार दफ़न कर देना चाहती थी?](https://khulizuban.com/fact-check/did-congress-led-upa-government-want-to-bury-the-truth-about-sinauli-politics-claims-and-facts-analysis/): ऐसे मौक़े भी आये हैं जब कांग्रेस पार्टी और उस की सरकार पर हिंदू विरोधी और देश विरोधी होने के आरोप लगे वह चुप्पी साध गई, और आरोप भी सही साबित हुए. इसी कारण अक्सर इसे मुस्लिम और ईसाई-परस्त पार्टी कहा जाता है. इस श्रृंखला में, विरोधियों को फिर एक अवसर हाथ लग गया है सिनौली में खुदाई के प्रकरण में इसे हिंदू संस्कृति और राष्ट्र-विरोधी बताने का. मगर कांग्रेस इस बार भी चुप है. ऐसे में, इस पर चर्चा  ज़रूरी है. क्या सच में कांग्रेस सरकार सिनौली का सच दफ़न कर देना चाहती थी?     कांग्रेस सरकार,सिनौली व पुरातत्व विभाग … - [रायसेन का सोमेश्वर महादेव मंदिर साल में क्यों सिर्फ एक दिन के लिए खुलता है?](https://khulizuban.com/religion-rituals/why-someshwar-mahadev-temple-of-raisen-opens-for-a-day-only-reasons-politics-faith-and-solution-analysis/): मध्यप्रदेश के रायसेन ज़िले में रायसेन क़िला पहाड़ी स्थित प्राचीन सोमेश्वर महादेव मंदिर साल में सिर्फ एक बार खोला जाता है- महाशिवरात्रि के अवसर पर. तय समय सीमा में श्रद्धालु दर्शन करते हैं, और फिर बंद कर दिया जाता है. यूं कहिये कि साल के 364 दिन यहां ताला लगा होता है. मगर क्यों? किसके आदेश से ऐसा होता है?     रायसेन क़िला पहाड़ी स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर इसका ज़वाब किसी के पास नहीं है.धर्म के स्वयंभू ठेकेदारों और उनकी सरकार के पास भी नहीं. दरअसल, यह एक ऐसा आदेश है जो कहीं कागज़ों में नहीं मिलता है, मगर व्यव्हार में … - [100 करोड़ की उगाही प्रकरण: पटेल और पवार भी हैं शक़ के घेरे में, क्या बदल जायेगा राजनीतिक समीकरण?](https://khulizuban.com/crime/100-crore-extortion-case-sharad-pawar-praful-patel-connection-political-impact/): 100 करोड़ की उगाही प्रकरण में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और पार्टी सुप्रीमो शरद पवार भी शक़ के घेरे में बताए जाते हैं. यह माना जा रहा है कि पहले से कई आरोपों में घिरे इन दोनों नेताओं की नए आरोप से मुसीबत और बढ़ने वाली है. ऐसे में,महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल के साथ राष्ट्रीय राजनीति के प्रभावित होने की भी संभावना है.   प्रफुल्ल पटेल,अनिल देशमुख व शरद पवार   बताया जाता है कि महाविकास अघाड़ी सरकार के गृह मंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख महज़ एक मोहरा हैं,असली खिलाडी दूसरे लोग हैं,जो पर्दे के पीछे सक्रिय हैं. उल्लेखनीय … - [सुशांत केस की तरह मनसुख हिरेन केस भी बिगड़ गया है? मुंबई एटीएस की भूमिका संदेह के घेरे में](https://khulizuban.com/crime/mumbai-ats-in-the-dock-in-mansukh-hiren-case-nia-investigation-underway/): मनसुख हिरेन केस में मुंबई एटीएस की भूमिका पहले ही संदेह के घेरे में थी. उस की हालिया कार्रवाई के ख़िलाफ़ एनआईए की शिक़ायत और कोर्ट की फटकार को देखकर लगता है कि उस ने सुशांत सिंह मामले की तरह मनसुख हिरेन केस को भी बिगाड़ दिया है.   सुशांत सिंह राजपूत एवं मनसुख हिरेन   यह सवाल लाज़िमी है, क्योंकि ताज़ा हालात सुशांत के केस के वक़्त के हालात से काफ़ी मिलते-जुलते हैं.इसमें भी मुंबई पुलिस की भूमिका संदिग्ध नज़र आ रही है.एटीएस द्वारा की जा रही कार्रवाई को ग़ैरज़रूरी और ग़ैरक़ानूनी समझा गया है.यही कारण है कि सेशन कोर्ट … - [बिना ओटीपी नंबर के भी फ्रॉड मुमक़िन है!](https://khulizuban.com/crime/fraud-is-possible-even-without-otp-number-know-new-tricks-of-scammers-in-digital-world/): धोखे से ओटीपी नंबर हासिल कर किसी के खाते से पैसे उड़ा लेने की घटनाएं तो अपने बहुत सुनी होगीं लेकिन क्या आपको मालूम है कि ओटीपी नंबर पूछे बिना भी किसी का बैंक एकाउंट ख़ाली हो गया? जी हां,ये मुमकिन है.एक नहीं ऐसी कई वारदातें सामने आ चुकी हैं जिनमें साइबर अपराधियों ने एप और ओटीपी नंबर पूछे बिना ही कईयों की गाढ़ी कमाई लूट ली. कुछ शहरों में ऐसे अपराधी धरे भी गए हैं,ट्राई और बैंकिंग संस्थानों के द्वारा इस बाबत लगातार सुरक्षात्मक क़दम उठाए जा रहे हैं लेकिन,घटनाएं कम होने की बजाय बढती ही जा रही है.   … - [क़ुरान की 26 आयतों को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, बताया अमन और भाईचारे के ख़िलाफ़](https://khulizuban.com/law-court/petiotion-in-supreme-court-of-india-seeking-removal-of-26-verses-from-quran-terming-against-peace-and-harmony/): क़ुरान मुसलमानों का सबसे पवित्र ग्रंथ है.मान्यता के अनुसार, इसमें लिखी बातें ख़ुदा के वही आदेश और इच्छाएं हैं जो स्वयं उसने देवदूत ज़िब्राइल के ज़रिए हज़रत मोहम्मद को पहली बार सुनाई थी.   यह महज़ एक क़िताब नहीं, मुस्लिम धर्म की नीँव है.इस में 6,666 आयतें हैं, जिन्हें अमन, मोहब्बत और भाईचारे का संदेश कहा जाता है.आसमानी क़िताब की दुनियावी बातें.   मगर क़ुरान और उसकी आयतों को लेकर आलोचनाएं भी बहुत होती हैं.क़ुरान की सबसे आम आलोचना पहले से मौज़ूद उन स्रोतों को लेकर है जिन पर क़ुरान आधारित है, क़ुरान के आन्तरिक विरोधाभास, इसकी अस्पष्टता और नीति संबंधी … - [ईसा मसीह की वंशावली पर मतभेद क्यों? कौन क्या कहता है जानिए](https://khulizuban.com/christianity/jesus-genealogy-differences-analysis/): बाइबल में मत्ती और लूका के सुसमाचारों में दी गई ईसा मसीह की वंशावली में पूर्वजों के नाम, पीढियों की संख्या और दादा के नाम तक में गहरा अंतर्विरोध नजर आता है. यीशु को राजा दाउद का वंशज और मसीहा साबित करने और इस गंभीर मतभेद को सुलझाने के लिए जहाँ धार्मिक संस्थाएँ 'नियोग विवाह' और 'माता के पक्ष की वंशावली' जैसे पारंपरिक तर्क देती हैं, वहीं आधुनिक पंथनिरपेक्ष इतिहासकार इसे पहली सदी का एक धार्मिक-राजनीतिक नैरेटिव मानते हैं. आस्था के दावों और ऐतिहासिक तथ्यों के इस टकराव का एक निष्पक्ष और तार्किक विश्लेषण पढ़ें. - [ईसा मसीह के दादा कौन थे? कौन क्या कहता है जानिए](https://khulizuban.com/christianity/who-was-jesus-grandfather-analysis/): ईसा मसीह की माता मरियम और पिता जोसफ थे. लेकिन जोसफ के पिता यानी ईसा मसीह के दादा कौन थे? क्या आप जानते हैं कि ईसाइयत की पवित्र पुस्तक बाइबल में ही यीशु की वंशावली, यानी उनके पूर्वजों के नाम और संख्या को लेकर बड़े अंतर्विरोध हैं? आखिर क्यों विद्वान भी इस एक नाम को लेकर भ्रमित हो जाते हैं? इस धार्मिक और ऐतिहासिक रहस्य से पर्दा उठाता एक गहरा विश्लेषण. - [नीरव मोदी के प्रत्यर्पण पर फ़ैसला भारत की बड़ी जीत](https://khulizuban.com/law-court/london-courts-decision-in-nirav-modi-extradition-case-a-major-victory-for-india/): पीएनबी (पंजाब नेशनल बैंक) में अपने मामा मेहुल चौकसी के साथ मिलकर 14 हज़ार करोड़ रूपये से ज्यादा का घोटाला करने वाले हीरा क़ारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले में भारत को एक बड़ी जीत मिली है.भारत के भगोड़े नीरव मोदी को लंदन की एक अदालत ने तगड़ा झटका देते हुए उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है.कोर्ट ने भारत में न्याय नहीं मिलने और सेहत के आधार पर नीरव मोदी की दलीलों को सिरे से खारिज़ कर कर दिया.अदालत ने माना कि भारत में नीरव मोदी की कई मामलों में ज़वाबदेही है और यह तभी संभव है जब वह … - [लाल क़िले पर तिरंगे का अपमान सुनियोजित था !](https://khulizuban.com/crime/insult-of-the-national-flag-at-red-fort-conspiracy-of-anti-nationals-and-responsibility-of-government-analysis/): गत 26 जनवरी को दिल्ली में लाल क़िले पर तिरंगे के अपमान की घटना आज़ाद भारत के इतिहास की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी जिसे काला दिवस के रूप में जाना जाएगा.इसपर लानत मलानत के साथ सर्वत्र मंथन और चर्चा भी ज़ोरों पर है.ज़ारी बहस में बुद्धिजीवियों-विचारकों और मीडिया के तरह-तरह के दावे और निष्कर्ष पढ़ने-सुनने को मिल रहे हैं.कोई ख़ुफ़िया तंत्र और सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है,घटना को कुछ उपद्रवी तत्वों की शरारत बता रहा है तो कोई उसे किसान,विपक्ष और सिख अलगाववादियों के गठजोड़ का परिणाम बता रहा है.लेकिन,एक बात जो सबसे अहम है,वो ये है कि … - [जिगोलो मार्केट (Gigolo Market): बढ़ता ही जा रहा है मर्दों के जिस्म का कारोबार! जानिए कहां-कहां लगती है बोली](https://khulizuban.com/society-lifestyle/gigolo-market-male-flesh-trade-bidding/): भारत के आधुनिक कहे जाने वाले समाज में आज जिगोलो कोई नया नाम नहीं है. इसका बाक़ायदा एक बाज़ार है, जो जिगोलो मार्केट के नाम से कुख्यात है. इस मार्केट में मर्दों के जिस्म का कारोबार होता है, जो बढ़ता ही जा रहा है- महानगरों से छोटे शहरों तक पहुँच गया है और वहाँ भी अपनी जड़ें जमा रहा है. रात के अंधेरे में यहाँ मर्दों की बोली लगती है. यह लेख वास्तव में कुछ निजी संस्थानों द्वारा किये गए सर्वेक्षणों और एक जिगोलो से की गई बातचीत या वास्तविक इंटरव्यू पर आधारित एक खोजी ग्राउंड रिपोर्ट है, जो आपको चौंका देगा, मगर हक़ीक़त से रूबरू कराएगा. - [पश्चिम बंगाल को मुग़लिस्तान बनाने की साज़िश: जानिए कैसे काम कर रहा है देशी-विदेशी ताक़तों का गठजोड़](https://khulizuban.com/politics/conspiracy-to-turn-west-bengal-into-mughlistan-is-underway-and-a-nexus-of-domestic-and-foreign-powers-is-working-together/): पश्चिम बंगाल में अराजकता का माहौल है.वहां हिंसा व रक्तपात ज़ारी है.शायद ही कोई दिन ऐसा बीतता हो जब वहां होने वाली हिंसक झडपें मीडिया की सुर्खियाँ न बनती हों.वज़ह क्या है? क्यों बन गए हैं ऐसे हालात? कुछ विचारक इसे राजनीतिक वैमनस्य और प्रतिद्वंदिता से जोड़कर देखते हैं तो कुछ इसे इस्लाम के प्रसार के तौर पर मानते हैं और दलीलें देते हैं.जो भी हो लेकिन एक बात साफ़ है कि वहां कुछ भी ठीक-ठाक नहीं है और जिधर भी नज़र घुमाओ बर्बादी के ही मंज़र दिखाई देते हैं.