समाज

समय से पहले जवान हो रहे हैं बच्चे: कारण, ख़तरे और माता-पिता के लिए चेतावनी

बाहर से जवान दिख रहे बच्चे अंदर से अंदर से उतने ही मासूम और भावनात्मक रूप से कोमल हैं जितने उन्हें अपनी उम्र में होना चाहिए. मगर माता-पिता ध्यान नहीं देते हैं, और 'बच्चा जल्दी बड़ा हो रहा है' यह कहकर नज़रंदाज़ कर देते हैं, जबकि यह चिंता का विषय है. शरीर क्रिया विज्ञान के अनुसार यह स्वास्थ्य संबंधी ऐसा गंभीर संकेत है, जिसका समय रहते निदान नहीं किया गया, तो बहुत सारी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

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आजकल 7-8 साल की छोटी बच्चियां और 9-10 साल के बच्चे ऐसे दिख रहे हैं जैसे उन की उम्र 13-14 साल हो. स्तनों का विकास, माहवारी का शुरू होना, चेहरे पर बाल उगना, आवाज़ का बदलना और शरीर की तेजी से बढ़ोतरी- ये सब लक्षण अब पहले से कहीं ज़्यादा जल्दी दिखने लगे हैं. यह चिंता का विषय है. इस को लेकर माता-पिता को अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. साथ ही, समाज और देश के प्रबुद्ध लोगों से भी अपेक्षा है कि वे आगे आकर लोगों को जागरूक बनाने में योगदान करें.

बच्चों के बीच भी अलग-थलग और उदास बच्चे (सांकेतिक चित्र)

कुछ साल पहले की बात है. दिल्ली का एक नामी पब्लिक स्कूल एक दिन बच्चों को कहीं घुमाने ले जाने वाला था. तय कार्यक्रम के अनुसार बच्चे स्कूल आये, और टीचर उन्हें लेकर निकल पड़े. लेकिन आगे जाकर देखा तो पाया कि छठी कक्षा के दो बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) बस में नहीं थे. उन की क्लास के बच्चों से पता चला कि वे स्कूल तो आये थे, मगर बस में नहीं चढ़े. एक छात्र ने बताया कि उस ने उन्हें एक्टिविटी रूम (गतिविधि कक्ष) की ओर जाते हुए देखा था.

टीचर चिंतित थे पर मज़बूर थे, क्योंकि बस दूर निकल चुकी थी.

वापसी पर टीचरों ने स्कूल में उन्हें खोजना शुरू किया. कई कमरे तलाशे गए. जब एक्टिविटी रूम में गए, तो देखा कि दोनों बच्चे एक कोने में यौन-गतिविधि में रत थे. दरअसल, इस उम्र में वे यौन-क्रिया क्या करेंगें, इसे फोरप्ले (यौन-संबंध या संभोग से पहले की जाने वाली शारीरिक व भावनात्मक गतिविधियाँ) कह सकते हैं.

बहरहाल, कड़ाई से पूछताछ में उन्होंने बताया कि अपने घरों में वे अपने मम्मी-पापा (आधुनिक माता-पिता) को यही करते देखते हैं. इस में उन्हें आनंद आता है. उन्होंने यह भी बताया कि अक्सर वे टीवी और मोबाइल पर ऐसी तस्वीरें और वीडियो देखा करते हैं.

पिछले साल, दिल्ली के ही एक मध्यमवर्गीय परिवार में 7.5 साल (7 साल 5 महीने) की एक बच्ची को अचानक स्तनों का विकास और मूड स्विंग्स (भावनाओं में अचानक और तेजी से बदलाव, एकदम उदास या गुस्सा हो जाना) शुरू हो गए. शुरुआत में, माता-पिता इसे ‘बच्ची जल्दी बड़ी हो रही है’ समझकर अनदेखा करते रहे. लेकिन जब स्कूल में उस की सहेलियां उसे ‘दीदी’ कहने लगीं, और वह ख़ुद को अकेली महसूस करने लगी, तनाव में रहने लगी तब उन्हें चिंता हुई. जांच में चला कि उस का यौवन समय से लगभग 3-4 साल पहले आरंभ हो चुका है.

मुंबई की एक बाल-रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया शर्मा बताती हैं कि पिछले एक साल में उन की क्लीनिक में 8 साल से कम उम्र की 40 से ज़्यादा लड़कियां आईं, जिन में समय से पहले यौवन (जवानी) के लक्षण थे. एक 6.8 साल (6 साल 8 महीने) की बच्ची की माहवारी शुरू हो गई थी, जबकि उस की सहेलियां अभी गुड़िया से खेल रही थीं.

