अजब-ग़ज़ब

‘सुपर पावर’ के अंधविश्वास के बारे में जानिए, व्ह्वाईट हाउस भी है भूतों के शिकंजे में!

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पश्चिमी या विकसित देशों की नज़र में आज भी भारत जादू-टोने का देश है. यहां के लोग अंधविश्वासी हैं, और इनमें आधुनिक सोच का अभाव है. मगर देखें, तो दुनिया को तराजू में तौलने वाले ऐसे कथित अग्रणी देश के लोगों में जितना अंधविश्वास कूट-कूटकर भरा है, उतना भारत तो क्या, शायद दुनिया के किसी और हिस्से में भी देखने को नहीं मिलेगा. उन्हीं में है सुपर पावर यानी अमरीका, जहां सबसे ज़्यादा ओझा गुनी पाए जाते हैं. ये लोगों को कथित प्रेतात्माओं से मुक्ति व शांति दिलाते हैं. झाड़-फूंक ही उनका पेशा है.
 
 
ओझा गुनी, झाड़-फूंक, सुपर पावर
तांत्रिकों का शहर और भुतिया ह्वाइट हाउस (प्रतीकात्मक)
अमरीका में वैसे तो कई जगहों पर तंत्र-मंत्र का अभ्यास करते लोग नज़र आते हैं. लेकिन एक शहर ऐसा भी है जिसकी आधी आबादी भूत-प्रेतों से बातें करती है. पर्यटन स्थल के रूप में विकसित इस शहर के लोगों की रोजी-रोटी भी झाड़-फूंक से ही चलती है. इससे भी बड़ी हैरानी की बात यह है कि ओझा-गुनियों के इस देश का राष्ट्रपति भवन यानी व्हाइट हाउस भी भूतिया है. यहां प्रेतात्माएं भटकती हैं, और अब तक उसे प्रेतात्माओं के शिकंजे से उसे आज़ाद नहीं कराया जा सका है.
 
 

तांत्रिकों का शहर कासाडागा

अमरीका के फ्लोरिडा राज्य में स्थित डेटाना और ऑरलेंडो के पीछे सूनसान जंगलों में क़रीब डेढ़ सौ साल पुराना एक शहर है कासाडागा टाउन. इसे दुनियाभर में ‘साइकिक कैपिटल’ के नाम से जाना जाता है. इस शहर की बहुसंख्यक आबादी तंत्र-मंत्र से जुड़ी है. हर तरफ़ लोग तंत्र-मंत्र साधना करते नज़र आते हैं.
 
इन्हें ‘स्पिरिचुअल हीलर्स’ या ओझा गुनी कहा जाता है. ये लोगों का तांत्रिक विधि से इलाज कर उन्हें भूत-प्रेतों से छुटकारा दिलाते हैं. इससे यहां पूरा साल मजमा लगा रहता है, और कमाई भी अच्छी होती है.
 
ईसाइयत और पश्चिमी दर्शन का मेल कहिए या जादू-टोने का खेल, यहां लोग प्रेतात्माओं से बात करते या उन्हें काबू करते नज़र आते हैं. आख़िरकार, पीड़ितों के शरीर से बुरी आत्माओं को मार भगा दिया जाता है, और लोग अपने आज़ाद शरीर में राहत और शांति महसूस करते हुए दान-दक्षिणा देकर विदा लेते हैं.
 
 

भूतों के साये में राष्ट्रपति भवन

अमरीकी राष्ट्रपति के घर यानि ह्वाइट हाउस को शायद ही कोई व्यक्ति नहीं जानता होगा. दुनिया का सब से सुरक्षित माने जाने वाले इस भवन में जहां बिना इज़ाज़त परिंदा भी पर नहीं मार सकता है वहां भूत-प्रेत घूमते हैं.
 
ह्वाइट हाउस में प्रेतात्माएं भटकती हैं, इसकी आम लोग तो क्या कई बड़ी हस्तियों ने भी पुष्टि की है. बताया जाता है कि उन 
प्रेतात्माओं में एक आत्मा अब्राहम लिंकन की भी है, जो कई बार देखी जा चुकी है.
 
ज्ञात हो कि साल 1865 में अमरीका के 16 वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की ह्वाइट हाउस के अंदर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. तभी से उनकी आत्मा वहां भटक रही है.
 
सबसे पहले राष्ट्रपति (पूर्व) केल्विन कूलिज की बीवी ग्रेस कूलिज ने ह्वाइट हाउस के ओवल ऑफिस की खिड़की के पास अब्राहम लिंकन को खड़ा देखा था. यहीं नहीं, उन्होंने कई बार लिंकन को अपने आसपास भी बैठा पाया था.
 
दूसरी बार, ह्वाइट हाउस में अब्राहम लिंकन का भूत नीदरलैंड की महारानी व्हिलमिना ने देखा था, जो वहां ठहरी थीं. उन्हें देर रात दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ सुनाई दी. जब उन्होंने दरवाज़ा खोला, तो अब्राहम लिंकन को खड़ा पाया.
 
ब्रिटेन के एक पूर्व राष्ट्रपति ने भी ह्वाइट हाउस में अब्राहम लिंकन का भूत देखा था. बताया जाता है कि यहां सुबह जब वे बाथरूम से नहाकर निकले, तो उनके कमरे में सिगार जल रहा था और लिंकन वहीं बैठे हुए थे.
 
इस प्रकार, देखा जाये तो यहां कितना विरोधाभास है. एक तरफ़ तो ये लोग दुनिया को अंधविश्वास के ख़िलाफ़ संदेश देते हैं और विज्ञान तथा तथ्यों की बात करते हुए इसकी आलोचना करते हैं. वहीं, ये ख़ुद पुरानी सोच और मान्यताओं में आकंठ डूबे हुए हैं. चलिए मान लिया जाये कि भूत-प्रेत होते हैं. तब यह और भी हैरानी की बात है कि सुपर पावर, जिसके यहां ईसाइयत और दर्शन के ऐसे विशेषज्ञ हैं, जो परलोक जा चुके लोगों की आत्माओं से सीधी बात करते हैं. उन्हें नियंत्रित करते हैं और भगा भी देते हैं, लेकिन इनका अपना राष्ट्रपति भवन ही भूतों के क़ब्ज़े में है, उस पर किसी का जादू नहीं चलता है!

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    रामाशंकर पांडेय

    दुनिया में बहुत कुछ ऐसा है, जो दिखता तो कुछ और है पर, हक़ीक़त में वह होता कुछ और ही है.इस कारण कहा गया है कि चमकने वाली हर चीज़ सोना नहीं होती है.इसलिए, हमारा यह दायित्व बनता है कि हम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं.वह चाहे समाज, संस्कृति, राजनीति, इतिहास, धर्म, पंथ, विज्ञान या ज्ञान की अन्य कोई बात हो, उसके बारे में एक माध्यम का पूर्वाग्रह रहित और निष्पक्ष होना ज़रूरी है.khulizuban.com का प्रयास इसी दिशा में एक क़दम है.

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