अल्पसंख्यक का दर्ज़ा प्राप्त मुसलमान बहुसंख्यक होते जा रहे हैं और बहुसंख्यक … - [खतरे में क्यों है हिन्दू धर्म?](https://khulizuban.com/religion-rituals/why-hindu-religion-in-danger/): कभी विश्वगुरु कहलाने वाला हिन्दू धर्म आज खतरे में है. दुनिया में हिन्दू अब मात्र 13.95% रह गए हैं, भारत में 85% से घटकर 79% रह गए हैं और 8 राज्यों में तो पहले ही ये अल्पसंख्यक हो चुके हैं. राष्ट्रविहीन होने, घटती जन्म दर, अत्यधिक सहिष्णुता और आंतरिक फूट के कारण क्या अगली सदी में हिन्दू धर्म का नामलेवा भी बचेगा? सच्चाई जानने के लिए पढ़ें यह लेख. - [डीडीसी चुनाव परिणाम के असल मायने क्या हैं जानिए](https://khulizuban.com/election-poll/impact-of-ddc-election-2020-results-on-kashmir-valley-discussion/): जम्मू-कश्मीर के डीडीसी चुनाव परिणामों के मद्देनज़र जानकारों की राय अलग-अलग है. कोई कहता है कि यह लोकतंत्र की जीत है, तो कोई इसे भ्रष्टाचार और अलगाववाद की वापसी बता रहा है. कुछ विशेषज्ञ मिश्रित प्रभाव की बात कह रहे हैं. अलग-अलग दावे और तर्क हैं. ऐसे में, वास्तविकता क्या है, क्या हैं इसके असल मायने, यह जानना आवश्यक है. डीडीसी चुनाव परिणाम का सांकेतिक चित्र लोकतंत्र की जीत  जम्मू-कश्मीर मामलों के जानकारों में कईयों का ये मानना है कि डीडीसी चुनाव दरअसल लोकतंत्र की जीत है.उनके मुताबिक, ये वही सूबा है जहाँ हमें पाकिस्तान और आईएसआईएस के झंडे तले कश्मीरी … - [जम्मू-कश्मीर के डीडीसी चुनाव परिणाम](https://khulizuban.com/election-poll/jammu-and-kashmir-ddc-election-results-2020-statistics-and-importance/): जम्मू-कश्मीर में डीडीसी (डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउन्सिल) यानि जिला विकास परिषद के चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं.इसमें एक तरफ़ स्थानीय दलों के गुपकार गठबंधन ने बेहतर प्रदर्शन किया है तो दूसरी तरफ़ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.वहीं निर्दलीय तीसरी बड़ी ताक़त बनकर किंगमेकर की भूमिका में हैं. जम्मू-कश्मीर में डीडीसी चुनाव परिणाम उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर का ये डीडीसी चुनाव अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद पहला और ऐतिहासिक चुनाव था,जिसपर देश और दुनिया की निगाहें टिकी हुई थीं.अशांति और हिंसा फ़ैलाने की पूरज़ोर कोशिशों के बावज़ूद मतदान प्रक्रिया निर्बाध रूप से संपन्न हुई और अवाम ने जम्हूरियत … - [अमिताभ बच्चन के असली पिता कौन थे? जानिए तेजी बच्चन और जवाहरलाल नेहरू के रिश्ते का पूरा सच](https://khulizuban.com/fact-check/amitabh-bachchan-real-father-teji-bachchan-jawaharlal-nehru-relationship/): सदी के महानायक और 'बिग बी' कहे जाने वाले बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन का विवादों से पुराना नाता है. सबसे बड़ा विवाद उनके असली पिता को लेकर है. लोग अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि अमिताभ बच्चन के असली पिता कौन थे- कवि हरिवंशराय बच्चन या पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू? इस सन्दर्भ में अमिताभ की मां तेजी बच्चन और नेहरू के करीबी रिश्तों की चर्चा तो बहुत पहले से गर्म थी, अब नेहरू और अमिताभ के डीएनए मिलान (DNA Match) के दावे ने मामले को सनसनीखेज बना दिया है. फिर भी, बच्चन परिवार मौन है. उधर, गांधी-नेहरू परिवार भी चुप्पी साधे हुए है. ऐसे में, सच की पड़ताल ज़रूरी है. इस लेख में फैक्ट चेक के जरिये जानिए आखिर यह सब महज अफ़वाह है या सच- जो सोना होगा वह आग में तपकर और कुंदन हो जायेगा. - [जानिए कैसे होती है उम्मीदवारों की ज़मानत ज़ब्त](https://khulizuban.com/election-poll/how-security-deposits-of-candidate-are-forfeited-know-election-rule-in-india/): चुनाव में हारा हुआ उम्मीदवार,जो किसी निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए कुल वैध मतों की संख्या के ‘छठे हिस्से‘ से ज्यादा मत हासिल करने में यदि नाक़ाम हो जाता है तो उसकी ‘ज़मानत राशि‘ ज़ब्त हो जाती है.इसे ‘ज़मानत ज़ब्त होना‘ कहते हैं.पंचायत से लेकर लोकसभा तक के चुनावों में यही संविधानिक प्रक्रिया समान रूप से लागू है जबकि ज़मानत की राशि अलग-अलग निर्धारित की गई है. ज़मानत रक़म ज़मा कराने जाते नेता  ग़ौरतलब है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में चुनाव त्यौहार सरीखे होते हैं जिनकी व्यवस्था एवं कार्यान्वयन का सारा दारोमदार चुनाव आयोग पर होता है.जीत-हार के … - [चुनाव जीते लेकिन ज़मानत जब्त हुई!](https://khulizuban.com/election-poll/candidate-won-but-deposit-was-forfeited-precedent-in-indian-electoral-history/): चुनावों में किसी उम्मीदवार के हारने के बाद उसकी ज़मानत ज़ब्त होने की चर्चा आम है, लेकिन जीतने के बाद भी उस की ज़मानत ज़ब्त हुई हो, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं. यह आश्चर्यजनक है, अविश्वसनीय-सा है, लेकिन सच है. ऐसा हुआ है- एक बार नहीं, दो बार. भारत निर्वाचन आयोग  विदित हो कि भारत के चुनावी इतिहास में ऐसे दो उदाहरण मौज़ूद हैं जिनमें हमारे जनप्रतिनिधित्व क़ानून की मान्यताओं के विपरीत चुनाव जीत चुके उम्मीदवार की ज़मानत भी ज़ब्त हुई.ऐसा क्यों हुआ,एक बड़ा सवाल तो है ही  मगर इससे भी बड़ी विचित्र बात ये है कि इसका ज़वाब … - ['3 एम फैक्टर' ने पलट दी बिहार में बाज़ी](https://khulizuban.com/election-poll/3-m-factor-turned-the-tables-in-bihar-assembly-elections-2020/): पीएम मोदी की अगुआई में हुए प्रचार के दम पर बिहार में भाजपा ऐतिहासिक संख्या हासिल कर सकी है.साथ ही, राजग गठबंधन की इस ऐतिहासिक जीत के लिए तीन ‘एम फैक्टर’ सामने आए हैं जिनके बल पर फ़िर से सत्ता में उसकी वापसी व नीतिश कुमार की बेहद कठिन लगने वाली ताज़पोशी फ़िर से संभव हो सकी है. बिहार में मोदी की लोकप्रियता और नीतिश का वज़ूद बरक़रार  बिहार में एक बार फ़िर जीत के बाद राजग ने सत्ता हासिल कर ली तथा नीतिश कुमार सातवीं बार मुख्यमंत्री बन गए हैं.वहीं राजद के तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन बहुमत का … - [बिहार विधानसभा चुनाव 2020](https://khulizuban.com/election-poll/bihar-assembly-elections-2020-process-results-statistics/): बिहार विधानसभा चुनाव, 2020 में विधानसभा(निचले सदन) की सभी 243 सीटों के लिए चुनाव आयोजित किए गए.तीन चरणों में हुए मतदान के परिणाम गत 10 नवम्बर को चुनाव आयोग द्वारा घोषित किए गए जिसमें फ़िर एक बार भाजपा-जदयू के गठबंधन राजग को बहुमत प्राप्त हुआ.यह जैसे बिहार की सियासी पिच पर टी-20 की तर्ज़ पर सांस रोक देने वाले मुक़ाबले में मतदाताओं ने तेजस्वी यादव के युवा नेतृत्व वाले विपक्षी महागठबंधन की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की अगुआई वाले एनडीए (राजग)) के अनुभवी नेतृत्व को वरीयता दी.ये सत्ता-बिरोधी लहर और जंगल राज के पुनरागमन के डर के … - [साईं बाबा की असलियत जानिए](https://khulizuban.com/baba-bazar/was-sai-baba-of-shirdi-hindu-saint-muslim-faqir-or-something-else-know-the-reality-expained/): साईं बाबा को मानते तो बहुत लोग हैं, पर जानते बहुत कम ही हैं. इस कारण भ्रम की स्थिति है, और विवाद भी है जो ठीक नहीं है. इसलिए उनका सही परिचय, या असलियत को सब के सामने रखना ज़रूरी है. - [साईं बाबा की पहचान बदलने की कोशिश: भक्त कर रहे हैं बड़ा खेला!](https://khulizuban.com/baba-bazar/baba-bazar-business-a-big-game-is-being-played-to-change-the-identity-of-sai-baba-of-shirdi-conspiracy-analysis/): सिर पर कफ़नी थी और ‘अल्लाह मालिक़‘ सदा उसके होंठों पर था. ‘मैं निम्न जाति का एक यवन हूँ’- ऐसा उसने स्वयं बतलाया. गंगाजल, व्रत, उपवास तथा पूजा-पाठ आदि उसके लिए झंझट (बेक़ार) के विषय थे. मांसाहार का सेवन वह ख़ुद तो करता ही था उसे प्रसादस्वरूप भक्तों में भी बाँट दिया करता था. कुत्ते भी पराए ना थे. वे भी उसकी थाली में साथ-साथ खाया करते थे.      इन पंक्तियों की रौशनी में उस व्यक्तित्व को जाना जा सकता है जिसे ‘शिर्डी के साईं बाबा’ के नाम से जाना जाता है. पंक्तियां भी उस पुस्तक से उद्धृत हैं, जिसे कथित या … - [मंदिरों में साईं बाबा की मूर्ति की स्थापना के पीछे सोच क्या है जानिए](https://khulizuban.com/baba-bazar/thought-behind-sai-baba-idol-temples-analysis/): शिरडी के साईं की कोई सदियों पुरानी परम्परा नहीं है. न तो वह कहीं पुराणों में दर्ज़ हैं और नहीं रावण का वध कर असत्य पर सत्य की विजय के ही प्रतीक हैं- राम की तरह. उल्टे वे शिरडी के ही एक सड़कछाप पहलवान मोहिद्दीन तम्बोली से अखाड़े में पटखनी खाकर ऐसे धूलधूसरित हुए जैसे गली के गुंडे के हाथों पिटे हों. कृष्ण की तरह महाभारत के सूत्रधार बनकर गीता का ज्ञान देने के बजाय साईं बाबा मटन और बिरयानी के प्रसाद के साथ चिलम फूंककर वातावरण धुआं-धुआं करते रहे. वे राजपाट से मुंह मोड़कर वे सत्य की ख़ोज में नहीं … - [साईं बाबा अफ़ग़ानिस्तान के पिंडारी लुटेरे थे?](https://khulizuban.com/baba-bazar/was-sai-baba-an-afghan-pindari-bandit-muslim-or-hindu-dispute-claims-and-facts-analysis/): कोई स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण न होने के कारण साईं विरोधियों के दावे साईं सच्चरित्र में दर्ज़ कहानियों की ही तरह काल्पनिक लगते हैं.मगर, ये सच के बहुत क़रीब हैं.शोध हो, तो तार से तार जुड़ते चले जाएंगें. - [दलबदल क़ानून पर क़ानूनी किचकिच](https://khulizuban.com/law-court/legal-wrangling-over-anti-defection-law-political-parties-and-election-commission-analysis/): – विधानसभा के बाहर राजनीतिक गतिविधि पर विधानसभाध्यक्ष नहीं भेज सकता नोटिस  – अयोग्यता मामले में चुनाव आयोग की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति/राज्यपाल को हो निर्णय का अधिकार  -सभी के लिए एकसमान क़ानून की ज़रूरत  -एक नैतिक राजनीति की एक लोकप्रिय अभिव्यक्ति की आवश्यकता  पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड,कर्नाटक और फ़िर राजस्थान में दलबदल को लेकर पैदा हुए राजनीतिक संकट को देखकर अतिमहत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक दलबदल क़ानून की प्रासंगिकता पर सवाल उठना लाज़िमी है.