विशेषज्ञों के अनुसार पिछले 10-15 वर्षों में बच्चों में समय से पहले यौवन (Precocious Puberty) के मामले तेजी से बढ़े हैं, विशेषकर शहरों में. यह सिर्फ शारीरिक बदलाव नहीं है. बच्चा बाहर से जवान दिख रहा है, लेकिन अंदर से उतना ही मासूम और भावनात्मक रूप से कोमल या कमज़ोर है जितना वह अपनी उम्र में होता है. माता-पिता अक्सर इसे ‘बच्चा जल्दी बड़ा हो रहा है’ समझकर नज़रंदाज़ कर देते हैं, जबकि यह एक गंभीर स्वास्थ्य और विकास संबंधी चेतावनी है.

समय से पहले जवान होते बच्चों में लक्षण व प्रक्रिया

सामान्य रूप से लड़कियों में यौवन 8 से 13 साल, जबकि लड़कों में 9 से 14 साल के बीच आरंभ होता है. लेकिन आजकल कई बच्चों में ये बदलाव इस उम्र से काफ़ी पहले दिखने लगे हैं. इसे चिकित्सकीय भाषा में समयपूर्व यौवनारंभ (Precocious Puberty) कहते हैं.

लड़कियों में मुख्य लक्षण:

(1) 8 साल से पहले स्तनों का विकास (Breast budding)

(2) कांख या गुप्तांग क्षेत्र में बाल उगना

(3) माहवारी का शुरू होना (कुछ मामलों में 8-9 साल की उम्र में)

(4) शरीर का तेजी से बढ़ना (Growth spurt)

(5) कील-मुंहासे, शरीर की तेज गंध और मनोदशा (मूड) में बार-बार या लगातार बदलाव

लड़कों में मुख्य लक्षण:

(1) 9 साल से पहले अंडकोष व शिश्न (लिंग) का बढ़ना

(2) चेहरे, कांख या गुप्तांग क्षेत्र में बाल उगना

(3) आवाज़ का भारी होना

(4) मांसपेशियों का विकास और मुंहासे

(5) रात में लिंग खड़ा होना (Penile Erection) या स्वप्नदोष (Nightfall) होना

ये लक्षण आमतौर पर क्रम से आते हैं, लेकिन समय से पहले होने पर बच्चा शारीरिक रूप से बड़ा दिखता है, जबकि उस की मानसिक और भावनात्मक उम्र अब भी छोटी ही रहती है. कई बार बच्चे साथी बच्चों से अलग महसूस करते हैं, जिस से आत्मविश्वास पर असर पड़ता है.

महत्वपूर्ण बात:

सभी लक्षण एकसाथ नहीं दिखते हैं. अगर आपके बच्चे में ऊपर बताये गए लक्षणों में से कोई भी एक या दो लक्षण 8 साल (लड़कियों में) या 9 साल (लड़कों में) से पहले दिख रहे हैं, तो इसे सामान्य न समझें. समय रहते चिकित्सक (डॉक्टर) से जांच कराना ज़रूरी है.

समय से पहले यौवन के मुख्य कारण

आज के बच्चों में वक़्त से पहले जवानी आने या दिखने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह अचानक पैदा हुई समस्या नहीं है, बल्कि हमारी बदलती जीवनशैली और आसपास के वातावरण का प्रभाव है. आइये जानते हैं कि आख़िर बच्चे उम्र से पहले क्यों जवान हो रहे हैं:

(1) मोटापा और जंक फ़ूड की आदत

मोटापा और जंक फ़ूड का सेवन समयपूर्व यौवनारंभ का सब से बड़ा और आम कारण है. विदित हो कि आजकल बच्चे जंक फ़ूड, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स, बर्गर, पिज्जा और ज़्यादा मीठी चीजों का सेवन कर रहे हैं. इस से शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होती है. यह अतिरिक्त फैट हार्मोन (एस्ट्रोजन) बनाता है, जो यौवन को समय से पहले शुरू कर देता है.

मोटे बच्चे सामान्य वज़न वाले बच्चों की तुलना में 2-3 गुना ज़्यादा जल्दी जवानी में दाख़िल हो रहे हैं.