एक ओर जहाँ इस क़ानून की आड़ में राजनीतिक दलों के कुछ प्रभावशाली लोग पार्टी में तानाशाही क़ायम  किए हुए हैं, वही कुछ चालाक नेता इसकी कुछ क़मज़ोर कड़ियों का फ़ायदा उठाकर खुलेआम … - [लोकसभा चुनाव 2019](https://khulizuban.com/election-poll/lok-sabha-elections-2019-process-results-and-statistics/): 2019 का लोकसभा चुनाव देशभर में पिछले 11 अप्रैल से लेकर 19 मई के बीच सात चरणों में आयोजित हुआ.दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की सत्रहवीं लोकसभा के गठन के लिए संपन्न ये आम चुनाव दुनिया का सबसे महंगा चुनाव था जिसमें हिमालय की तराई से लेकर दक्षिण के समुद्री तट तक करोड़ों लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.देश का वर्तमान बदलने और भविष्य की पटकथा लिखने वाला ये महापर्व दरअसल,पिछले प्रयोग से भी बड़ा अथवा एक महाप्रयोग था. लोकसभा चुनाव देश का महापर्व  जैसा कि हम जानते हैं कि चुनाव को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण घटकों में से सबसे महत्वपूर्ण … - [भारत की भू-राजनीतिक समस्याएं : नेहरू की गलती या कुछ और?](https://khulizuban.com/politics/nehru-india-geopolitical-problems-mistake-or-conspiracy-analysis/): आजादी के ठीक पहले और उसके बाद भारत के सामने उठ खड़ी हुई कई भू-राजनीतिक समस्याएं नेहरू की महज रणनीतिक भूल थी या कुछ और? यह लेख बंटवारे, पाकिस्तान और कश्मीर मामले से लेकर 1962 के भारत-चीन युद्ध तक के ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक निर्णयों की समीक्षा प्रस्तुत करता है, जिसने न सिर्फ भारत के तत्कालीन स्वरुप को बदल दिया, बल्कि इसके भविष्य को भी कांटों भरी राह में धकेल दिया. जानिए बलोचिस्तान और नेपाल के विलय को लेकर गलत निर्णय और कोको आइलैंड तथा काबू वैली की बंदरबांट वाली अजीबोगरीब सोच के बारे में. - [नेहरू की राह पर चल रहे हैं ओली?](https://khulizuban.com/politics/is-oli-following-nehru-similarities-in-their-temperament-and-policies-in-nepal-india-analysis/): नेपाल में बिगड़ रहे हालात और राजनितिक उथल-पुथल के केंद्र में वहां के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की छवि ख़राब हो चुकी है और वे एक जननायक की जगह ख़लनायक की भूमिका में नज़र आ रहे हैं. जनता में भारी रोष है. उनकी ख़ुद की पार्टी उनसे इस्तीफ़ा मांग रही है, लेकिन वास्तविकता समझने की बज़ाय वे अपने रुख़ पर क़ायम हैं, जैसे किसी और ही दुनिया में जी रहे हों; तथा पद पर बने रहने के लिए पार्टी के विभाजन के लिए भी तैयार हैं. पाकिस्तान की तर्ज़ पर नेपाल में भी वे तानाशाही स्थापित करने पर आमादा हैं, और … - [ईसाइयत का प्रचार- रिलीजन का विस्तार या अस्तित्व बचाने की कवायद?](https://khulizuban.com/christianity/propagation-of-christianity-expansion-or-survival/): क्या ईसाइयत का प्रचार वास्तव में रिलीजन का विस्तार है या फिर पश्चिमी देशों में घटते प्रभाव के बीच अपना अस्तित्व बचाने की एक सोची-समझी व्यावसायिक कवायद? जानिए दुनिया भर में बदलते ईसाइयों के आंकड़ों, बाइबल के परस्पर विरोधी प्रसंगों- ईसा मसीह की वंशावली के मतभेद, पुनरागमन और मिशनरियों के प्रचार तंत्र का पूरा सच- निष्पक्ष विश्लेषण. - [राज्यों में क्यों नहीं चल रहा है मोदी का जादू?](https://khulizuban.com/current-affairs/is-modi-magic-not-working-in-the-states-parliamentary-versus-assembly-elections-analysis/): केंद्र में मोदी सरकार की ये दूसरी पारी है और वो भी प्रचंड बहुमत से.इसे पहली पारी का विस्तार कह सकते हैं.देश की जनता जहाँ एक ओर सरकार द्वारा किये गए कार्यों से संतुष्ट दिखाई देती है वहीँ मोदी के हाथों भविष्य के प्रति आश्वस्त नज़र आती है.उसने राष्ट्रीय मुद्दों और विकासवादी नीतियों पर भरोसा कर दिल खोलकर समर्थन किया है जो अब भी जारी है.केंद्र में मोदी का जलवा बरक़रार है मगर पिछले कुछ वक़्त से राज्यों में मिज़ाज़ कुछ बदला-बदला सा नज़र आ रहा है.वहां जनता में मोदी का असर घटता प्रतीत हो रहा है और लगता है मोदी … - [क्या वाकई धरती पर आये थे ईसा मसीह? जानिए पहली सदी के गैर-ईसाई दस्तावेजों में मिलावट का सच](https://khulizuban.com/christianity/did-jesus-christ-really-exist/): क्या ईसा मसीह वाकई इतिहास के एक वास्तविक पुरुष थे या महज एक साहित्यिक कल्पना? आस्था के चश्मे को हटाकर जब आधुनिक पंथनिरपेक्ष इतिहासकार पहली सदी के रोमन और यहूदी दस्तावेजों को खंगालते हैं, तो चर्च की सदियों पुरानी 'साहित्यिक हेराफेरी' (Interpolations) के चौंकाने वाले मामले सामने आते हैं. बार्ट एरमैन और रिचर्ड कैरियर जैसे विश्वप्रसिद्ध समीक्षकों के तर्कों के साथ पढ़िए फ्लावियस जोसिफस और टैसिटस के ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स का फॉरेंसिक विश्लेषण. - [आरक्षण व्यवस्था: क्या 'अयोग्य' बना सकते हैं भारत को विकसित राष्ट्र?](https://khulizuban.com/politics/reservation-system-unqualified-vs-developed-nation/): आरक्षण व्यवस्था की शुरुआत अस्थायी उपाय के रूप में हुई थी. लेकिन, सात दशक बाद भी यह जारी है और योग्यता, कौशल तथा सामाजिक एकता पर गंभीर असर डाल रही है. जब कम अंकों वाले अभ्यर्थी उच्च शिक्षा में और महत्वपूर्ण पदों पर पहुँचते हैं, तो सवाल उठता है- क्या अयोग्य भारत को विकसित राष्ट्र बना सकते हैं? इस आलेख में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान समस्याएँ और सही विकल्प पर विस्तार से चर्चा की गई है. - [न्याय व्यवस्था की दोहरी तस्वीर: विचाराधीन अंदर, सजायाफ्ता बाहर- जानिए कारण और समाधान](https://khulizuban.com/law-court/justice-system-dual-face-undertrials-inside-convicts-outside/): भारतीय न्याय व्यवस्था में एक गहरी असमानता दिखाई देती है- विचाराधीन सालों तक जेल में पड़े रहते हैं, जबकि कई सजायाफ्ता प्रभावशाली लोग लंबे समय तक बाहर स्वतंत्र जीवन जीते हैं. आंकड़े, हाई-प्रोफाइल उदाहरण, कारण और व्यावहारिक समाधान के साथ इस दोहरी तस्वीर की निष्पक्ष पड़ताल, जो कानून में भेदभाव पर सवाल उठाती है. - [बलोचिस्तान का दर्द: आजादी की मांग- क्यों और कैसे?](https://khulizuban.com/politics/balochistan-pain-demand-for-freedom/): प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध बलोचिस्तान आज अंतहीन दमन, जबरन गुमशुदगी और अपने ही वजूद पर मंडराते खतरों से जूझ रहा है. 11 अगस्त 1947 की आजादी से लेकर 27 मार्च 1948 के सैन्य कब्जे, और जवाहरलाल नेहरू के रुख से लेकर हिंगलाज माता के प्रांगण में गूँजती बलोच बेटियों की पुकार तक- यह आलेख बलोच आजादी के संघर्ष के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भू-राजनीतिक परतों का एक प्रामाणिक व हृदयस्पर्शी विश्लेषण प्रस्तुत करता है. - [ब्रह्मांड और फ्रीक्वेंसी का खेल: क्या आपका दिमाग रेडियो ट्यूनर की तरह काम करता है?](https://khulizuban.com/religion-rituals/universe-and-frequency-play-mind-as-radio-tuner/): 'यत पिंडे तत ब्रह्मांडे' - जो इस अनंत ब्रह्मांड में है, वही हमारे इस सूक्ष्म शरीर में भी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके विचार और भावनाएं किस फ्रीक्वेंसी पर काम कर रही हैं? इस लेख में जानिए आध्यात्म, क्वांटम फिजिक्स और न्यूरोसाइंस के उस सच को, जो आपके दिमाग को सकारात्मक ऊर्जा के साथ ट्यून करने का व्यावहारिक रास्ता दिखाता है. - [शुगर डैडी और शुगर मॉम क्या होते हैं? रिश्तों के नए कल्चर का सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी विश्लेषण](https://khulizuban.com/society-lifestyle/sugar-daddy-and-sugar-mom-culture-analysis/): इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में शुगर डेटिंग का चलन पैर पसार रहा है. लेकिन चकाचौंध से भरे इस कल्चर पर चढ़ी शुगर की मीठी परत को हटाते ही एक कड़वी हक़ीक़त सामने आती है. इस आलेख में गहराई और विस्तार से जानिए- शुगर डैडी और शुगर मॉम क्या होते हैं? यह रिश्ता कैसे काम करता है और इसके पीछे छिपे गंभीर सामाजिक प्रदूषण, मानसिक अवसाद, कानूनी जोखिमों और ख़तरनाक ऑनलाइन स्कैम का कड़वा और पूरा सच क्या है. - [शादीशुदा जोड़ों में वाइफ स्वैपिंग (Wife Swapping): शहरों से गांवों तक- सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी आयाम](https://khulizuban.com/society-lifestyle/wife-swapping-india-cities-to-villages-psychological-social-legal/): भारतीय परंपरा में विवाह सात जन्मों का एक पवित्र संस्कार (Sacrament) है, लेकिन आधुनिकता और उपभोक्तावादी संस्कृति की आड़ में पनप रही वाइफ स्वैपिंग (Wife Swapping) यानी पत्नियों की अदला-बदली जैसी विकृतियाँ इस पावन पारिवारिक नींव पर गहरा आघात कर रही हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया के गुप्त नेटवर्क (Confidential Groups) के माध्यम से यह सामाजिक प्रदूषण अब महानगरों से निकलकर भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों तक पैर पसार चुका है. यह आलेख इस अदृश्य महामारी के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी आयामों के साथ-साथ व्यभिचार कानून (Adultery Law) के अंत से उपजे कानूनी विरोधाभाषों का एक प्रामाणिक और निष्पक्ष समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है. - [क्या महिलाओं को योनि से अधिक गुदा मैथुन में आनंद आता है? जानिए क्या कहता है पारंपरिक और अधुनिक ज्ञान-विज्ञान](https://khulizuban.com/health-education/women-anal-vs-vaginal-sex-pleasure-traditional-modern-science/): क्या सचमुच महिलाओं को योनि से अधिक गुदा मैथुन में आनंद आता है? विकिपीडिया (Wikipedia) जैसे खुले मंचों पर तैरते इस सनसनीखेज दावे की हवा यहाँ महर्षि वात्सयायन के कामसूत्र से लेकर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (Anatomy) के अकाट्य तथ्य निकाल रहे हैं. जानिए महिलाओं के पेल्विक नर्व नेटवर्क (Pelvic Nerve Network), क्लिटोरिस (Clitoris) के छिपे हुए सच और इंडियाना यूनिवर्सिटी के 3,000 से अधिक महिलाओं पर किये गए वैश्विक शोध के वो चौंकाने वाले आंकड़े, जो इस भ्रामक मिथक को पूरी तरह खारिज़ करते हैं. भाषा की पूर्ण गरिमा और वैज्ञानिकता के साथ इस वर्जित (Taboo) विषय का स्पष्ट और संतुलित सच. - [न्यायपालिका में भ्रष्टाचार: उम्मीद का आख़िरी दरवाजा भी दीमकों की चपेट में! जानें समस्या और समाधान](https://khulizuban.com/law-court/corruption-in-judiciary-problems-and-solutuins/): यह आलेख न्यायपालिका में भ्रष्टाचार (Corruption in Judiciary) के विभिन्न आयामों का एक प्रामाणिक लेखा-जोखा है. इसमें बताया गया है कि कैसे न्यायपालिका जो हमेशा से उम्मीद का आख़िरी दरवाजा रही है उसपर निचली अदालतों की मनमर्जी और तारीख पर तारीख के अंतहीन दुश्चक्र के चलते आम आदमी का भरोसा कम हुआ है. यह विश्लेषण अपने फ़ायदे के लिए कुछ कॉर्पोरेट घरानों द्वारा अदालत से विकास कार्यों पर 'स्टे' लेने के खेल और कॉलेजियम प्रणाली में छिपे भाई-भतीजावाद को बेबाकी से उजागर करता है. साथ ही, यह भाषाई दीवारों और वकीलों के सिंडिकेट- बेईमानों के जमघट- और आलोचना के प्रति न्यायपालिका की असहिष्णुता को आईना दिखाते हुए लोकतंत्र की शुचिता बनाये रखने के लिए कुछ व्यावहारिक समाधानों के रूप में 'आशा की किरण भी प्रस्तुत करता है. - [कोचिंग माफिया: शिक्षा का काला साम्राज्य और छात्रों के सपनों का सौदा](https://khulizuban.com/crime/coaching-mafia-dark-empire-education-dreams/): क्या देश में शिक्षा अब ज्ञान का माध्यम न रहकर धंधा बन चुकी है? डमी स्कूलों के ₹20 हज़ार के दलाली नेटवर्क से लेकर सोशल मीडिया के 'प्राइवेट माफिया' ग्रूप तक फैला यह एक ऐसा काला साम्राज्य है जो हर साल ₹58,000 करोड़ का व्यापार कर रहा है. एक तरफ़ करोड़ों के चमचमाते विज्ञापन हैं, तो दूसरी तरफ़ हैं कोटा में टूटती मासूमों की सांसे और लीक होते पेपर. देश के 7 करोड़ से अधिक छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस शिक्षा सिंडिकेट- कोचिंग माफिया का एक ऐसा खौफनाक और खोजी सच जो हर माता-पिता और नीति-निर्माता को जानना चाहिए. - [जनसंख्या नियंत्रण: भारत में आवश्यकता- क्यों और कैसे?](https://khulizuban.com/politics/population-control-in-india-why-and-how/): भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन चुका है. 'बढ़ती आबादी और सिकुड़ते संसाधनों' के बीच क्या देश को एक ठोस कानून की आवश्यकता है? जानिए क्यों राजीनीतिक हिचकिचाहट तुष्टिकरण और ढुलमुल नीति से परे, भारत के लिए जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) अब एक राष्ट्रीय अनिवार्यता बन गया है. - [नाभि क्या है? नाभि के प्रकार और पुरुषों की नाभि के शुभ-अशुभ संकेत](https://khulizuban.com/religion-rituals/what-is-navel-types-auspicious-inauspicious-signs-for-men/): कहते हैं कि जो बातें व्यक्ति के चेहरे, चाल-ढाल और रहन से भी उजागर नहीं हो पाती हैं, वे नाभि से जानी जा सकती हैं. नाभि का अध्ययन कुंडली पढ़ने जैसा होता है. इन्हीं विशेषताओं के कारण नाभि को बृहत् संहिता, सामुद्रिक शास्त्र और गरुड़ पुराण में केवल एक निशान नहीं, बल्कि मनुष्य के पूरे अस्तित्व और भाग्य का दर्पण माना गया है. यह लेख इसी गूढ़ विद्या के रहस्यों को खोलते हुए स्पष्ट करता है कि अलग-अलग प्रकार की नाभि, विशेषकर पुरुषों की नाभि उनके स्वास्थ्य, व्यक्तित्व और भविष्य के क्या सटीक संकेत देती है. - [क्या न्यूटन ने इनफिनिटी सीरीज चुराई थी? केरल के स्कूल की उपलब्धि- सीके राजू का बड़ा खुलासा](https://khulizuban.com/history/newton-stole-infinity-series-kerala-school-ck-raju-revelation/): क्या न्यूटन ने इनफिनिटी सीरीज चुराई थी? जिसे दुनिया सदियों तक पश्चिमी दिमाग का चमत्कार मानती रही वह दरअसल, केरल के स्कूल की वह उपलब्धि थी जिसे पुर्तगाली मिशनरियों-जेसुइट पादरियों के ज़रिए यूरोप पहुंचाया गया. चार्ल्स एम विश की रिपोर्ट, प्रोफ़ेसर सी. के. राजू के शोध और मैनचेस्टर युनिवर्सिटी की 2007 की ऐतिहासिक स्वीकारोक्ति के आधार पर इस 'बौद्धिक तस्करी' का पूरा सच. न्यूटन से 250 साल पहले ही भारत अनंत (infinity) को नाप चुका था; पश्चिम ने केवल उसे अपना नाम दिया. जानिए कैसे इतिहास के पन्नों से भारत की इस महानतम उपलब्धि को साजिशन मिटाने की कोशिश हुई और कैसे फिर झूठ का वह क़िला भरभराकर ज़मींदोज़ हो चुका है. सिर्फ नाम ही बचा है. - [नंदी हमेशा शिवलिंग के सामने ही क्यों विराजमान होते हैं? क्या इसमें भी छुपा है कोई प्राचीन वैज्ञानिक रहस्य?](https://khulizuban.com/religion-rituals/why-does-nandi-always-sit-facing-shiva-lingam/): नंदी हमेशा शिवलिंग के सामने ही क्यों विराजमान होते हैं? क्या यह मात्र एक धार्मिक परंपरा है या इसके पीछे कोई प्राचीन वैज्ञानिक रहस्य छिपा हुआ है? हर शिवमंदिर में आप देखेंगे कि नंदी की मूर्ति शिवलिंग के ठीक सामने आंखे बंद किये पूर्ण एकाग्रता से बैठी होती है. सदियों से लोग नंदी के कान में अपनी मनोकामना बताते आए हैं. लेकिन क्या यह सिर्फ आस्था है? या मंदिर की प्राचीन वास्तुकला, उसकी गुंबद संरचना, ध्वनि कंपनों और विशेष पत्थरों (जैसे ग्रेनाइट) की ऊर्जा से यह सब जुड़ा हुआ है? इस लेख में हम इन्हीं सवालों की गहराई में उतरेंगे — जहां आस्था, परंपरा और प्राचीन ऊर्जा विज्ञान एक दूसरे से मिलते नजर आते हैं. - [बच्चों में समय से पहले यौवन: कारण, ख़तरे और माता-पिता के लिए चेतावनी](https://khulizuban.com/society-lifestyle/early-puberty-in-children-causes-risks-warnings-for-parents/): आजकल 7-8 साल के बच्चे ऐसे दिख रहे हैं जैसे उनकी उम्र 13-14 साल हो. आवाज का बदलना, शारीरिक वृद्धि और अन्य बदलाव समय से पहले यौवन (Early puberty) के स्पष्ट संकेत हैं. इस स्थिति में बच्चा बाहर से तो बड़ा दिखता है, लेकिन अंदर से वह अब भी उतना ही मासूम और कोमल होता है. हमारी बदलती जीवनशैली, अस्वस्थ खानपान और स्क्रीन टाइम इसके मुख्य कारण हैं. यह लेख इस गंभीर समस्या के कारणों और इसके दूरगामी परिणामों का गहराई से विश्लेषण करता है. साथ ही, माता-पिता के लिए उन व्यावहारिक उपायों को भी साझा करता है, जिनसे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित रखा जा सकता है. - [मैडम और औरत शब्द सम्मानजनक नहीं, प्रयोग करने से पहले इनका मतलब जान लें](https://khulizuban.com/society-lifestyle/why-the-terms-madam-and-aurat-are-not-respectful-for-women/): किसी महिला के लिए मैडम और औरत शब्द सम्मानजनक नहीं है, क्योंकि ये स्वामित्व और भोग की वस्तु का भाव रखते हैं. अरबी में तो औरत शब्द का अर्थ महिला का गुप्तांग होता है. इसलिए इनका प्रयोग करने से बचें वर्ना उल्टा असर हो सकता है. इस लेख में विस्तार से जानें मैडम और औरत शब्द का वास्तविक अर्थ, व्युत्पत्ति और इतिहास. - [खूबसूरती ही नहीं यौनसुख भी देती है कमर पर लटकी चोटी, महिलाओं की चोटी के और भी क्या फ़ायदे हैं जानिए](https://khulizuban.com/health-education/women-braid-on-waist-enhance-beauty-and-also-sexual-pleasure/): कमर पर लटकी चोटी (The braid hanging at the waist) सिर्फ खूबसूरती ही नहीं, बल्कि शारीरिक-मानसिक सुख से भी जुड़ी है. भारतीय परंपरा, संस्कृति और आयुर्वेद के अनुसार यह महिलाओं के यौन आकर्षण और यौनसुख (Sexual pleasure) को भी बढ़ाती है. 2024 के वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया कि लंबे और अच्छे बालों वाली महिलाओं को उनके पति ज़्यादा आकर्षक मानते हैं, जिससे संभोग की आवृत्ति (Frequency of Sexual Intercource) बढ़ जाती है. परंपराओं, पुराणों, सुश्रुत संहिता से लेकर विकासवादी मनोविज्ञान तक- जानिए कमर पर लटकी चोटी के सौन्दर्य, स्वास्थ्य संबंधी और यौनिक फायदे विस्तार से. - [बुढ़ापा दूर भगाने, और अपनी जवानी और ख़ूबसूरती बनाए रखने के उपाय जानिए](https://khulizuban.com/health-education/tips-to-ward-off-old-age-and-keep-youth-and-beauty-longer/): बुढ़ापा दूर भगाने का मतलब बुढ़ापे को अपने ऊपर हावी होने से रोकना है. इससे लंबे समय तक जवानी और खूबसूरती बनी रहती है. यहां तक कि बुढ़ापे में भी जवानी का मज़ा ले सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार बिना दवा, मेकअप और सर्जरी के हम लंबे समय तक जवान और ख़ूबसूरत बने रहने के लिए कुछ आसान उपाय हैं, जिन्हें जानने और अपने जीवन में उतारने की ज़रूरत है. - [भारत ख़तरे में क्यों है- कौन है ज़िम्मेदार? क्या आतंकी सोच को 'एक हाथ में कुरान, दूसरे में कंप्यूटर' की नीति दे रही है खाद-पानी?](https://khulizuban.com/politics/india-in-danger-quran-laptop-policy-fuelling-jihad-national-security/): जब अपने ही देश और शहर में लोग असुरक्षित महसूस करने लगें, तो सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या 'एक हाथ में कुरान, दूसरे में कंप्यूटर' की नीति कट्टर सोच और जिहाद की ज़मीन तैयार कर रही है? मदरसों को बढ़ावा देना आत्मघाती क़दम नहीं है? तुष्टिकरण वाली कथित कल्याणकारी योजनाओं और आतंरिक सुरक्षा के बीच इस आंखें खोलने वाली इनसाइड स्टोरी को पढ़िए. जानिए आखिर आज भारत ख़तरे में क्यों है, और इसका असली जिम्मेदार कौन है. - [भारत और रूस की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने PM मोदी को मारने की साज़िश नाकाम की थी? जानिए CIA के प्लान और ढाका में अमेरिकी सैन्य अधिकारी की मौत को लेकर दावे और हक़ीक़त](https://khulizuban.com/fact-check/india-russia-intelligence-foiled-cia-plot-assassinate-pm-modi-dhaka-us-officer-death-claims/): अमरीका की कुख्यात ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए (CIA) की हरक़तों से पूरी दुनिया वाकिफ़ है. किसी देश को अस्थिर करने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है- राजनेताओं की हत्या भी करवा सकती है. तो क्या उसने पीएम मोदी के लिए भी चीन में मौत का जाल बिछा रखा था, या फिर यूं कहिये कि 'मोदी को मारने की साज़िश' रच दी थी? इस प्रकरण में, कार में मोदी-पुतिन की 45 मिनट की सीक्रेट मीटिंग, मोदी का होटल के बजाय कहीं और जाकर ठहरना और ढाका के होटल में अमेरिकी सैन्य-अधिकारी की संदिग्ध मौत के पीछे की सच्चाई क्या है, इस फैक्ट चेक रिपोर्ट में जानें. - [ऑनलाइन प्यार: अगर कोई विदेशी महिला कहे, 'डियर, मैं तुमसे मिलने आ रही हूं', तो सतर्क हो जाइये- यह आपके लिए 'रेड फ्लैग' है](https://khulizuban.com/crime/online-love-dating-foreign-woman-red-flag/): भावुक कर देने वाले गीत 'परदेसियों से न अंखियां मिलाना', के संदेश को लेकर कईयों