(2) प्लास्टिक और रसायन का प्रदूषण

हम रोज़ाना प्लास्टिक की बोतलों, टिफिन, खिलौनों और पैक फूड (Packaged food) का इस्तेमाल करते हैं. इन में मौजूद बीपीए (BPA- Bisphelol A) और फ्थालेट्स (phthalates- प्लास्टिक में मिलाये जाने वाले पदार्थ, जो उसे लचीला, पारदर्शी और टिकाऊ बनाते हैं) जैसे केमिकल शरीर में घुसकर हार्मोन प्रणाली को बिगाड़ देते हैं. ये केमिकल एंडोक्राइन डिसरप्टर्स (अन्तःस्रावी अवरोधक) कहलाते हैं. ये हार्मोन को इतना प्रभावित करते हैं कि बच्चे की उम्र से बहुत पहले ही जवानी शुरू हो जाती है.

(3) नींद की कमी और ज़्यादा स्क्रीन टाइम

न्यूक्लियर फैमिली (एकल परिवार) हो या शहरी वातावरण में जीता कोई अन्य परिवार, उस में बच्चे अपना ज़्यादातर समय स्क्रीन पर ही गुजारते हैं. यूं कहिये कि वे देर रात तक मोबाइल, टेबलेट और टीवी देखते हैं. इस से नींद पूरी नहीं होती है. साथ ही, नीली रौशनी (Blue Light) उन के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ देती है.

ज्ञात हो कि अच्छी नींद न मिलने से मेलाटोनिन हार्मोन कम होता है, जो यौवन को नियंत्रित रखता है. नतीजतन, उम्र से पहले जवानी के लक्षण दिखने लगते हैं.

(4) प्रदूषण और शहरी जीवनशैली

शहरों में हवा का प्रदूषण, कीटनाशक वाले फल-सब्जियां और फ़ास्ट फूड कल्चर बच्चों को सब से ज़्यादा प्रभावित कर रहा है. ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों में ये मामले ज़्यादा देखे जा रहे हैं.

(5) तंग कपड़े, सौन्दर्य प्रसाधनों का प्रयोग और अश्लील चित्र-वीडियो देखना

तंग कपड़ों से शरीर असहज स्थिति में रहता है, और समस्याएं भी होती हैं. रात में इस से नींद पर प्रभाव हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि कपड़े प्रिंट या प्लास्टिक सामग्री (बीपीए और फ्थालेट्स) में हों, तो हार्मोनल बैलेंस बिगाड़कर समयपूर्व यौवन के आरंभ का कारण बन सकते हैं.

बच्चों में सौन्दर्य प्रसाधनों, जैसे सुगंधित लोशन, क्रीम, हेयर ऑयल, शैंपू, परफ्यूम, सनस्क्रीन, मेकअप, नेल प्रोडक्ट की भूमिका ज़्यादा गंभीर मानी जाती है, क्योंकि इन में पाए जाने वाले कुछ रसायन (Phthalates, Parabens, Phenols, Triclosan, Benzophenone-3) अन्तःस्रावी अवरोधक (Endcrine Disruptors) होते हैं. ये एस्ट्रोजन जैसा प्रभाव डाल सकते हैं, एंड्रोजन को बाधित कर सकते हैं और GnRH-LH-FSH hormonal pathway को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में, विशेषकर लड़कियों में स्तन विकास (Premature thelarche), पहले मासिक धर्म की शुरुआत (Early menarche), आदि का जोखिम बढ़ सकता है. यूं कहिये कि बच्ची समय से पहले यौवन में प्रवेश कर सकती है.

अध्ययन बताते हैं कि अश्लील चित्र-वीडियो देखने से बच्चों पर मानसिक और व्यावहारिक प्रभाव हो सकते हैं, जैसे यौन जिज्ञासा जल्दी बढ़ना, यौन व्यवहार जल्दी दिखना, चिंता-अपराधबोध और भ्रम की स्थिति, नींद की कमी, ज़्यादा स्क्रीन टाइम, कम शारीरिक गतिविधि, इत्यादि.

अश्लील चित्र या वीडियो बच्चों को यौन व्यवहार की ओर प्रेरित करते हैं, जो समयपूर्व यौवनारंभ से जुड़ा है. हालाँकि यौन स्पर्श (Sexual touch) भी एक शक्तिशाली कारक बताया जाता है. एक रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में यौन स्पर्श से समय से पहले यौवन (Early puberty) का आगमन हो सकता है.