की राय अलग हो सकती है पर सच यही है कि परदेसी दुर्लभ तो होते ही हैं. उसमें भी आज के डिजिटल युग के ऑनलाइन प्यार में यदि कोई विदेशी महिला आपसे मिलने की जल्दी में हो, तो गड़बड़ी की आशंका बहुत ज़्यादा है. उसका आपके देश और शहर आने का वादा एक बड़ा छलावा हो सकता है, जिसमें आर्थिक नुकसान तय है. इस लेख में विस्तार से जानिए ऑनलाइन प्यार के इस 'रेड फ्लैग' और 'रोमांस स्कैम' के बारे में, जो दुनियाभर में परेशानी का सबब बना हुआ है. - [भगवान विष्णु पर टिप्पणी करने वाले सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस गवई माफ़ी मांगेंगे?](https://khulizuban.com/law-court/will-cji-gavai-apologize-for-controversial-remarks-on-khajuraho-lord-vishnu-idol/): सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस गवई ने क्या कह दिया कि मच गया बवाल? बीआर गवई की भगवान विष्णु पर टिपण्णी को हिंदू धर्म के अपमान और भारतीय न्यायिक व्यवस्था की गरिमा पर चोट बताया जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति को भेजी गई है शिक़ायत. लोग कर रहे हैं सार्वजानिक रूप से माफ़ी की मांग. आख़िर क्या है पूरा मामला- कोर्ट में सुनवाई से लेकर शिक़ायत और सोशल मीडिया पर आलोचनाओं तक का पूरा विश्लेषण पढ़िए. - [ऑनलाइन दोस्ती और प्यार की बगिया में ठगों की घुसपैठ, जानिए इनकी पहचान और बचाव के कारगर तरीक़े](https://khulizuban.com/crime/fraudsters-in-online-friendship-and-love-identification-safety-guide/): ठगों ने अब ऑनलाइन दोस्ती और प्यार को हथियार बना लिया है. ऐसे में, बहुत सतर्क रहने की ज़रूरत है. इस लेख में आइये जानते हैं कि असली या नकली दोस्त या प्रेमी-प्रेमिका की पहचान कैसे कर सकते हैं. साथ ही, वे तरीक़े कौन-से हैं जो धोखेबाजों से बचाव के लिए बहुत कारगर माने जाते हैं. - [चेहरे का आकार उजागर कर देता है आपके भविष्य के रहस्य](https://khulizuban.com/religion-rituals/face-shape-reveals-secrets-of-future/): आपके चेहरे का आकार आपका वर्तमान ही नहीं, बल्कि आपके भूतकाल और भविष्य के रहस्य भी उजागर कर देता है. इस लेख में आइये जानते हैं कि किस आकार के चेहरे वाले लोग कैसे होते हैं. यानी वे कैसा जीवन व्यतीत करते हैं- उनकी जीवन-प्रत्याशा कितनी होती है. - [चेहरा बता देता है व्यक्तित्व और भाग्य, जानिए कैसे होते हैं विभिन्न आकार-आकृति के चेहरे वाले लोग](https://khulizuban.com/religion-rituals/face-reveals-personality-and-destiny-different-shapes-features/): चेहरा व्यक्ति की पहचान ही नहीं, बल्कि एक खुली किताब जैसा होता है. इसे पढ़कर व्यक्ति की मानसिक और भावनात्मक क्षमता, उसके अन्तर्निहित स्वभाव और उसके भविष्य को आकार देने वाली घटनाओं के बारे में बख़ूबी जाना या बताया जा सकता है. यह लेख, सामुद्रिक शास्त्र और पंच पक्षी सिद्धांत में वर्णित विभिन्न आकार-आकृति के चेहरे वाले लोगों के व्यक्तित्व और भाग्य की व्याख्या पर आधारित एक प्रामाणिक अध्ययन है. इसे पढ़कर ज्ञानवर्धन करें. - [अंग क्यों फड़कते हैं? जानिए किस अंग के फड़कने का क्या होता है शुभ-अशुभ फल](https://khulizuban.com/religion-rituals/body-parts-twitching-signs-and-omens-samudrik-shastra/): अंग क्यों फड़कते हैं- इस पर अलग-अलग राय है. विज्ञान के अपने विचार हैं तो धार्मिक दृष्टिकोण कुछ और कहता है. भारतीय परंपरा में अंगों फड़कना तत्काल या निकट भविष्य में होने वाली घटनाओं का एक पूर्व संकेत माना गया है, जो दैवीय शक्तियों की ओर से प्राप्त हो जाती है. सामुद्रिक शास्त्र में विभिन्न अंगों के फड़कने का शुभ-अशुभ फल बताया गया है. - [पहेली से कम नहीं है नाक और होंठ के बीच की जगह, जानिए इसके नाम को लेकर गूगल भी भ्रमित क्यों है](https://khulizuban.com/science-general-knowledge/philtrum-nose-lip-groove-name-puzzle-google-confused/): नाक और होंठ के बीच की जगह को क्या कहते हैं यह बहुत कम ही लोग जानते हैं. यही नहीं, गूगल भी स्पष्ट नहीं है कि इसका सही नाम क्या है. - [ज़िन्दगी का हर राज़ खोल देता है नाक पर तिल, जानिए क्या कहता है यह महिलाओं के बारे में](https://khulizuban.com/religion-rituals/religion-culture-mole-on-nose-of-women-reveals-all-about-their-life-til-in-samudrik-shatra/): बहुत मायने रखता है नाक पर तिल. यह व्यक्क्ति के जीवन का दर्पण होता है. यूं कहिये कि इसका अध्ययन कर किसी के असल स्वभाव और स्वास्थ्य के साथ उसके भूत, वर्तमान और भविष्य को भी जाना जा सकता है. - [रहस्यों से पर्दा उठा देती है नाक, जानिए किस तरह की नाक क्या कहती महिलाओं के बारे में](https://khulizuban.com/religion-rituals/know-how-shape-and-size-of-nose-tell-about-our-personality-and-future-samudrik-shastra-analysis/): नाक बहुत बड़ी संकेतक होती है. इसके ज़रिए जीवन के रहस्यों को समझा जा सकता है. यहां तक किसी का भविष्य भी जाना और बताया जा सकता है. - [होंठों पर तिल खोल देता है हर राज़, जानिए यह क्या कहता है महिलाओं के बारे में](https://khulizuban.com/religion-rituals/mole-on-lips-meaning-and-importance-in-samudrik-shastra-analysis/): हमारे शरीर के कुछ विशेष अंगों की विशेष बनावट की तरह उन पर तिल का होना भी बहुत मायने रखता है. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार हमारे अंगों पर स्थित तिल बहुत प्रभावकारी होता है, यह हमारे बारे में सब कुछ बताने में सक्षम होता है. - [होंठ बता देते हैं व्यक्तित्व और भाग्य, जानिए किस प्रकार के होंठ क्या कहते हैं पुरुषों के बारे में](https://khulizuban.com/religion-rituals/lips-of-men-tell-all-about-their-life-jyotish-samudrik-shastra/): होंठ ज़िन्दगी का आइना होते हैं. इनके ज़रिए किसी व्यक्ति के गुण-दोष अथवा ताक़त और कमज़ोरी के बारे में बहुत आसानी से जाना जा सकता है. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार होंठों का अध्ययन कुंडली पढ़ने जैसा है. - [ज़िन्दगी का हर राज़ खोल देते हैं होंठ, जानिए किस तरह के होंठ क्या कहते हैं महिलाओं के बारे में](https://khulizuban.com/religion-rituals/lips-of-women-tell-about-their-personality-and-destiny-says-samudrik-shastra-astrology/): आधुनिक और वैज्ञानिक अध्ययन कहता है कि होंठ दर्पण हैं, जिसमें मनुष्य के स्वास्थ्य और व्यक्तित्व की वास्तविक छवि दिखाई देती है.मगर सामुद्रिक शास्त्र का मानना है कि इसमें हर चीज़ नज़र आती है.यहां तक कि व्यक्ति के भूत, वर्तमान और भविष्य को भी इसके ज़रिए जाना जा सकता है. - [नाभि पर तिल का अर्थ: महिलाओं के बारे में यह क्या संकेत देता है, जानें सामुद्रिक शास्त्र के विचार](https://khulizuban.com/religion-rituals/mole-on-womens-navel-meaning-samudrika-shastra/): सामुद्रिक शास्त्र में नाभि पर स्थित तिल को महत्वपूर्ण माना गया है. विशेषकर महिलाओं की नाभि पर तिल के बारे में कहा गया है कि यह अच्छा संकेतक होता है. यह उनके स्वास्थ्य और व्यक्तित्व ही नहीं, बल्कि उनके जीवन के सारे रहस्यों को उजागर कर देता है. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार महिलाओं नाभि की दायीं और बायीं ओर, ऊपर और नीचे और इसके अंदर स्थित तिल के अलग-अलग संकेत होते हैं. ऐसे में, आइये इस आर्टिकल में जानते हैं कि इन अलग-अलग स्थिति में तिल वाली महिलाओं की क्या विशेषताएं होती हैं अथवा उनका जीवन कैसा होता है. - [महिलाओं की नाभि खोल देती है हर राज़, जानिए किस तरह की नाभि क्या कहती है उनके बारे में](https://khulizuban.com/religion-rituals/womens-navel-reveals-every-secret-what-different-navel-shapes-say/): महिलाओं की नाभि सौन्दर्य का हिस्सा ही नहीं, बल्कि उनके आकर्षण में चार चाँद लगाने वाली होती है. यह यौनसुख को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है. लेकिन इससे भी बड़ी और मुख्य बात यह है कि महिलाओं की नाभि उनके व्यक्तित्व और भाग्य का आइना होती है. यह अपने अंदर सारे रहस्य समेटे रखती है. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार नाभि महिलाओं का हर राज़ खोल देती है. आइये इस लेख में जानते हैं कि महिलाओं की विभिन्न आकार-प्रकार की नाभि उनके किस तरह के व्यक्तित्व और जीवन के बारे में बताती है. सामुद्रिक शास्त्र कहता है कि महिलाओं की नाभि उनका हर राज़ खोल देती है. कैसे? आइये हम इस लेख में जानते हैं कि महिलाओं की किस प्रकार की नाभि (Different navel shapes) उनके बारे में क्या कहती है? - [जादू की तरह काम करती है लीच थैरेपी, कई असाध्य और जानलेवा बीमारियों में भी है असरदार](https://khulizuban.com/health-education/benefits-of-leech-therapy-jalaukavacharna-of-ayurveda/): लीच थैरेपी के फ़ायदे गिनाना आसान नहीं है.यूं समझ लीजिये कि इसके बारे में हम उतना ही जानते हैं जितना जोंक की ख़ासियत के बारे में जान पाए हैं.सोचिये, ज्ञात लाभ इतने अद्भुत और चकित करने वाले हैं, तो अज्ञात कितने चमत्कारिक होंगें! - [लीच थैरेपी का बढ़ता चलन और संभावनाएं](https://khulizuban.com/health-education/leech-therapy-jalaukavacharna-procedure-importance-and-benefits-of-leeches/): लीच थैरेपी एक सुरक्षित, प्रभावी, कम खर्चीली और आसान प्रक्रिया है.यही कारण है कि अनेक गंभीर रोगों और जटिलताओं में इसका चलन बढ़ता जा रहा है.आने वाले समय में यह प्राचीन चिकित्सा प्रक्रिया कई मामलों में आधुनिक चिकित्सा विकल्पों को पीछे छोड़ देगी. - [असली स्तन बनाम नकली स्तन: नकली स्तनों को पहचानने के तरीक़े जानिए](https://khulizuban.com/health-education/how-can-we-spot-fake-breasts-know-the-ways-explained/): स्तनों के बारे में सही जानकारी हो, तो ऐसे कई तरीक़े हैं, जिनसे पता लगाया जा सकता है कि वे असली हैं या नकली.इनकी विशेषताएं इनकी असलियत को उजागर करती हैं. - [छाती एवं स्तनों के आकार और आकृति से जानिए महिलाओं का व्यक्तित्व और भाग्य](https://khulizuban.com/religion-rituals/know-the-personality-of-women-from-the-size-and-shape-of-breasts/): स्तनों के आकार-प्रकार बहुत कुछ कहते हैं.सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्तनों की ख़ासियत महिलाओं के व्यक्तित्व ही नहीं भाग्य भी बताती हैं. - [स्तनों के सामान्य विकास और परिवर्तन के बारे में जानिए](https://khulizuban.com/health-education/know-about-development-and-changes-in-breasts-of-women/): स्तनों का विकास कुछ चरणों में होता है, और इनमें परिवर्तन जीवनभर होते रहते हैं.स्तनों का बहुत बड़ा या छोटा होना सामान्य नहीं माना जाता है. - [मुसलमानों के एकमुश्त वोट और हिन्दुओं के वोट में बिखराव ने मोदी-भाजपा के मंसूबों पर पानी फेरा](https://khulizuban.com/current-affairs/lump-sum-vote-of-muslims-and-scattered-votes-of-hindus-ruined-plans-of-modi-bjp/): भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेरने वाले अकेले मुसलमान नहीं हैं.इस चुनाव परिणाम में हिन्दुओं की नाराज़गी भी साफ़ दिखाई देती है. - [क्यों अचानक बढ़ने लगते हैं स्तन? ज़्यादा बड़े स्तनों के आकार (ब्रेस्ट साइज़) कम करने और सुडौल बनाने के उपाय जानिए](https://khulizuban.com/health-education/what-causes-breast-to-expand-and-makes-heavy-explained/): स्तनों का बढ़ना स्तन विकास की एक सामान्य प्रक्रिया है.परंतु, कुछ अन्य कारणों से भी स्तनों के आकार प्रभावित हो सकते हैं.इनमें अचानक बदलाव देखने को मिलते हैं.इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. - [क्यों नहीं बढ़ता है कुछ महिलाओं के स्तनों का आकार (ब्रेस्ट साइज़) जानिए](https://khulizuban.com/health-education/why-breast-size-of-some-women-does-not-increase-health-problem-explained/): कुछ महिलाओं के स्तनों का क्यों पूरा विकास नहीं हो पाता है, और वे छोटे रह जाते हैं, इस बारे में अधिकांश बातें अस्पष्ट जान पड़ती हैं.कुछ तो भ्रमित भी करती हैं.ऐसे में,समझने के लिए तर्कों को तथ्यों की कसौटी पर कसने की ज़रूरत है. - [स्तनों के आकार (ब्रेस्ट साइज़) बढ़ाने और उन्हें सुडौल बनाये रखने के उपाय जानिए](https://khulizuban.com/health-education/how-to-increase-breast-size-and-keep-shapely-home-remedies/): ऐसे कई उपाय हैं जो स्तनों के आकार बढ़ाने, और उन्हें सही आकृति देने व बनाये रखने में बड़े मददगार साबित होते हैं.मगर सही जानकारी के अभाव में लड़कियों-महिलाओं को अक्सर फ़ायदे की जगह नुकसान ही उठाना पड़ता है. - [क्षार सूत्र क्या है? यह कैसे बनता है, और किन-किन बीमारियों में इस्तेमाल होता है जानिए](https://khulizuban.com/health-education/what-is-kshar-sutra-how-it-is-made-and-used-in-treatment-for-piles-fissure-and-fistula/): आयुर्वेद में ऐसी सर्जरी है, जो कि औजारों से नहीं बल्कि क्षार सूत्र से होती है.इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है कि यह औजार न होते हुए भी किसी अंग को काटने, हटाने की उतनी ही क्षमता रखता है जितना कि कोई सर्जिकल औजार.यह ब्लड लेस सर्जरी का बेहतरीन उदाहरण है. - [नेहरू परिवार का इतिहास: पूर्वजों की अपनी ही बनाई कहानी में फंस गए जवाहरलाल नेहरू और उनके दरबारी इतिहासकार-लेखक](https://khulizuban.com/history/story-of-nehru-family-and-facts-in-the-history/): विवादित नेहरू की छवि को चमकाने के लिए उनके अज्ञात परिवार की ऐसी कहानियां गढ़ी गईं, जिनकी कडियां आपस में नहीं मिलती हैं.जो भी बातें हैं, खोखली और तथ्यहीन नज़र आती हैं. - [भगंदर (Fistula) के इलाज में माहिर है अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), लोकप्रियता में सबसे आगे](https://khulizuban.com/health-education/all-india-institute-of-ayurveda-aiia-specializes-in-the-treatment-of-fistula-bhagandar-tops-in-popularity/): भगंदर और बवासीर आदि रोगों में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान को महारत हासिल है.हजारों मरीज़ों का सफल इलाज कर इसने पूरी तरह ठीक किया है, उन्हें नया जीवन दिया है - [विवाह, शादी और मैरिज अलग-अलग शब्द ही नहीं, इनके मायने भी अलग होते हैं](https://khulizuban.com/society-lifestyle/why-vivah-shadi-and-marriage-should-never-be-equated-concepts-differ-in-hinduism-islam-and-christianity/): पर्यायवाची के रूप में प्रयोग किये जाने वाले शब्द विवाह, शादी और मैरिज एक दूसरे से कितने भिन्न हैं, यह सनातन हिंदू धर्म, इस्लाम और ईसाइयत में इनको लेकर वर्णित अवधारणाएं बिल्कुल स्पष्ट कर देती हैं. - [मर्दाना कमज़ोरी और औरतों का बांझपन दूर करता है सत्यानाशी, देता है नया जीवन, इसके अन्य फ़ायदे भी जानिए](https://khulizuban.com/health-education/satyanashi-argemone-mexicana-benefits-male-vitality-female-fertility-new-life/): सत्यानाशी को आयुर्वेद में गुणों की खान कहा गया है.हर प्रकार की यौन दुर्बलता व अक्षमता दूर करने में कारगर बताया गया है. - [पावर नैप क्या है? जानिए इसे क्यों और कैसे लेना चाहिए](https://khulizuban.com/health-education/what-is-power-nap-why-and-how-to-take-it/): पावर नैप जेम्स बेरिल मास द्वारा गढ़ा गया शब्द ज़रूर है, लेकिन इसकी अवधारणा बहुत पुरानी है.सभ्यता के आरंभ से ही मानव दरअसल, अपने अंदर के सर्केडियन क्लॉक के संकेतों के ज़रिए इसकी बारीकियों को बख़ूबी जानता-समझता है. - [पर्व और त्यौहार: एक ही समझे जाने वाले एक दूसरे से कितने अलग हैं जानिए](https://khulizuban.com/religion-rituals/difference-between-parva-and-festival-of-sanatan-hindu-dharma-analysis/): अधिकांश लोगों को पता ही नहीं है कि पर्व और त्यौहार एक ही हैं, या दोनों में अंतर है, जबकि वैदिक ग्रंथों में इनका स्पष्ट वर्णन मिलता है. - [दीपावली के अवसर पर अलग-अलग जगहों पर अलग देवी-देवताओं की पूजा क्यों होती है? देवी लक्ष्मी के साथ गणेशजी विराजमान क्यों दिखाई देते हैं, जानिए](https://khulizuban.com/religion-rituals/diwali-different-deities-by-region-gaesha-with-lakshmi/): दीपावली का त्यौहार जितना प्राचीन है उतना ही यह विविधताओं से भरा भी है.मगर सबका भाव एक ही है, जो इसके मूल में है.इसी कारण इसे महापर्व या पर्वों का समूह कहा जाता है. - [दिन में सोना सेहत के लिए फ़ायदेमंद है या नुकसानदेह? इस बारे में धार्मिक विचार जानिए](https://khulizuban.com/health-education/daytime-sleeping-beneficial-or-harmful-religious-views/): हम अपनी सेहत की चिंता करते हैं. उचित-अनुचित भी समझते हैं. लेकिन दिन में सोना हमारे लिए फ़ायदेमंद है या नुकसानदेह, इस पर कम ही लोग विचार करते हैं. - [यौन संचारित रोग (STD): सिफलिस को 'फिरंग रोग' क्यों कहते हैं? क्या यह उपदंश से अलग बीमारी है?](https://khulizuban.com/health-education/sexually-transmitted-disease-syphilis-and-updansh-difference/): सिफलिस को उपदंश बताने वाले यह भूल जाते हैं कि सैकड़ों साल पहले भारत में इसे फिरंग रोग नाम देकर आयातित बताया गया था. - [नीम का सेवन करें, कभी डॉक्टर और दवा की ज़रूरत नहीं पड़ेगी](https://khulizuban.com/health-education/benefits-of-neem-margosa-tree-makes-disease-free-and-keeps-doctors-away/): अपने करिश्माई असर के चलते नीम शरीर का डॉक्टर भी कहलाता है.इसके सेवन के बाद किसी दवा की ज़रूरत नहीं होती है. - [डायबिटीज की महंगी दवाओं के बजाय 10 रुपए का फल खाकर कर सकते हैं शुगर लेवल को कम और नियंत्रित](https://khulizuban.com/health-education/medicinal-uses-of-kaitha-fruit-elephant-apple-for-diabetes-and-other-diseases-in-ayurveda/): अनेक पेड़-पौधों के फल, फूल और पत्तियां गुणकारी होती हैं.मगर, एक ऐसा भी फल है, जो डायबिटीज में जादू की तरह असर करता है. - [नेपाली लड़कियों की तस्करी: तस्करों की कामयाबी नहीं, व्यवस्था की नाकामी है](https://khulizuban.com/current-affairs/girls-from-nepal-trafficked-india-and-other-countries-route-and-network-analysis/): हजारों नेपाली लड़कियां-महिलाएं हर साल नौकरी और अच्छी ज़िन्दगी के झांसे में देह व्यापार की दुनिया में धकेल दी जाती हैं. - [भारत में देसी व्यंजन विदेशी नाम से महंगे क्यों बिकते हैं?](https://khulizuban.com/society-lifestyle/why-indian-dishes-sold-with-foreign-names-at-higher-prices/): भारत में देसी व्यंजन विदेशी नाम से महंगे क्यों बिकते हैं- यह बड़ा सवाल है. क्या आधुनिक कहे जाने वाले भारतीय देसी व्यंजनों को उनके भारतीय नाम से कम विदेशी नाम से ज़्यादा जानते हैं? या फिर उन्हें अपनों से कम, गैरों से ज़्यादा लगाव है? आख़िर क्या है असली वज़ह, आइये तलाशते हैं, और जानते हैं कि केवल नाम बदल जाने से व्यंजन महंगे क्यों जाते हैं, जबकि सामग्री और रेसिपी वही रहती है. - [मुस्लिम देशों में महिलाएं: तस्वीर बदलती नज़र नहीं आती?](https://khulizuban.com/islam/women-rights-in-muslim-nations-islamic-world-analysis/): मुस्लिम देशों में महिलाओं की हालत में सुधार लाने के बजाय उनसे जुड़े नियमों में बदलाव का दिखावा हो रहा है. - [कुरान जलाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है या आस्था के प्रतीक का अपमान?](https://khulizuban.com/current-affairs/burning-of-quran-freedom-of-expression-or-insult-to-the-symbol-of-faith-analysis/): कुरान जलाने से किन विचारों की अभिव्यक्ति होती है, यही सबसे बड़ा सवाल है. - [आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): विकास के नाम पर इंसान कहीं अपनी बर्बादी का सामान तो नहीं जुटा रहा है?](https://khulizuban.com/science-general-knowledge/artificial-intelligence-in-human-world-advantages-and-disadvantages-analysis/): एआई-संचालित मशीनों के फ़ायदे के साथ-साथ उनसे होने वाले नुकसान पर भी चिंता ज़रूरी है. - [प्रेम कोई रोग नहीं, स्वस्थ तन-मन की अभिव्यक्ति है](https://khulizuban.com/health-education/is-love-a-disease-scientific-spiritual-analysis/): सच्चा प्रेम व्यक्ति को धो-पोंछकर साफ़ और इस क़दर मजबूत बना देता है कि रोग उसे छू भी नहीं सकता है. - [एसिडिटी क्या है? एसिडिटी के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में जानिए](https://khulizuban.com/health-education/acidity-problem-hyper-acidity-treatment-in-ayurveda-amla-pitta-gharelu-nuskhe/): एक आम समस्या लगने वाली एसिडिटी धीरे-धीरे रोग का रूप ले लेती है, और कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करती है. - [दिल इतना कमज़ोर क्यों हो गया है..](https://khulizuban.com/health-education/heart-disease-cvd-hriday-rog-in-ayurveda/): आज दुनियादारी में हम इतने मसरूफ़ हैं कि हमें पता नहीं कि हमारे दिल के साथ क्या हो रहा है. कौन इस के साथ किस तरह से खेल रहा है. यही कारण है यह बहुत कमज़ोर हो गया है, और जल्द बीमार होकर डॉक्टरों की दुकानों, लैब और दवाइयों के बाज़ार के बीच फुटबॉल बना दिखाई देता है. - [आख़िरकार सेंगोल को उसकी जगह मिल गई](https://khulizuban.com/current-affairs/sengol-of-india-history-and-tradition-pm-modi-placed-in-new-parliament-building/): अखंड भारत के स्वर्णिम इतिहास के विशिष्ट अंग सेंगोल को 75 सालों बाद ही सही मगर, सम्सम्मान स्थान मिल गया. - ['मोरया के बप्पा' कहिए या 'बप्पा के मोरया' संदेश एक ही है](https://khulizuban.com/religion-rituals/ganpati-bappa-morya-and-mangalmurti-morya-associated-with-ganesh-bhakt-morya-gosavi/): भगवान मयूरेश्वर के आशीर्वाद से धराधाम पर आए मोरया स्वयं तो प्रकाशित-परिभाषित हुए ही, एक अनन्य भक्त के रूप में दूसरों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए. - ['आदि' और 'इत्यादि' के प्रयोग: नियम को लेकर इतना भ्रम क्यों है?](https://khulizuban.com/health-education/aadi-aur-ityadi-ke-prayog-antar-hindi-grammar/): मतभिन्नता के कारण आजकल लोग हर जगह 'आदि' का ही प्रयोग कर रहे हैं.