(6) अन्य चिकित्सकीय कारण

कुछ बच्चों में यह समस्या आनुवंशिक होती है या मस्तिष्क, थायरॉयड या अंडाशय से जुड़ी कोई समस्या के कारण होती है. हालाँकि ये मामले कम होते हैं. ज़्यादातर बच्चों में समस्या जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़ी होती है.

महत्वपूर्ण बात:

उपरोक्त में से ज़्यादातर कारण हमारे ही कारण हैं, या फिर यूं कहिये कि उन के लिए उत्तरदायी हम ही हैं. अगर हम बच्चों के खानपान या डाइट, नींद और स्क्रीन टाइम पर ध्यान दें, समय से पहले यौवन की समस्या को काफ़ी हद तक रोका जा सकता है.

असमय यौवन के ख़तरे और परिणाम के बारे में जानें

समय से पहले यौवन केवल शारीरिक बदलाव नहीं, बल्कि कई गंभीर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक समस्याएं भी पैदा कर सकता है. शुरू में बच्चा तेजी से लंबा होता दिखता है, लेकिन बाद में कई नुकसान सामने आते हैं.

(1) कद छोटा रह जाना

असमय यौवन का सब से आम और प्रमुख ख़तरा यही है. बच्चे शुरू में तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन हड्डियां जल्दी परिपक्व हो जाती हैं. नतीजा यह होता है कि अस्थि वृद्धि पट्टिका या ग्रोथ प्लेट (वह स्थान जहां लंबी हड्डी बढ़ती है, लंबाई में वृद्धि होती है) समय से पहले बंद हो जाती है और अंत में बच्चा अपने संभावित कद से काफ़ी छोटा रह जाता है. समय पर इलाज न होने पर यह समस्या और बढ़ जाती है.

(2) मानसिक और भावनात्मक समस्याएं

जल्दी जवान हो रहा बच्चा शारीरिक रूप से तो बड़ा दिखता है, लेकिन उस की मानसिक उम्र अब भी छोटी ही होती है. इस से उसे आत्मविश्वास में कमी, शारीरिक छवि (Body Image) की समस्या, अवसाद (Depression), डर या घबराहट (Anxiety) और बदमाशी या डराने-धमकाने (Bullying) का ख़तरा बढ़ जाता है.

कई अध्ययनों में पाया गया है कि ऐसे बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम सामान्य बच्चों से ज़्यादा होता है.

(3) चयापचय (Metabolic) और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम

(क) मोटापा, इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Registance) और टाइप- 2 डायबिटीज का बढ़ा ख़तरा

(ख) हाई ब्लड प्रेशर और ह्रदय रोग की संभावना

(ग) लड़कियों में PCOS (पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) का थोड़ा बढ़ा जोखिम

(4) अन्य दीर्घकालिक परिणाम

लंबे समय में दिखाई देने वाले अन्य परिणाम इस प्रकार है:

(क) लड़कियों में स्तन कैंसर (Breast cancer) थोड़ा बढ़ा जोखिम

(ख) कुछ मामलों में जल्दी वयस्कता संबंधी व्यावहारिक जोखिम

(ग) जीवन की गुणवत्ता पर असर

महत्वपूर्ण बात:

ये ख़तरे सभी बच्चों में समान नहीं होते हैं. कई मामलों में समस्या हल्की होती है, लेकिन लक्षण अगर तेजी से दिख रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना ज़रूरी है. बताते हैं कि सही समय पर GnRH एनालॉग थेरेपी जैसे उपचार से इन में से ज़्यादातर जोखिमों को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है.

माता-पिता के लिए चेतावनी और व्यावहारिक सुझाव

अगर आपके बच्चे में समय से पहले यौवन के कोई भी लक्षण दिख रहे हों, तो इसे ‘बच्चा जल्दी बड़ा हो रहा है’ समझकर नज़रंदाज़ न करें. यह एक गंभीर संकेत हो सकता है, जिसे समय रहते संभालना ज़रूरी है. बच्चा बाहर से जवान दिख सकता है, लेकिन अंदर से वह अब भी उतना ही मासूम और भावनात्मक रूप से कमज़ोर है. ग़लत वक़्त पर आने वाली जवानी से उस की पढ़ाई और आत्मविश्वास के साथ भविष्य भी प्रभावित हो सकता है.

माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी:

(क) लक्षण दिखते ही तुरंत पीडियाट्रिशियन या बाल रोग एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से संपर्क करें.