यहां तक कि 'इत्यादि' के बजाय 'आदि आदि' प्रयुक्त हो रहा है. - [गाड़ियों की नंबर प्लेट: अलग-अलग आकार और रंग-रूप के मायने क्या हैं जानिए](https://khulizuban.com/utility-technology/number-plates-of-vehicles-different-in-size-parts-with-registration-number-format-and-color-of-licence-plates/): पंजीकृत वाहनों का पहला प्रमाण हैं उनकी नंबर प्लेट, जो चुटकियों में उनकी सारी डिटेल बता देती हैं. - [विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति: ग़ुलाम मानसिकता का ग़ुलामी की राह में बढ़ा क़दम](https://khulizuban.com/current-affairs/foreign-universities-threat-to-indian-education-system-and-the-nation-know-how-analysis/): नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला विश्वविद्यालय बनाने के लिए ग्रीक दार्शनिक नहीं आए थे, उनमें आचार्य हमारे भारत के ही थे.पढ़ने के लिए लोग बाहर से आते थे. - [शहरी कुत्ते क्यों हो रहे हैं बीमार और ख़तरनाक़?](https://khulizuban.com/society-lifestyle/know-why-pet-dogs-in-cities-are-becoming-sick-and-dangerous-and-how-to-care-tips/): कई शोधकर्ता, पशु जीवन के जानकार और चिकित्सकों की राय में शहरों में पालतू कुत्ते कई समस्याओं से घिरे हैं.वे शारीरिक ही नहीं मानसिक रूप से भी बीमार हो रहे हैं. - [क्यों बुला रहे हैं दूसरों को कई देश अपने यहां रहने के लिए? जानिए उन जगहों के बारे में जहां मिल रहे हैं लाखों रुपए, मुफ़्त में घर, गाड़ी और बंगला](https://khulizuban.com/current-affairs/why-are-some-countries-inviting-people-to-settle-on-their-own-land-paying-money-to-live-and-do-business/): कम आबादी वाले देश अपनी आबादी बढ़ाने और प्रगति को बनाए रखने या बढ़ाने के लिए दूसरों को अवसर दे रहे हैं. - [बंद करिए सैनिकों को शहीद और मार्टर कहना, ये शब्द इनके लिए ठीक नहीं](https://khulizuban.com/defence-security/stop-calling-soldiers-shaheed-and-martyrs-these-words-are-not-right-for-them/): हमारे सैनिक पंथनिरपेक्ष तो हैं ही, राजनीति से भी इनका कोई लेना-देना नहीं है.लेकिन, इनके लिए हम ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं, जो ठीक इसके विपरीत अर्थ रखते हैं, और उचित भी नहीं हैं. - [अजब-ग़ज़ब: दुनिया का सबसे छोटा देश- वेटिकन सिटी या सीलैंड?](https://khulizuban.com/strange-amazing/sealand-vs-vatican-worlds-smallest-country/): सीलैंड वेटिकन सिटी जैसा ज़मीन पर स्थित न होकर समंदर की लहरों पर तैरता हुआ देश ज़रूर है, मगर यह आबादी के ख़याल से वेटिकन से काफ़ी छोटा है. साथ ही, एक राष्ट्र के रूप में आवश्यक व्यवस्था और उपलब्धि के दावे भी करता है. - [भारत के आदिवासी: प्रकृति-पूजक कहिए या हिन्दू, मतलब एक ही है](https://khulizuban.com/civilization-culture/religion-of-indian-tribes-adiwasi-sanatan-dharma-vaidik-and-hindu-dharma/): जब ब्रिटिश हुकूमत को विभिन्न मत और आस्था रखने वालों के तुलनात्मक अध्ययन के लिए जनगणना की ज़रूरत पड़ी तो जाने-अनजाने में भारतीय धर्म के मानने वालों के लिए सनातनी की जगह हिन्दू लिख दिया.यही आज़ादी के बाद भी हुआ.भारतीय संविधान में सनातनी समाज के ग्रामीण और शहरी लोगों के साथ-साथ वनवासी या आदिवासियों को […] - [भारत के आदिवासियों को सनातन हिन्दू धर्म से काटने का कुचक्र](https://khulizuban.com/civilization-culture/conspiracy-to-cut-the-tribals-of-india-from-sanatan-hindu-religion/): आदिवासियों के रीतिरिवाज ही इनके प्रमुख धर्मशास्त्र हैं.आर्य परंपरा का पालन करते हुए आज भी ये एक गोत्र में विवाह नहीं करते, और जो करता है, उसे समाज से निकाल दिया जाता है. - [पर्यावरण को बचायेंगें तभी हम भी बचेंगें](https://khulizuban.com/health-education/environmental-issues-soil-water-and-air-pollution-analysis/): लाशों पर मातम मनाने और नुकसान की भरपाई के गणित में ही सारी उर्जा खपा रहे हैं मगर, एक छोटी सी बात समझने की कोशिश नहीं कर रहे हैं कि पर्यावरण को बचायेंगें तभी हम भी बचेंगें. - [अस्त्र और शस्त्र- अलग-अलग शब्द ही नहीं हैं, दोनों में अंतर भी है](https://khulizuban.com/religion-rituals/difference-between-astra-and-shastra/): प्राचीन भारतीय ग्रंथों, जैसे धनुर्वेद और अग्निपुराण, आदि में युद्धकला और युद्ध में प्रयोग होने वाले विभिन्न अस्त्र और शस्त्र का विस्तार से वर्णन है. उनके अनुसार अस्त्र जहां दूरी, अपनी मारक क्षमता और विनाशकारी शक्ति के लिए जाने जाते हैं वहीं, शस्त्र एक योद्धा के व्यक्तिगत शौर्य, बाहुबल और युद्ध कौशल का सच्चा प्रमाण होते हैं. इस लेख में इसी अंतर को सरल और आसान भाषा में समझाया गया है. - [हिन्दू देवी-देवताओं के हाथों में क्यों हैं अस्त्र-शस्त्र?](https://khulizuban.com/religion-rituals/why-do-hindu-gods-and-goddesses-have-weapons-in-their-hands/): हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों और मूर्तियों में कमल, शंख, माला, आदि के साथ कई प्रकार के अस्त्र-शस्त्र भी दिखाई देते हैं. इसका अर्थ यह है कि शांति के साथ रक्षा भी ज़रूरी है. रक्षा- अधर्म, अराजकता और आसुरी शक्तियों से. शस्त्र अधर्म के नाश और धर्म की रक्षा के प्रतीक हैं. इस लेख में जानेगें कि कैसे जो हिंदू देवी-देवताओं के संदेश भूल गए, वे आज निहत्थे और कमजोर हो गए हैं. - [गांधीवादी-वामपंथी सोच ने भूमकाल विद्रोह के नायक गुंडाधुर को गुमनामी में धकेला!](https://khulizuban.com/history/history-freedom-srtuggle-know-how-gandhian-leftist-thought-pushed-gundadhur-the-hero-of-bhumkal-vidroh-into-oblivion-explained/): गांधीवादी-वामपंथी सोच ने कई महान स्वतंत्रता सेनानियों के चरित्र को परदे के पीछे धकेल दिया, जबकि जो लोग जेल में मज़े में बैठकर किताबें लिखते थे, महिलाओं-लड़कियों संग नंगे नहाते-सोते हुए कथित ब्रह्मचर्य का प्रयोग करते थे, उन्हें हीरो बताया गया और उनकी शान में क़सीदे लिखे-पढ़े गए. - ['गुंडा' किसे कहते हैं, और यह शब्द कहां से आया? जानिए गुंडा का इतिहास, जिस ने 'गुंडा एक्ट' को जन्म दिया](https://khulizuban.com/history/history-freedom-struggle-know-about-the-origin-of-word-gunda-gundadhur-the-hero-of-bhumkal-vidroh-and-gunda-act-explained/): भाषा कुछ शब्द स्वयं बनाती है तो कुछ अन्य भाषाओं से ग्रहण करती है. हिंदी में भी ऐसा ही है. 1910 से पहले इसमें लुच्चा या बदमाश के अर्थ में गुंडा शब्द का प्रचलन नहीं था. सूरदास, तुलसी, जायसी, बिहारी, मतिराम, चिंतामणि और आधुनिक काल में भारतेंदु ने भी गुंडा शब्द का प्रयोग नहीं किया. […] - [सीबीआई में अपने ही लोग बेगाने क्यों हैं?](https://khulizuban.com/current-affairs/discrimination-and-injustice-within-cbi-dopt-and-government-of-india/): भारत से पाकिस्तान गए मुसलमान जिस तरह वहां मुहाजिर हैं उसी तरह सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर आकर मर्ज हुए राज्य पुलिस के कर्मचारी पराये हैं, और भेदभाव के शिकार हैं. - [स्वास्थ्य के लिए वरदान से कम नहीं है पनीर फूल, डायबिटीज, अस्थमा और कैंसर के इलाज में भी होता है इस्तेमाल](https://khulizuban.com/health-education/paneer-phool-withania-coagulans-health-benefits-treatment-diabetes-asthma-cancer/): ऋष्यगंधा यानी पनीर फूल या पनीर डोडा प्रकृति से वनस्पति के रूप में प्राप्त एक वरदान से कम नहीं है. यह अनेक रोगों का शमन करता है, और शरीर को निरोगी बनाए रखता है. आयुर्वेद में हजारों साल से इस का उपयोग हो रहा है, यह डायबिटीज, अस्थमा और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के इलाज […] - [दरके हुए पहाड़ों के मलबे पर बसे जोशीमठ को बचाना मुश्किल है](https://khulizuban.com/calamity-disaster/joshimath-difficult-to-save-debris-cracked-mountains/): इसे नर और नारायण पर्वत के आपस में मिलने की भविष्यवाणी कहिए या विशेषज्ञों की दशकों पुरानी आशंका, इनके सच होने का समय क़रीब दिखाई दे रहा है. ऐसे में, जोशीमठ में एक हज़ार साल पहले आई बड़ी प्राकृतिक आपदा की पुनरावृत्ति होगी.     जोशीमठ में भूधसान, सड़कों और घरों में दरारें उत्तराखंड के […] - [पाणिनि की अष्टाध्यायी पर शोध: कैम्ब्रिज युनिवर्सिटी और उसके छात्र रिषी राजपोपट ने व्याकरण जगत की 'सबसे बड़ी गुत्थी' सुलझाने का दावा कर अपनी ही फ़ज़ीहत कराई](https://khulizuban.com/current-affairs/panini-ashtadhyayi-puzzle-cambridge-rajpopat-embarrassment/): मेले में दूर तक देखने वाला बच्चा भूल जाता है कि वह बाप के कंधे पर बैठा है. इसी प्रकार, रिषी राजपोपट ने परंपराओं को तो नाकारा ही, पाश्चात्य जगत में भी संस्कृत पर हुए कार्य को नीचे धकेलते हुए वे ‘यूरेका-यूरेका’ चिल्ला पड़े. नतीजतन, जो प्रतिक्रियाएं आईं, वह सामने है. यह ‘जोश में होश […] - [कीड़ा जड़ी: पहाड़ों की धरोहर पहाड़ों में बचाने के बजाय लैब में उगाई जा रही है!](https://khulizuban.com/health-education/cordyceps-himalayan-viagra-lab-grown-vs-mountain-preservation/): किडनी की कोई समस्या हो या कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी, इस में कीड़ा जड़ी बड़ी लाभकारी है.