(ख) 8 साल से पहले लड़कियों और 9 साल से पहले लड़कों में कोई भी यौन संबंधी लक्षण सामान्य नहीं माना जाना चाहिए.

(ग) देरी करने से कद छोटा रहने मानसिक तनाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का ख़तरा बढ़ जाता है.

व्यावहारिक सुझाव- क्या करें क्या न करें

(1) स्वस्थ आहार अपनाएं

जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेट वाले स्नैक्स कम करें या उस से बचें. घर का पौष्टिक भोजन, फल, सब्जियां और दाल-रोटी और चावल दें. मोटापे को नियंत्रित रखने का यह सब से प्रभावी उपाय है.

(2) नींद का पूरा ध्यान रखें

बच्चे को रोज़ाना कम से कम 8-10 घंटे के अच्छी नींद अवश्य दिलाएं. रात को मोबाइल, टेबलेट और टीवी बंद रखें.

(3) स्क्रीन टाइम सीमित करें

रोज़ाना स्क्रीन का समय 1-2 घंटे से ज़्यादा न होने दें, विशेषकर सोने से 1 घंटा पहले बच्चों को किसी भी डिवाइस या गैजेट का उपयोग बिल्कुल भी न करने दें.

विशेषकर ध्यान रखें कि बच्चे मोबाइल या टेबलेट पर अश्लील चित्र या वीडियो तो नहीं देख रहे हैं. अगर ऐसा है, तो उन्हें प्यार से अच्छे और बुरे के बीच फर्क बताएं. साथ ही, समय-समय पर शुचिता और आध्यात्म का पाठ भी पढ़ाएं.

(4) शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं

बच्चे को रोज़ाना कम से कम 1 घंटा खेलने, दौड़ने या घर से बाहर गतिविधि (Outdoor activity) करवाएं. इस से वज़न नियंत्रित रहता है, और हार्मोन संतुलन भी बना रहता है.

(5) सौन्दर्य प्रसाधनों को लेकर सावधानी बरतें

कॉस्मेटिक्स या पर्सनल केयर प्रोडक्ट में आने वाली कई चीजें नुकसान पहुँचाने वाली होती हैं, मगर लोग ध्यान नहीं देते हैं और नतीजतन, आजकल बच्चे भी इन का इस्तेमाल करते हैं. यह खतरनाक हो सकता है.

इसलिए, प्राकृतिक और बिना खुशबू के उत्पाद (fragrance-free products) चुनें.

ख़रीदते समय देखें कि प्रोडक्ट paraben-free या phthalate-free है या नहीं. यानी paraben या phthalate की मिलावट वाली चीजों से परहेज़ रखें.

बच्चों को कम से कम मात्रा में परफ्यूम या लोशन का प्रयोग करने दें.

उन्हें Plastic-heavy fragranced Products बहुत कम प्रयोग करने दें, या इन से बचने की सलाह दें.

(6) बच्चे से खुलकर बात करें

शारीरिक बदलावों के बारे में शर्मिंदगी या डर के बिना सरल भाषा में समझाएं. उन्हें बताएं कि यह कोई ग़लत बात नहीं है, लेकिन डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है.

(7) समय पर जांच कराएं

अगर कोई लक्षण दिखे तो ब्लड टेस्ट, बोन एज टेस्ट या हार्मोन जांच करवाएं. ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर GnRH थेरेपी जैसा इलाज सुझा सकते हैं, जो आगे की समस्याओं को रोकने में बहुत प्रभावी है.

और अंत में, समय रहते सावधानी बरतकर और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपने बच्चों को स्वस्थ, आत्मविश्वासपूर्ण और सही विकास की राह पर रख सकते हैं. जागरूक माता-पिता ही बच्चों का भविष्य बचा सकते हैं.

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    रामाशंकर पांडेय

    दुनिया में बहुत कुछ ऐसा है, जो दिखता तो कुछ और है पर, हक़ीक़त में वह होता कुछ और ही है.इस कारण कहा गया है कि चमकने वाली हर चीज़ सोना नहीं होती है.इसलिए, हमारा यह दायित्व बनता है कि हम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं.वह चाहे समाज, संस्कृति, राजनीति, इतिहास, धर्म, पंथ, विज्ञान या ज्ञान की अन्य कोई बात हो, उसके बारे में एक माध्यम का पूर्वाग्रह रहित और निष्पक्ष होना ज़रूरी है.khulizuban.com का प्रयास इसी दिशा में एक क़दम है.

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