कमज़ोर सेक्स पावर वाले लोग तो इस बूटी को खाकर वियाग्रा को भूल जाते हैं. यही कारण है कि देश और विदेशों में इसकी भारी मांग है. इस की मुंहमांगी क़ीमत मिलती है. मगर प्राचीन काल से ही आयुर्वेदिक […] - [दुनिया की सबसे महंगी दवा- हेमजेनिक्स: क़ीमत दवा की या शोध और सपनों पर हुए ख़र्च की?](https://khulizuban.com/health-education/worlds-most-expensive-drug-hemgenix-price-or-research-expenses-dreams/): दुनिया की सबसे महंगी दवा बाज़ार में आ चुकी है. नाम है हेमजेनिक्स (Hemgenix). हीमोफिलिया बी के इलाज में काम आने वाली इस दवा या जीन थेरेपी की सिर्फ एक खुराक की कीमत है 29 करोड़ रुपये. बताया जाता है कि इसके एक ही इंजेक्शन से शरीर ख़ुद खून का थक्का (फैक्टर 9) बनाने लगता है. ज़्यादातर मरीजों की ब्लीडिंग समस्या 90% तक कम हो जाती है, और कई सालों तक राहत बनी रहती है. पारंपरिक इलाज से कहीं अधिक कारगर साबित हो रही है यह दवा, लेकिन इसने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है- क्या इतनी भारी-भरकम कीमत सिर्फ शोध पर ख़र्च और मेहनत की है, या इसमें शोधकर्ताओं और फार्मा कंपनियों के बड़े-बड़े सपनों, मुनाफे की महत्वाकांक्षा और कमर्शियल महत्वाकांक्षाओं का भी हिसाब-किताब जोड़ दिया गया है? - [यज़ीदी: पश्चिम एशिया में हिन्दुओं का एक खोया हुआ पंथ](https://khulizuban.com/civilization-culture/yazidis-lost-hindu-sect-west-asia-comparision-explained/): यज़ीदी न तो मुसलमान हैं, न ईसाई हैं और न ही वे पारसी हैं. यज़ीदी केवल और केवल सनातन हिन्दू हैं, जो हज़ारों साल पहले पश्चिम एशिया में जाकर बस गए थे. और, दूसरे मतों का उन पर जो थोड़ा बहुत प्रभाव दिखाई देता है, वह लंबे समय और बदलती परिस्थितियों का परिणाम है. इसे, […] - [पैग़म्बर मोहम्मद के वंशजों को शरण देकर राजा दाहिर ने सनातन परंपरा निभाई?](https://khulizuban.com/civilization-culture/raja-dahir-sindh-shelter-descendants-prophet-muhammad-sanatan-tradition/): आज भी बहुत कम ही लोग यह जानते हैं कि पैग़म्बर मोहम्मद के ख़ानदान के लोगों को संकट के समय भारत ने शरण दी थी. हर तरह से उनका ख़याल रखा और उनकी रक्षा करते हुए हज़ारों हिन्दुओं ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. ख़ुद राजा दाहिर अरबों की सेना से लड़ते हुए […] - [मीना बाज़ार: बाज़ार नहीं, कामी कीड़े अक़बर के हरम का दरवाज़ा कहिये](https://khulizuban.com/history/meena-bazaar-not-market-but-lustful-insect-akbar-harem-door/): अटल बिहारी द्वारा रचित कविता ‘रग-रग मेरा हिन्दू परिचय’ में अकबर के पुत्रों से पूछा गया है कि उन्हें ‘मीना बाज़ार’ याद है या फिर भूल गए. ज्ञात है कि भारत में एक वक़्त ऐसा भी था जब राजपूत बहू-बेटियों के सामने जौहर ही एकमात्र विकल्प होता था. वे जौहर करती थीं यानी जीवित धधकते […] - ['रग रग हिन्दू मेरा परिचय' की रचना अटलजी ने किशोरावस्था में ही कर डाली थी!](https://khulizuban.com/history/atal-bihari-vajpayee-rag-rag-hindu-mera-parichay-teenage-poem/): भारत में अब तक कई प्रधानमंत्री हुए.सब की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं.अपना एक खास परिचय है.मगर, एक ऐसा व्यक्ति भी सत्ता के शिखर पर घंटी बजाता है, प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुआ, जो बचपन से ही शब्दों को पिरोने-सजाने की अद्भुत कला में मौजूद था.उसका विशाल और शक्तिशाली कवि ह्रदय नीरस और बेरंग राजनीति में भी […] - [मुग़लों का काला सच: मां, बहन और बेटियों से भी बनाते थे संबंध](https://khulizuban.com/history/mughal-incest-dark-truth-mothers-sisters-daughters/): दुनिया का इतिहास शौक़ और अय्याशी से भरा पड़ा है.लेकिन, जो अय्याशी मुग़लों ने की, उसकी मिसाल कहीं और देखने को नहीं मिलती.ख़ासतौर से, औरतों में तो जैसे वे डूबे रहते थे.इसे शबाब का शौक़ कहें या सेक्स की लत, इन्होंने अपनी मां, बहन और बेटियों को भी नहीं छोड़ा.उन्हें भी अपनी हवस का शिकार […] - [ईरान में बाप गोद ली हुई बेटी से शादी कर सकता है! इस बारे में इस्लाम क्या कहता है, जानिए](https://khulizuban.com/islam/iran-law-allows-marriage-to-adopted-daughter-what-islam-says/): इस्लामी रवायत के मुताबिक़, गोद लिए हुए बेटे के सामने मां को और बेटी को बाप के सामने पर्दा या हिजाब करना ज़रूरी है.यानि, गोद ली हुई औलाद ग़ैर-महरम है, और उसके साथ शादी और यौन संबंध या सेक्स हो सकता है.     ईरान में गोद ली हुई बेटी और बाप की स्थिति (सांकेतिक) […] - [समन और वारंट में अंतर जानिए](https://khulizuban.com/law-court/summons-and-warrant-difference/): अदालती कार्यवाही में समन और वारंट दो अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं हैं, लेकिन इनकी प्रकृति और कानूनी दायरे में बड़ा अंतर होता है. अक्सर लोग समन को ही गिरफ्तारी का आदेश समझकर छुपने लगते हैं और मुसीबत में पड़ जाते हैं. इस लेख में विस्तार से जानिए समन और वारंट क्या हैं, इनकी तामील कैसे होती है, और ये दोनों अदालती आदेश पत्र एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं. - [कंप्लेंट केस क्या है, और यह पुलिस केस से कैसे अलग है जानिए](https://khulizuban.com/law-court/complaint-case-and-police-case-key-differences/): अगर किसी आपराधिक घटना में पुलिस आपकी एफआईआर दर्ज करने- जांच व कार्रवाई करने से मना कर दे, तो आपके पास अदालत का रास्ता खुला है. आप वहाँ शिकायत- कंप्लेंट केस दर्ज कराकर इंसाफ़ की गुहार लगा सकते हैं. इस लेख में जानिए- कंप्लेंट केस पुलिस केस से कैसे अलग है और इसकी अदालती प्रक्रिया के बारे में. - [कुत्ता और इंसान: मायने बदल गए हैं](https://khulizuban.com/society-lifestyle/dogs-status-symbol-vs-humans/): शहर हो या गांव, आज के आधुनिक कहे जाने वाले समाज में कुत्ते इंसानों से बेहतर स्थिति में दिखाई देते हैं. एक तरफ़ तो इंसानों की इंसानों से दूरियां बढ़ती जा रही हैं वहीं, कुत्तों से प्रेम उफ़ान पर है. गाड़ियों और मोबाइल फ़ोन के बाद महंगे कुत्ते मॉडर्न सोसायटी के स्टेटस सिंबल बन गए […] - ['सुपर पावर' के अंधविश्वास के बारे में जानिए, व्ह्वाईट हाउस भी है भूतों के शिकंजे में!](https://khulizuban.com/strange-amazing/super-power-superstition-even-white-house-in-ghosts-clutches/): पश्चिमी या विकसित देशों की नज़र में आज भी भारत जादू-टोने का देश है. यहां के लोग अंधविश्वासी हैं, और इनमें आधुनिक सोच का अभाव है. मगर देखें, तो दुनिया को तराजू में तौलने वाले ऐसे कथित अग्रणी देश के लोगों में जितना अंधविश्वास कूट-कूटकर भरा है, उतना भारत तो क्या, शायद दुनिया के किसी […] - [मिल सकती है इंटरव्यू में सफलता व मनचाही नौकरी, करें ये उपाय](https://khulizuban.com/religion-rituals/interview-success-tips-land-dream-job/): सफलता के लिए मेहनत ज़रूरी है क्योंकि बैठे बिठाए कुछ भी नहीं मिलता.मगर, कई बार ऐसा भी होता है कि काफ़ी मेहनत-मशक्कत के बाद भी इंटरव्यू में सफलता या मनचाही नौकरी हासिल नहीं हो पाती है.ऐसे में, आवश्यक यह है कि हम अपनी तैयारियों की समीक्षा करें, और कुछ ऐसे उपायों पर भी गौर करें, […] - [वक्फ़ एक्ट: मुसलमानों का मज़हबी अधिकार या भारत के इस्लामीकरण का हथियार?](https://khulizuban.com/law-court/question-on-waqf-act-is-this-religious-right-of-muslims-or-a-constitutional-weapon-for-the-islamization-of-india-analysis/): वक्फ़ एक्ट को लेकर जब भी चर्चा होती है तो कहा जाता है कि यह किसी भी तरह से ठीक नहीं है. यह भारत के संविधान की मूल भावना के खिलाफ़ तो है ही, सेक्युलर ढ़ांचे को भी तहस-नहस करने वाला है. जानकारों के अनुसार कानून के रूप में यह ज़मीन आधारित वह व्यवस्था है, […] - [Rh Factor मायने रखता है बच्चे की सेहत के लिए?](https://khulizuban.com/health-education/rh-factor-importance-prenancy-baby-health-risks/): – जीवनसाथी के आरएच फैक्टर पर ध्यान दिया जाना ज़रूरी   – आरएच फैक्टर एक तरह का प्रोटीन है, जो रेड ब्लड सेल्स में पाया जाता है   – आरएच फैक्टर आनुवंशिक यानि ख़ानदानी होता है, जो माता-पिता से मिलता है   – संभावित मां यानि फ़ीमेल पार्टनर के शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी शिशु के […] - [दवा के रूप में भी काम आ सकती है दारू, इसके इस्तेमाल से मुंहासे और जुएं करें ख़त्म](https://khulizuban.com/health-education/alcohol-as-medicine-for-acne-and-lice/): यूं तो एल्कोहल यानि शराब बहुत बदनाम है, और इससे दूर रहने की सलाह दी जाती है.मगर, कम ही लोग यह जानते हैं कि पीने के अलावा एल्कोहल के कई अन्य उपयोग भी हैं.इसको मिलाकर कई ऐसी चीज़ें तैयार की जाती हैं, जो हमारी सेहत के लिए उपयोगी मानी जाती हैं, और कई बीमारियों के […] - [जानिए कान की सफ़ाई का तरीक़ा, आसानी से निकल जाता है मैल](https://khulizuban.com/health-education/know-easy-and-safe-ways-to-clean-ear-wax-at-your-home/): मन का मैल बड़ी कठिनाई से निकलता है. लेकिन कान के मैल के साथ ऐसी बात नहीं है. यह आसानी से निकल जाता है. वह भी बिना किसी नुकसान के. ऐसे कुछ तरीक़े हैं जिन्हें इस्तेमाल कर हम घर पर ही ख़ुद अपने कान की सफ़ाई कर सकते हैं.     कान का मैल और […] ## Pages - [Advertise](https://khulizuban.com/advertise-on-khulizuban-2/): Advertisement Rate Card & Policy 2026 Global Pricing (USD + INR) Payment Terms & Policy 100% Advance Payment (One Time) Accepted Payment Methods: Razorpay (For Indian Payments) PayPal (For International Payments in USD & other currencies) Bank Transfer Once the advertisement is published, no refund will be issued. 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